Monday, March 23, 2026

RAKSHAK ( DESH )

 

                                  रक्षक 

 

हर समय में , हर परिस्थिति में , देश की रक्षा करने ,

कोई ना कोई तो , आगे को बढ़ता है  ,

वही है देश का रक्षक , जो रक्षा सबकी करता है  || 

 

हर रक्षक ना होता सीमा पर ,

हर रक्षक ना दुश्मन से लड़ता ,

अंदर रहकर जो देश को ,ईमानदारी से चलाए  ,

जो देशवासियों को , चैन की नींद दें ,

सारे देशवासियों का जीवन ,सुखमय बना दें   || 

 

देशवासियों के लिए , रोजमर्रा की सहूलियतें ,

अधिकार , जीवनोपयोगी सभी वस्तुएँ  ,

सभी आराम दिलाने में सहायता ,

सभी को बराबरी का और सम्मान पूर्ण जीवन  ,

दिलाने में सहायता करने वाले भी  ,

देश के रक्षक हैं  , देश के रक्षक हैं   || 

 

Sunday, March 22, 2026

MILL PAAEN ( KSHANIKAA )

 

                         मिल पाएँ 

 

जब तुम देते हो आवाज दोस्तों  ,

कदम दौड़ पड़ते हैं , तुम्हारी ओर दोस्तों  ,

ये प्यार है हमारे , दिलों का दोस्तों  ,

तभी तो मिलने को , तड़प उठते हैं दोस्तों  || 

 

मगर राहों में ,रुकावटें आती हैं दोस्तों ,

उन रुकावटों को दूर करके , 

ना तुम  पहुँच पाते हो दोस्तों  ,

ना ही हम पहुँच पाते हैं दोस्तों   || 

 

ईश्वर से यही प्रार्थना है दोस्तों  ,

सभी रुकावटें दूर हों हमारी राहों से ,

और हम आपस में मिल पाएँ दोस्तों  ,

हम आपस में मिल पाएँ दोस्तों   || 

 

Saturday, March 21, 2026

JODD KAR ( KSHANIKAA )

 

                        जोड़ कर 

 

अक्षरों ने जो दी आवाज  , हम भी आ गए  ,

अक्षरों को जोड़ - जोड़ कर , हमने शब्द बनाए  ,

उनका भी ज्ञान बढ़ा  दोस्तों , हमारा भी बढ़ा  दोस्तों  || 

 

शब्दों ने हमको घेरा  , और बोले हमसे  ,

हमको भी जोड़ो , और कुछ  करो  ,

हम भी मुस्काए  , शब्दों से गीत बनाए  दोस्तों   ||  

 

उन गीतों को लय और  , ताल  में बाँधा  ,

उन गीतों को गुनगुनाया  , जीवन मुस्कुराया  ,

तो मुस्कुराते चलो  ,  गुनगुनाते चलो दोस्तों   ||  

 

  

Friday, March 20, 2026

KURUKSHETRA ( AADHYAATMIK )

 

                      कुरुक्षेत्र 

 

हर जीवन एक कुरुक्षेत्र है दोस्तों ,

आमने - सामने खड़े सभी अपने हैं  ,

कोई दुश्मन नहीं है रणभूमि में ,

सभी एक ही रचनाकार की रचना  हैं   || 

 

मगर क्यों सब एक - दूसरे के सामने हैं  ?

क्यों एक - दूसरे के साथ नहीं हैं  ?

जिंदगी में नफरतें क्यों फैली हैं  ?

दिलों से प्यार कहाँ खो गया है   ?? 

 

किसने ये सब  राज  जानने की कोशिश की है  ?

किसने नफरतों को मिटाने की कोशिश की है   ?

किसने प्यार को बाँटने की कोशिश की  ?

कोशिश करके इस राज को जानने में लग जाओ दोस्तों  || 

 

क्या रचनाकार ने ऐसी दुनिया बनाई थी  ?

क्या कुरुक्षेत्र की रणभूमि , रचनाकार ने बनाई थी  ?

यदि उसने बनाई , तो क्यों बनाई  ?

यदि उसने नहीं बनाई , तो फिर किसने बनाई   ?? 

 

Thursday, March 19, 2026

VICHARON SEY HII ( KSHANIKAA )

 

                    विचारों से ही 

 

सुंदर से सुंदरतम तक , फूलों से चमन तक  ,

कदमों को बढ़ाते  जाओ दोस्तों  ,

रंगों से इंद्रधनुष तक , धरा से गगन तक  ,

रुको ना बढ़ते जाओ दोस्तों   || 

 

अधिक से अधिकतम तक , फूलों से महक तक ,

महक से महकते जाओ दोस्तों  ,

तितलियों की फर - फर तक  , बच्चों की दौड़ तक  ,

तुम भी दौड़ लगाते जाओ दोस्तों   || 

 

पहाड़ों की कंदराओं तक , नदिया के उद्गम से सागर तक  ,

तुम भी बहते जाओ दोस्तों ,

पंछियों के घोंसलों तक , पंछियों की ऊँची  उड़ान तक , 

कोशिश करके उड़ते जाओ दोस्तों  ,

पंखों से ना सही , विचारों से ही  दोस्तों   || 

 

Wednesday, March 18, 2026

PYAAR BHAR LO ( KSHANIKAA )

 

                         प्यार भर लो 

 

जिंदगी हरा देती है  मृत्यु को  ,

जिंदगी हमेशा जन्म से जुड़ी रहती है  ,

जन्म और मृत्यु का नाता , आपस में जुड़ा है  ||

 

अच्छे स्वास्थ्य और बीमारी भी , आपस में जुड़े हुए हैं  ,

अच्छा स्वास्थ्य हो तो , बीमारी दूर ही रहती है  ,

और बीमार रहने वाले का  , स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता   || 

 

आँखों में आँसू आएँगे  , 

तो होठों पर मुस्कान नहीं आएगी  ,

और मुस्कान तो तभी आएगी , जब आँखों में ,

उदासी नहीं खुशी की चमक होगी  || 

 

दिल  प्यार की धड़कन होगी  ,

तभी नफरतों के लिए जगह नहीं होगी  ,

तो प्यार की धड़कन को दिल में  ,

भर लो दोस्तों  , प्यार - प्यार - प्यार -प्यार भर लो   || 

 

Tuesday, March 17, 2026

MANJIL PAA JAAO ( KSHANIKAA )

 

                    मंजिल पा जाओ 

 

समय की धारा में , सभी को बह जाना है  ,

अपनी - अपनी मंजिल को  , सभी ने तो पाना है  ,

इस दुनिया की हर राह को , सभी ने पार करना है ,

हँस कर सभी ने तो , ये जीवन बिताना है   || 

 

अपनी राहों को देख लो , समझ लो दोस्तों  ,

तभी तो तुमने अपना , पहला कदम बढ़ाना है  ,

जिंदगी में आए रिश्तों को ,बना तो लोगे तुम ,

मगर ये सोचकर आगे  बढ़ना , किसको तुम्हें निभाना है  ?? 

 

जो तुम्हें प्यार दे , तुम्हारे प्यार के बदले ,

जो तुम्हारे दो कदम के सामने ,बढ़ाए दो कदम ,

थाम लो तुम हाथ प्यार से , उसी का दोस्तों  ,

क्योंकि उसी के साथ मिल कर , ये रिश्ता निभाना है  || 

 

तभी तो समय की धारा के , पार तुम जा पाओगे  ,

जीवन अपना और दूसरे  का भी , सफल बना पाओगे  ,

चलो तो हाथ पकड़ो , मुस्कुराओ और दोस्तों  ,

मंजिल अपनी पा जाओ , मंजिल अपनी पा जाओ   || 

 

Monday, March 16, 2026

DIL CHAAHTAA HAI ( KSHANIKAA )

 

                             दिल चाहता है 

 

कभी - कभी दिल चाहता है दोस्तों  ,

ऊपर नीले गगना में उड़ जाऊँ मैं  ,

ऐ पंछी दो पंख उधार दे दे मुझे  ,

गगना में जाकर बदरा  संग  झूल  जाऊँ मैं  ,

चंदा को भी पास से देख आऊँ मैं  ,

पंछी तेरा बहुत  एहसान होगा मुझ पर   || 

 

कभी - कभी दिल चाहता है दोस्तों  ,

सागर की लहरों  लेट कर तैरती रहूँ  ,

चंचल लहरों संग मैं खेलती रहूँ ,

लहरों का प्यार पाऊँ और अपना प्यार दूँ  ,

सागर बुला मुझे और तैरना सिखा मुझे   || 

 

कभी - कभी दिल चाहता है दोस्तों  ,

चमन में फूलों के बीच ,

फूलों की तरह खिल जाऊँ मैं  ,

रंगीन तितलियों को अपने पास बुलाऊँ मैं  ,

अपनी महक को फैलाकर , चमन को महकाऊँ मैं  ,

ऐ फूलों महकना सिखा दो मुझे  ,

तितलियों से बात करना भी सिखा दो मुझे   || 

 

Sunday, March 15, 2026

KHETAA JAA ( KSHANIKAA )

 

                          खेता जा 

 

दिल की बातों को सुन ले यारा  ,

उन्हीं का तो है तुझको सहारा  ,

दिल बोलता हमेशा सच ही यारा  ,

झूठ का कभी भी ना लेता सहारा   || 

 

सच और प्यार से , भरी ये बातें करता , 

जिंदगी में मुस्कानों के , साथ आगे बढ़ता  ,

तो दिल की ही सुन ले , दिल की सुन ले   || 

 

कौन जाने आगे की , राहें  कैसी होंगी  ?

फूलों से भरी होंगी  , या काँटों भरी मिलेंगी  ? 

तू अपने दिल - ओ - दिमाग को , तैयार अभी कर ले   || 

 

रुकना ना कहीं भी , किसी भी हालात में  ,

जीवन की नैया को कभी भी , डुबोना ना भंवर में  ,

नैया को किनारे के , कम पानी में भी ना फँसाना  ,

गहरे पानी में ही तू , इसे खेता जा यारा   || 

 

दिल भी  खुश होगा  , दिमाग भी शांत होगा  ,

तभी तो होठों पर , मुस्कान तू लाएगा  ,

और अपनी नैया , पार लगाएगा  यारा   || 

 

DILLII SE SAAGAR ( KSHANIKAA )

 

                        दिल्ली  से सागर 

 

दिल्ली है ये दिल्ली , दिल्ली है दिल वालों की ,

हम जैसे मतवालों की , बस गए हम दिल्ली में  ,

सपने पलते गए दिल्ली में  , पूरे हुए हमारे सपने  || 

 

तभी एक आवाज है आई , सागर ने आवाज लगाई  ,

आ जाओ , आ भी जाओ , और हम दौड़ चले  ,

सागर के प्यार में खो गए , डूब गए  ,

सपने बदले , पलते गए , और पूरे हुए   || 

 

तभी दिल्ली ने पुकारा , एक बार तो आजा ,

आए हम और प्यार में  , फंस गए  दिल्ली में ,

सागर ने कहा ,जोर से पुकारा ,ऐ - दोस्त  ,

वापस लौट कर आ  , वहाँ मत रुकना , 

और  हम लौट आए  , हम लौट आए   || 

 

MUKTAK - 7

 

                             मुक्तक - 7 

 

दुनिया में सरहदें हैं  , देशों को बाँटने वाली  ,

मानव को अलग - अलग ,टुकड़ों में करने वाली ,

क्या कर रहा है मानव  ? क्यों तू यूँ बँट रहा है   ?

प्यार को बढ़ा कर  . सरहदों को खत्म कर दे  || 

MUKTAK - 6

 

                          मुक्तक - 6 

 

हवा तो उड़ती जाए , धूप चमकती जाए  ,

धूप  से सारा जग चमके  , जीवन बढ़ता जाए  ,

तभी तो सूरज अपना , जीवन दाता कहलाए   ||  

MUKTAK - 5

 

                                 मुक्तक - 5 

 

सतरंगा इंद्रधनुष ,चमका जब गगन में ,

मेरा दिल झूम उठा  , खड़े - खड़े अंगना में  ,

सारा जग नाच उठा  , प्यार भरे , मनुहार भरे राग में   ||  

MUKTAK - 4

 

                            मुक्तक - 4 

 

बड़े - बड़े शहरों की राहें , भरी हुई हैं भीड़ से ,

गाड़ियों की रफ्तार से , हॉर्न के बढ़ते शोर से ,

जीवन क्या ऐसा बनाया  ? दुनिया के रचनाकार ने  || 

 

 

MUKTAK - 3

 

                                  मुक्तक - 3 

 

नहीं एक महिला दिवस , साल में एक बार ,

हर दिन होता है दोस्तों  ,हर दिन और हर वार ,

महिला ही है इस , जीवन का आधार ,

दाता ने ही बनाया , उसको शक्ति का अवतार   ||  

MUKTAK - 2

 

                           मुक्तक - 2 

 

पंछी तू दे दे पंख मुझे ,

मैं कीमत तुझे चुका पाऊँ , इतनी मेरी औकात कहाँ  ?

ऋणी मैं सदा रहूँगी पंछी  , तेरे ही मैं गुण गाऊँगी ,

नमन तुझे है , नमन तुझे   ||  

MUKTAK - 1

 

                           मुक्तक - 1 

 

जीवन में जो धन है हमारा  , सबसे पहला दोस्ती  ,

साँसें हैं , धड़कन है , होठों पर आई मुस्कान है  ,

प्यार है  ,विश्वास है , समेट लो , कमा लो   ||  

Wednesday, March 4, 2026

HEY RACHNAAKAAR ( AADHYAATMIK )

 

                     हे रचनाकार 

 

दुनिया के दुःख , दर्दों को दूर कर देना  ,

सभी के आँचल में  , सुख भर देना  ,

सुन रचना करने वाले  , संसार चलाने वाले   || 

 

मानव गलतियों का पुतला है  ,

सिर्फ अपना सुख ही चाहता है  ,

तुम उसकी बुद्धि को , कर दो विकसित  ,

सुन रचना करने वाले  , संसार चलाने वाले   || 

 

मानव खुद ना समझेगा , 

उसको समझाना पड़ेगा , हे रचनाकार  ,

जब मानव समझ जाएगा  ,

तभी तो वह इंसान कहलाएगा  ,

और दुनिया को सुंदर बना लेगा   || 

 

Tuesday, March 3, 2026

FAAG ( PREM )

 

                           फाग 

 

राधा करे है , इंतजार कान्हा का ,

होरी का दिन है , कान्हा कहाँ गया री सखि  ?

कोई ना जाने , कान्हा कहाँ है   ?

कोई तो साथ दे , उसे ढूँढने में   || 

 

पल - पल बीता जा रहा  ,

सारे ग्वाले रंग उड़ा रहे  ,

गोपियाँ भी ढूँढ रहीं कान्हा को  ,

राधा पुकार -  पुकार ,बुला रही कान्हा को   || 

 

कहाँ छिपे हो कन्हाई  ?

आ जाओ , आ भी जाओ बरसाने में  ,

होरी का ये दिन कन्हाई  ,

सूखा , बेरंग ना बीत जाए   ||  

 

तभी कान्हा और ,ग्वालों की टोली  ,

दौड़ती हुई आई , अब तो  ,

राधा और गोपियों की टोली भी  ,

उनके सामने थी  , खूब  रंग बरसा  ,

और फाग खेला गया , फाग खेला गया  || 

 

Monday, March 2, 2026

JAHAAN PEY ( CHANDRAMAA )

 

                                     जहाँ पे 

 

जहाँ पे चाँद रहता है  ,वहाँ जाने के लिए ,

सीढ़ी तो लगा लो यारों  ,

आसमान में छेद करने के लिए  ,

ताकत से एक पत्थर तो उछालो यारों   || 

 

जब जाओगे चाँद पर तुम  ,

चंदनिया अपने झोले में भर लो यारों  ,

ला कर उसे अपने साथ में  , 

धरा को उस से चमका लो यारों   || 

 

चाँद है इस धरा का दोस्त  , चमकता आसमान में यारों ,

मुस्कानें उसकी हैं नशीली ,तुम भी थोड़ा नशा कर लो यारों  ||  

 

धरा भी दोस्त है चंदा की , प्यार करती है उसी से यारों  ,

दोनों की दोस्ती को तो , तुम और बढ़ा लो यारों   || 

 

धरा पे हम सभी रहते हैं  , मगर चंदा भी दोस्त है  ,

चंदा की दोस्ती को तुम  , ऊँचाई पे चढ़ा लो यारों   ||  

 

Sunday, March 1, 2026

MADDHAM ( JALAD AA )

 

                         मद्धम  

 

पवन तू मद्धम - मद्धम चल  ,

मेरा हाथ थाम के पवना , मुझको भी ले चल  ,

पवन तू मद्धम - मद्धम  चल   || 

 

गगना के फैले अँगना में , उड़ान बदरा की होगी  ,

तभी तो धरती की तपन मिटेगी  ,

इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल   || 

 

बदरा तो जल की खान , देती बरखा का दान  ,

तभी तो धरा की प्यास बुझेगी  ,

इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल   || 

 

 बदरा की सखि है दामिनी  , छेड़ेगी जब वो रागिनी  ,

तभी तो धरा की तलैया भरेगी  ,

इसीलिए तो  , पवन तू मद्धम - मद्धम चल  ,

मेरा हाथ थाम के पवना  , मुझको भी ले चल   ||