माँ
माँ ने दिए बरसों - बरस , अपने बच्चों को बड़ा किया ,
उन्हीं बच्चों ने उसी माँ को , अपने से अलग किया ,
दूर किया , बच्चों को चाहिए थी , अपनी आजादी , आजादी ||
फिर पूछा माँ से , पैसा ले लो , सामान ले लो ,
माँ ने हँस कर कहा , देना है तो मेरे वक्त को लौटा दो ,
बच्चों ने देखा , एक - दूजे को , वो लाजवाब थे ,
गुजरे वक्त को लौटा , तो नहीं सकते थे ||
दोस्तों यही दुनिया का दस्तूर है ,
जिंदगी माँ की दर्द से चूर है , मगर माँ गर्व से चूर है ,
जिंदगी अपने ढंग से बिताएगी ,
हाथ ना फैलाया कभी , किसी के आगे ,
आगे भी ऐसा ही रहेगा , ऐसा ही रहेगा ||
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