Saturday, May 2, 2026

BHOR ( KSHANIKAA )

 

                              भोर 

 

भोर की लाली गगन पे छाई  ,

सूरज ने अपनी खिड़की खोली  ,

सारा जहां चमक उठा , सूरज की किरणों से  ,

पंछी भी सारे गुनगुना उठे   || 

 

पेड़ - पौधों ने ली अंगड़ाई  ,

जीव - जंतु सभी अपने काम में लग गए  ,

मानव ने भी अपनी दिनचर्या शुरु की  ,

मानो चल पड़ा जीवन  , कदम -दर -कदम  || 

 

जीवन देने वाला सूरज , कड़क हो उठा  ,

बढ़ गई गर्मी धरा पर  ,

मेहनत करने वालों का पसीना बहा  ,

और मेहनत से  , काम पूरे हुए सभी के   || 

 

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