भोर
भोर की लाली गगन पे छाई ,
सूरज ने अपनी खिड़की खोली ,
सारा जहां चमक उठा , सूरज की किरणों से ,
पंछी भी सारे गुनगुना उठे ||
पेड़ - पौधों ने ली अंगड़ाई ,
जीव - जंतु सभी अपने काम में लग गए ,
मानव ने भी अपनी दिनचर्या शुरु की ,
मानो चल पड़ा जीवन , कदम -दर -कदम ||
जीवन देने वाला सूरज , कड़क हो उठा ,
बढ़ गई गर्मी धरा पर ,
मेहनत करने वालों का पसीना बहा ,
और मेहनत से , काम पूरे हुए सभी के ||
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