मोगरा
मोगरा फूला है सखि री , चमन में ,
खुश्बुएँ फैली हैं सखि री , सहन में ,
आ जाओ सखि तुम , मेरे आँगन में ,
गुनगुनाएँगे वो गीत जो ,महकते हैं जीवन में ||
गीतों के वो शब्द आज भी , बसे हैं जहन में ,
उन्हीं की याद भी आती है , रोज सपन में ,
उन्हीं के अक्षर तो बसे हैं , मेरी कलम में ||
मोगरा तो हर बार फूलता है , चमन में ,
उसी खुश्बु तो बस गई है ,मेरे तन - मन में ,
उसी की खुश्बु से महका लें , हम अपनी साँसों को ,
तभी तो महकेंगी खुश्बु , हमारे दामन में ||
साँसें महकेंगी , तो चैन आएगा ,
कदमों का निशां , गीली रेत पर रह जाएगा ,
जिंदगी का समय भी , मुस्का के गुजर जाएगा ||
No comments:
Post a Comment