Wednesday, May 26, 2021

KHO GAI

 

            खो गई 

 

एक आलस भरी शाम ,

      अँगड़ाई ले कर सो गई ,

            रात की चादर में ,

                  सारी दुनिया खो गई | 


सुबह के आँचल की ,

     हवा ने जाकर ,सभी को जगाया ,

         दुनिया फिर से ,उषा की ,

               लालिमा में खो गई | 


देख तेरे रूप को ,

     आईना थर्रा उठा ,

          पर यहाँ पर मैं तो ,

               मीठे सपनों में खो गई | 

     

Tuesday, May 25, 2021

BATAA KAISE ? ( JIVAN )

 

          बता कैसे ? 


दिल में है तेरी याद ,

   होंठों पे तेरा नाम ,

      तू ही बता कि कैसे ? 

           बीते ये मेरी शाम | 


मन भी है ये तेरा ही ,

     तन भी है ये तेरा ही ,

          तू ही बता कि कैसे ? 

               तन - मन को दूँ इल्जाम | 


चाहा नजर ने तुझको ,

    पाया नजर ने तुझको ,

        तू ही बता की कैसे ? 

              नजरों को लूँ मैं थाम | 


है दूर अब तू मुझसे ,

    प्यासी ये नजर तरसे ,

         तू ही बता कि कैसे ? 

               गुजरें ये सुबह शाम | 


Monday, May 24, 2021

PRATILIPI SANG EK SAAL ( DAAYARI - 25/05/2021 )

 

 डायरी मेरी सखि    ( 25 / 05 / 2021 ) 

 

आज का दिन  25   मई  2021 , 

एक वर्ष पहले भी ये तारीख थी 2020 में ,

वह दिन मेरा था प्रतिलिपि पर ,

पहला दिन था दोस्तों पहला दिन | 

 

आज एक वर्ष पूरा प्रतिलिपि में ,

5000 से अधिक पाठक दोस्त हैं ,

225 से अधिक फॉलो करते दोस्त हैं ,

वाह ! इतने सारे दोस्त हैं | 

 

दोस्तों आप सभी का साथ ,

दोस्तों आप सभी का प्यार ,

रखेगा मुझे प्रतिलिपि परिवार में ,

प्यार पाया है मैंने आप सब के व्यवहार में | 

 

कोरोना का लॉकडाउन ,

घर में कैद ,बाहर ना जाना ,

सारा समय बीतता जा रहा है ,

प्रतिलिपि में बसे दोस्तों के प्यार में | 

 

साथ बना रहेगा और प्यार बना रहेगा ,

तो रास्ता काटना आसान रहेगा दोस्तों ,

मंजिल तक पहुँचना सरल होगा ,

पहले दिन नहीं रहे तो ये भी नहीं रहेंगे ,

 नई सुबह का सूरज जल्दी उगेगा दोस्तों ,

पढ़ने ,लिखने के साथ ही मुस्कुराहटें होंगी दोस्तों | 

 

  

Sunday, May 23, 2021

MUSKAAN KITABEN ( KSHANIKA )

 

 

          मुस्कान  किताबें 

 

ज्ञान का भंडार किताबें ,

   विज्ञानं की हैं खोज किताबें ,

      मनोरंजन का संसार किताबें ,

         जीवन का हैं तार किताबें | 

 

बिना किताबें जग है सूना ,

   बिना किताबें मन है सूना ,

       बिना किताबें स्वर है सूना ,

           स्वर की तो हैं ताल किताबें | 


 बिना किताबें युग ना जाने ,

     बिना किताबें इतिहास ना जाने ,

        बिना किताबें लय ना जाने ,

           लय की तो हैं झंकार किताबें | 


बिना किताबें किसने ,क्या खोजा ? 

   बिना किताबें किसने ,क्या लिखा ? 

      बिना किताबें कौन ,कब आया ? 

          इन सब का हैं सार किताबें | 


बिना किताबें कैसी कहानी ? 

    बिना किताबें कैसी कविता ? 

       बिना किताबें लेखक कौन ? 

            कविताओं का भाव किताबें | 


मनोरंजन सूना हो जाए ,

   गीत ,गान कोई कैसे गाए ? 

      नृत्य ,ताल के बिना हो कैसे ? 

          मनोरंजन की मुस्कान किताबें | 


तुम भी पढ़ लो ,हम भी पढ़ लें ,

    उन को अपने दिल में गुन लें ,

        उनकी खामोश आवाज को सुन लें ,

            ले लो झोली भर - भर यार किताबें | 


Wednesday, May 19, 2021

BHULAA KE ( GEET )

 

              भुला के 

 

संसार की हर शय को ,

   पाया है तुझे पा के ,

       तेरी बाँहों में आई हूँ ,

            दुनिया को मैं भुला के | 

 

जीवन के रास्ते में ,

    चलती हूँ इस तरह से ,

         चलता हो कोई राही ,

              मंजिल को अपनी पा के | 

 

खुशियाँ मेरे दामन में ,

    यूँ भर गईं हैं साजन ,

        ज्यूँ बहार ठहर जाए ,

             गुलशन में किसी जा के | 

 

खुशियाँ मिलें सभी तुझे ,

    हर तमन्ना हो पूरी तेरी ,

        तेरी ख़ुशी को ढूँढूँगी ,

              मैं जिंदगी गँवा के | 

 

Tuesday, May 18, 2021

HONTH MUSKURAE ( SHORT POEM )

 

            होंठ मुस्कुराए 

 

निगाहें उठीं ,और झुक गईं ,

नजरें मिलीं ,और बच गईं | 

 

होंठ हिले ,मगर बंद ही ,

लव्ज खिले ,मगर मंद ही | 

 

मौन छूटा नहीं ,सन्नाटा टूटा नहीं ,

आखिर तुम ही बोले ,चलो होंठ तो खोले | 

 

कहा बोलने को ,पर मैं क्या बोलती ? 

दिल में ,बातें बहुत थीं ,पर होंठ ,कैसे खोलती ? 

 

बस एक बार फिर ,पलकें उठीं ,नजरें मिलीं ,

और होंठ मुस्कुराए ,मगर मंद - मंद ही | 

 

Monday, May 17, 2021

KHAAMOSHII ( PREM GEET )

 

             ख़ामोशी

 

ख़ामोशी ,प्यार भरी ,

    फैली है बीच में ,

        दो दिल हैं पास - पास ,

            बाँहों का बंधन है ,

                नज़रों का संगम है | 

 

साँसों की सरगम पर ,

    भावनाओं के उतार -चढ़ाव ,

        कह  जाते हैं दिल की बात ,

             जरूरत ना शब्दों की ,

                 जरूरत दिल की धड़कन की | 


अधखुले होंठ और ,

     अधमुंदीं पलकें ही ,

         लव्ज बन जाते हैं ,

             पपड़ाए होंठ ही ,

                 गरम साँसों के इकरार का ,

                     माध्यम बन जाते हैं |