Thursday, January 29, 2026

KAHAANII RISHTON KII ( KSHANIKAA )

 

                        कहानी  रिश्तों की 

 

सब जगह की रीत अलग , हर समय की रीत अलग ,

समय पुराना था , बड़े - बड़े परिवार थे ,

 मिल- जुल कर रहते थे , आज समय बदला हुआ है ,

परिवार बहुत छोटे हो गए  ,

मिलना - जुलना खत्म हो गया , सिर्फ एकल परिवार  || 

 

ना रिश्ते ना नाते हैं , ना ही पास - पड़ोसी हैं  ,

कौन मिलेगा  ? कौन चलेगा  ? साथ में सब राहों में  ,

कौन समझेगा  ? एक - दूजे की व्यथा  ,

कौन खुशी में जुड़ जाएगा  ?? 

 

तो समझ - बूझ से ले लो काम  , " एकला चलो रे  ",

इस गीत को मत अपनाओ , 

मिल - जुल कर , उस पुराने समय को अपना लो ,

दिल से दिल मिला लो ,रिश्तों को अपना लो   || 

 

No comments:

Post a Comment