Tuesday, January 20, 2026

ARTH - ANARTH ( SAAMAJIK )

 

                            अर्थ - अनर्थ 

 

सुने - अनसुने से शब्द  , हमारे दिल में समा जाते हैं  ,

  कभी - कभी वही शब्द ,  बाहर भी निकल आते हैं ,

कोई उन शब्दों को , पसंद करता है , कोई नहीं     || 

 

हर शब्द के कुछ , अर्थ होते हैं दोस्तों  ,

कुछ सुंदर अर्थ और , कुछ असुंदर अर्थ  ,

हर कोई अपने अनुसार ही , अर्थ मान लेता है   || 

 

अर्थ का अनर्थ  , बना लेता है कोई  ,

दूसरे   की इज्जत की अर्थी  , निकाल देता है कोई  ,

दूसरे की इज्जत धुंआ - धुंआ  , करना एक पाप है  ,

और जो पाप करता है  , वह पापी कहलाता है दोस्तों   || 

 

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