जरा - जरा
मुस्कुराहटें मौसम की , बढ़ गईं हैं आज दोस्तों ,
कुछ मनचले से बदरा , उड़ आए हैं आज दोस्तों ,
कुछ बूँदें रिमझिम की , भिगा गईं हैं आज दोस्तों ,
दामिनी की चमक भी तो , बढ़ गई है आज दोस्तों ||
दामिनी की चमक से आँखों की ,चमक भी तो बढ़ गई है दोस्तों ,
चमन में फूलों की कतार ,भी तो महक गई है दोस्तों ,
तितलियों की उड़ान भी तो , रंगीन बन गई है दोस्तों ,
उसी के साथ बच्चों की दौड़ , भी तो बढ़ गई है दोस्तों ||
तो आओ दोस्तों हम अपनी , मुस्कानें बढ़ा लें जरा - जरा ,
अपनी आँखों की चमक को भी , हम बढ़ा लें जरा - जरा ,
अपने बचपन को अपने पास ,फिर से बुला लें जरा - जरा ,
बरखा के पानी में कागज की कश्ती , तैरा लें जरा - जरा ||
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