बिना पंख
हुई है दीवानी , ये पवना सखि ,
संग ले उड़ी , मेरा अंचरा सखि ||
कोई ना रंग है , इसका सखि ,
देती ये पूरा , अहसास है सखि ,
पकड़ में कभी ये , ना आती सखि ||
बिना पंखों के ही , ये उड़ती सखि ,
सब को ये देती , शीतलता सखि ,
प्यार हम इसको ,करते हैं सखि ||
कीमत ना जाने कोई , इसकी सखि ,
साँसों से देती , ये जीवन सखि ,
साँसें तो सब की , अनमोल हैं सखि ||
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