Wednesday, June 24, 2026

JAMAANAA ( PREM )

 

                      जमाना 

 

था एक जमाना चिट्ठी का   ,

कागज के पुर्जे पर लिखते थे  , 

सुंदर - सुंदर   मन के  भाव  ,

भेजे जाते थे अपनों के पास  ,

प्यार भरे दिल की  बातें  ,

पहुँच जातीं अपनों के पास   || 

 

आज चिट्ठियाँ नहीं कोई ,

 मोबाइल हैं , मैसेज हैं , 

ना ही कागज का काम है  ,

 ना कलम का काम है  ,

कागज , कलम और चिट्ठी में  ,

 भावों का ही वास था  || 

 

एक के भाव पहुँचते , थे दूजे के पास  ,

मुस्कान जगती थीं होठों पर  ,

प्यार चमकता था आँखों में  ,

वो ही  चिट्ठियाँ देती थीं जीवन  ,

आपस के रिश्तों में मिठास   || 

 

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