Thursday, August 27, 2026

DIL KII KAHANII ( PREM )


                      दिल की कहानी  


दिल में प्यार बसा लो तुम  , जैसे खुश्बु फूलों में  ,

होठों पे मुस्कान सजा लो तुम  , जैसे मुस्कान फूलों में  ,

यही सब तो सुंदरतम  , समय है जीवन में    || 


दिल शरीर का एक , हिस्सा है दोस्तों  ,

जो शरीर में रक्त - संचार , को नियंत्रित करता है  ,

मगर हमारी भावनाएँ भी , दिल ही नियंत्रित करता है   || 


हमारे प्यार , नफरत , क्रोध , करुणा सभी को  ,

दिल भी संभावना है , वही निर्णय लेता है  ,

ऐसा करते हुए , दिल की धड़कनें , 

तेज या धीमी हो जाती हैं  , दिल तड़प उठता है   || 


दिल की गहराईयों में डूबकर , प्यार को समझ लो ,

दिल कोई मशीन नहीं है  ,

वह तो भावनाओं को , समझने वाला ,

एक मंदिर है , जिसमें प्यार के साथ पूजा होती है   || 






  








Wednesday, August 26, 2026

SANDESAA ( KSHANIKAA )


                            संदेसा 


संदेसा क्या होता है  दोस्तों   ?

अपने दिल की बात , मोबाईल पर लिखकर  ,

भेजना ही , आज की भाषा में संदेसा होता है  ,

अब से बहुत साल पहले , पत्र में दिल की बात  ,

लिखकर भेजना ही , संदेसा कहलाती थी    || 


तब तो संदेसा पहुँचने में , कई दिन लगते थे  ,

संदेसे का जवाब तो , एक सप्ताह से पहले  ,

नहीं मिल पाता था  ,

मगर आज का संदेसा तो  , फौरन ही पहुँच जाता है   || 


मगर क्या आज का , संदेसा दिल की आवाज ,

पहुँचाती है  , नहीं दोस्तों  ?

पत्र में लिखे संदेसे में तो  ,

दिल के भाव भी पहुँचते थे  ,

तो असली संदेसे तो  , वही पुराने थे   दोस्तों   || 










 


Tuesday, August 25, 2026

NINDIYAA ( KSHNIKAA )


                            निंदिया 


रोज तू सुलाती थी ,आज तू आई क्यों नहीं  ?

रोज तू सपने दिखाती थी , आज तू लाई क्यों नहीं  ?

निंदिया तू इतनी , कठोर क्यों हो गई   ?? 


पूरे दिन में काम करते , हम थक जाते हैं  ,

पूरे दिन में  हम  , व्यस्तता में रहते हैं  ,

मगर अब रात में तूने हमें  , सुलाया क्यों नहीं   ?? 


आज तो तू आजा री निंदिया  , रात आ गई  ,

हमारी थकावट भी कह रही है , रात आ गई  ,

तो आजा तू हमारी आँखों में  , अब रात आ गई   || 



  






JIVAN MEIN ( JIVAN )

 

                             जीवन में 

 

तुझे देखा , तुझे चाहा , तुझे ही प्यार किया मैंने  ,

ये प्यार ही तो है दोस्तों , जिसे अपनाया है हमने , 

जो प्यार हमें करते हैं , वो ही तो हैं मेरे अपने   || 

 

जीवन की राहों के मोड़ों पर , मिल जाएँ जो अपने  ,

सच ही तो  हो  जाएँगे ,  मेरे सभी मीठे सपने  ,

सपने सभी हो जाएँगे  रंगीन , डूब कर रंग में   || 

 

तुम जो मिल जाओ दोस्त , अगर इस जीवन में ,

प्यार खिल जाएगा ऐ - दोस्त  ,मेरे इस जीवन में   ,

तो आओ हम अपना लें , यही साथ इस जीवन में    || 

 

Sunday, August 23, 2026

KEEMAT ( KSHANIKAA )


                           कीमत  


मुस्कानों ने पुकारा है , दोस्तों मुस्काओ  ,

आओ दोस्तों  , महफिल में तुम आओ  ,

ये जीवन जो मिला हमको  , मुस्का  कर बिता जाओ  ,

जिंदगी के हर पल में  , दोस्तों खिलखिलाओ   || 


रचेता साथ है सबके , उसका साथ सब पाओ  ,

उसको जब साथ में पाओ  , आशीष उसका पाओ  || 

तब तुम भी उसके  , भरोसे - मंद बन जाओ   || 


कीमत तुम समझो , मुस्कानों की दोस्तों  ,

कीमत तुम समझो  , जीवन की दोस्तों  ,

कीमत तुम समझो  , वक्त की दोस्तों  ,

कीमत तुम समझो , अपनी भी दोस्तों  ,

ना कुछ भी व्यर्थ गँवाओ  दोस्तों  ,

ना कुछ भी व्यर्थ गँवाओ   || 









DOSH ( JIVAN )

 

                                दोष 

 

किसी भी विपत्ति में फँसने पर , हर कोई  ,

पितृ दोष ,गृह दोष , वास्तु दोष , शनि दोष को ,

सारा दोष दे देता है दोस्तों  ,

मगर वह कहीं  भी  , अपना दोष नहीं देखता दोस्तों   || 

 

जरा आँखें बंद करके , अंतर्मन को देखो दोस्तों ,

थोड़ा विचार करो दोस्तों ,तो जान जाओगे ,

दोष तो तुम्हारा ही है दोस्तों    || 

 

उस दोष को समझो दोस्तों , और उस दोष को ,

दूर करने का प्रयास करो दोस्तों  ,कोशिश करोगे ,

तो अपने दोष को , दूर कर लोगे दोस्तों   || 

 

कोशिश करने वालों की , हार  नहीं होती ,

जीत हो ना हो ,मगर विपत्ति दूर करने का ,

कुछ तो हल निकलेगा , और आप ,

उस विपत्ति से बाहर , निकल ही जाओगे  दोस्तों  ||  

 

Friday, August 21, 2026

SAMAY KO SAMAY SE ( JIVAN )

 

                           समय को समय से 

 

समय ने शोर मचाया , कहा , तुम सभी कर्म करो  ,

व्यर्थ ना गँवाओ मुझे , फुर्सत के नाम पर  ,

धीरे - धीरे तुम जीवन ही  , व्यर्थ गँवा दोगे दोस्तों   ?? 

 

यदि नहीं समझे दोस्तों  , तो पूरी  कोशिश करो  ,

अगर समझ जाओगे , तभी तो सोचकर समय खर्च करोगे  ,

समय जाने के बाद कभी , लौट कर नहीं आता दोस्तों  ,

इसलिए समय को , समेट  कर रखो दोस्तों  || 

 

समेटने का अर्थ मुट्ठी में , पकड़ना नहीं है  ,

मुट्ठी से तो वह ,  रेत की तरह फिसल जाएगा  ,

समय को समय से  , खर्च करो दोस्तों   ||