उड़ती राहें
हमने समझा जीवन की राहें , सीधी हैं दोस्तों ,
मगर हर दस कदम के बाद , राहें मुड़ती चली गईं ,
ना जाने किस - किस अवरोध पर , राहें उड़ती चली गईं ||
उन राहों पर चलने के लिए ,हमें तो दौड़ना पड़ा ,
हर आने वाले मोड़ पर , हमें मुड़ना पड़ा ,
हर आने वाले अवरोध पर ,हमें भी उड़ना पड़ा दोस्तों ||
हर कदम पर हमने , कितना दर्द सहा ?
वह दर्द जो बरसों , हमारी रग - रग में बहा ,
उस दर्द ने कोशिश तो बहुत की , हमारे हौसले तोड़ने की ,
मगर हम तो अटूट हौसलों के , खजाने रखते हैं ,
तो कोई भी और कुछ भी , हमें कैसे तोड़ेगा ??
हम तो मुस्कानों के साथ , हर राह पर ,
चलेंगे ही नहीं दौड़ेंगे भी दोस्तों ,
जरूरत पड़ने पर , हम तो राहों में उड़ेंगे दोस्तों ||
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