तोल - मोल कर
जुबान से निकले शब्द ही , रिश्ते जोड़ते हैं दोस्तों ,
जुबान से निकले शब्द ही , रिश्ते तोड़ते हैं दोस्तों ,
द्रौपदी स्वयंवर के समय , द्रौपदी के कहे शब्द ,
कर्ण के लिए ," सूत पुत्र से शादी नहीं करूँगी ",
कर्ण के दिल को ,टुकड़े - टुकड़े कर दिया ||
इंद्रप्रस्थ में युधिष्ठिर के , राज्याभिषेक के समय ,
दुर्योधन के पानी में गिरने पर , द्रौपदी का व्यंग्य ,
" अंधे का पुत्र अंधा ", ने महाभारत की नींव रखी ,
बिना सोचे बोले गए शब्द , जब युद्ध की नींव रखते हैं ,
तो रिश्ते क्या चीज हैं ? वो तो टूट ही जाते हैं ||
तो दोस्तों सोच - समझ कर बोलो ,
तोल - मोल कर बोलो ,
यही जीवन है , इसे सुंदर बना लो ,
यही जीवन है , इसे सुगम बना लो ||
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