आईना
आज यारों आईने ने बात की हमसे ,
बोला -- " क्या हाल है ?"
" जिंदगी कैसी चल रही है ?"
मैंने कहा -- " अच्छी चल रही है || "
वह बोला -- " फिर आँखों की चमक कहाँ गई ?
आँखों का काजल कहाँ गया ?
होठों की मुस्कान कहाँ खो गई ?
वापिस बुलाओ तीनों को , चेहरा सजा लो || "
वह फिर बोला -- " कहाँ गए हाथों के कंगन ?
जब तक कंगना नहीं खड़केंगे ,
तेरा दिल नहीं धड़केगा ,
तो दिल की धड़कन के लिए ,
पहन ले तू अपने कंगना || "
उसका कहना माना , वही किया जो उसने कहा ,
यारों आईना खुश हो गया ,
और बोला -- " अब हुई ना कोई बात ,
अब मेरी दोस्त लगती हो , सुंदर लगती हो ,
अब आगे भी ऐसी ही रहना , ऐसी ही रहना || "
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