जमाना
था एक जमाना चिट्ठी का ,
कागज के पुर्जे पर लिखते थे ,
सुंदर - सुंदर मन के भाव ,
भेजे जाते थे अपनों के पास ,
प्यार भरे दिल की बातें ,
पहुँच जातीं अपनों के पास ||
आज चिट्ठियाँ नहीं कोई ,
मोबाइल हैं , मैसेज हैं ,
ना ही कागज का काम है ,
ना कलम का काम है ,
कागज , कलम और चिट्ठी में ,
भावों का ही वास था ||
एक के भाव पहुँचते , थे दूजे के पास ,
मुस्कान जगती थीं होठों पर ,
प्यार चमकता था आँखों में ,
वो ही चिट्ठियाँ देती थीं जीवन ,
आपस के रिश्तों में मिठास ||
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