कर्म - फल
धरती और गगन के बीच में ,प्यार सभी का पले ,
हर जीव - जंतु इन्हीं दोनों के , बीच में ही पले ,
सारी सुविधा सभी को इन्हीं के , बीच में मिले ||
कुछ जीव तो सुंदर कर्म करें , और जीवन चले ,
उनके सुकर्मों से उनका जीवन , सुंदर राह चले ,
जो यह बात ना समझे , उनका जीवन उखड़ चले ||
तो जानो और समझो दोस्तों , क्या चाहते हो तुम ?
कैसा जीवन - यापन ,करना चाहो तुम ?
कर्मों के अनुसार ही तो , सब को फल मिले ,
तो सुंदर कर्म कर लो तुम , कर लो सुंदर कर्म तुम ||
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