Sunday, January 18, 2026

UDATII RAAHEN ( KSHANIKAA )

 

                         उड़ती राहें 

 

हमने समझा जीवन की राहें  , सीधी हैं दोस्तों  ,

मगर हर दस कदम के बाद , राहें मुड़ती चली गईं  ,

ना जाने किस - किस अवरोध पर  , राहें उड़ती चली गईं  || 

 

उन राहों पर चलने के लिए  ,हमें तो दौड़ना पड़ा  ,

हर आने वाले मोड़ पर , हमें मुड़ना पड़ा  ,

हर आने वाले अवरोध पर  ,हमें भी उड़ना पड़ा  दोस्तों   || 

 

हर कदम पर हमने  , कितना दर्द सहा   ?

वह दर्द जो बरसों , हमारी रग - रग में बहा  ,

उस दर्द ने कोशिश तो बहुत की , हमारे हौसले तोड़ने की ,

मगर हम तो अटूट हौसलों के , खजाने रखते हैं  ,

तो कोई भी और कुछ भी , हमें कैसे तोड़ेगा   ?? 

 

हम तो मुस्कानों के साथ , हर राह पर  ,

चलेंगे ही नहीं दौड़ेंगे भी  दोस्तों  ,

जरूरत पड़ने पर , हम तो राहों में उड़ेंगे दोस्तों   || 

 

 

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