अर्थ - अनर्थ
सुने - अनसुने से शब्द , हमारे दिल में समा जाते हैं ,
कभी - कभी वही शब्द , बाहर भी निकल आते हैं ,
कोई उन शब्दों को , पसंद करता है , कोई नहीं ||
हर शब्द के कुछ , अर्थ होते हैं दोस्तों ,
कुछ सुंदर अर्थ और , कुछ असुंदर अर्थ ,
हर कोई अपने अनुसार ही , अर्थ मान लेता है ||
अर्थ का अनर्थ , बना लेता है कोई ,
दूसरे की इज्जत की अर्थी , निकाल देता है कोई ,
दूसरे की इज्जत धुंआ - धुंआ , करना एक पाप है ,
और जो पाप करता है , वह पापी कहलाता है दोस्तों ||
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