Sunday, March 1, 2026

MADDHAM ( JALAD AA )

 

                         मद्धम  

 

पवन तू मद्धम - मद्धम चल  ,

मेरा हाथ थाम के पवना , मुझको भी ले चल  ,

पवन तू मद्धम - मद्धम  चल   || 

 

गगना के फैले अँगना में , उड़ान बदरा की होगी  ,

तभी तो धरती की तपन मिटेगी  ,

इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल   || 

 

बदरा तो जल की खान , देती बरखा का दान  ,

तभी तो धरा की प्यास बुझेगी  ,

इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल   || 

 

 बदरा की सखि है दामिनी  , छेड़ेगी जब वो रागिनी  ,

तभी तो धरा की तलैया भरेगी  ,

इसीलिए तो  , पवन तू मद्धम - मद्धम चल  ,

मेरा हाथ थाम के पवना  , मुझको भी ले चल   ||