Friday, May 8, 2026

MOGRAA ( JIVAN )

 

                                मोगरा 

 

मोगरा फूला है सखि री , चमन में  ,

खुश्बुएँ फैली हैं सखि री , सहन में  ,

आ जाओ सखि तुम , मेरे आँगन में  ,

गुनगुनाएँगे वो गीत जो  ,महकते हैं जीवन में   || 

 

गीतों के वो शब्द आज भी , बसे हैं जहन में  ,

उन्हीं की याद भी आती है , रोज सपन में  ,

उन्हीं के अक्षर तो बसे हैं , मेरी कलम में   || 

 

मोगरा तो हर बार फूलता है , चमन में ,

उसी  खुश्बु तो बस गई है  ,मेरे तन - मन में  ,

उसी की खुश्बु से महका लें , हम अपनी साँसों को ,

तभी तो महकेंगी खुश्बु  , हमारे दामन में   || 

 

साँसें महकेंगी , तो चैन आएगा  ,

कदमों  का निशां , गीली रेत पर रह जाएगा  ,

जिंदगी का समय भी , मुस्का के गुजर जाएगा   ||  

 

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