Friday, January 23, 2026

MAA ( KSHANIKAA )

 

                                     माँ 

 

माँ ने दिए बरसों - बरस , अपने बच्चों को बड़ा किया  ,

उन्हीं बच्चों ने उसी माँ को  , अपने से अलग किया ,

दूर किया , बच्चों को चाहिए थी , अपनी आजादी , आजादी  || 

 

फिर पूछा माँ से , पैसा ले लो , सामान ले लो ,

माँ ने हँस कर कहा , देना है तो मेरे वक्त को लौटा दो ,

बच्चों  ने देखा  , एक - दूजे को , वो लाजवाब थे  ,

गुजरे वक्त को लौटा , तो नहीं सकते थे  || 

 

दोस्तों यही दुनिया का दस्तूर है  ,

जिंदगी माँ की दर्द से चूर है  , मगर माँ गर्व से चूर है ,

 जिंदगी अपने ढंग से बिताएगी , 

हाथ ना फैलाया कभी , किसी के आगे , 

आगे भी ऐसा ही रहेगा , ऐसा ही रहेगा   ||  

 

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