कहानी रिश्तों की
सब जगह की रीत अलग , हर समय की रीत अलग ,
समय पुराना था , बड़े - बड़े परिवार थे ,
मिल- जुल कर रहते थे , आज समय बदला हुआ है ,
परिवार बहुत छोटे हो गए ,
मिलना - जुलना खत्म हो गया , सिर्फ एकल परिवार ||
ना रिश्ते ना नाते हैं , ना ही पास - पड़ोसी हैं ,
कौन मिलेगा ? कौन चलेगा ? साथ में सब राहों में ,
कौन समझेगा ? एक - दूजे की व्यथा ,
कौन खुशी में जुड़ जाएगा ??
तो समझ - बूझ से ले लो काम , " एकला चलो रे ",
इस गीत को मत अपनाओ ,
मिल - जुल कर , उस पुराने समय को अपना लो ,
दिल से दिल मिला लो ,रिश्तों को अपना लो ||
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