खेलों का समय
हमारा बचपन आज भी , हमारे दिल में पलता है यारों ,
वो हमारे दोस्त , उनके कहकहे , उछलना - कूदना ,
दौड़ लगाकर सबसे आगे , निकलने का उछाह ,
आज भी दिल को , धड़कनें देता है यारों ||
छुपन - छुपाई खेलते हुए , सब छिप जाते ,
पर शैतानी में हम तो , डैन होने पर , आराम से घर जाते ,
सभी दोस्त काफी देर तक , छिपने के बाद हमें ढूँढते ,
और मिलने के बाद , खूब ठहाके लगाते यारों ||
जीवन मस्त था , खुशियों में डूबा था ,
वही तो सच्चा जीवन था , सुंदर जीवन था ,
आज वैसा जीवन तो नहीं , मगर मुस्कानों में डूबा है ,
यही आज का जीवन है , जो सुंदर और मनमोहक है ||
No comments:
Post a Comment