मद्धम
पवन तू मद्धम - मद्धम चल ,
मेरा हाथ थाम के पवना , मुझको भी ले चल ,
पवन तू मद्धम - मद्धम चल ||
गगना के फैले अँगना में , उड़ान बदरा की होगी ,
तभी तो धरती की तपन मिटेगी ,
इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल ||
बदरा तो जल की खान , देती बरखा का दान ,
तभी तो धरा की प्यास बुझेगी ,
इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल ||
बदरा की सखि है दामिनी , छेड़ेगी जब वो रागिनी ,
तभी तो धरा की तलैया भरेगी ,
इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल ,
मेरा हाथ थाम के पवना , मुझको भी ले चल ||