Tuesday, May 5, 2026

PRAKAASH - PUNJ ( CHANDRAMAA )

 

                          प्रकाश - पुंज 

 

साँझ ने जब रात ,  हाथ मिलाया , अँधियारा छाया  ,

उजियारे की कोई किरन , नहीं थी राहों में  ,

दो - चार कदम चले ही थे हम ,कि प्रकाश -पुंज  चमक उठा  ,

गगना पे चंद्रमा  चमक उठा , धरा तक चाँदनी पहुँच गई  ,

धरा तो पूरी की पूरी  , चंदनिया से भीग गई   || 

 

हम भी चंदनिया में नहा गए , आँखें भी चमक उठीं  ,

दिल भी मुस्कुराया दोस्तों , धड़कनें भी बढ़ गईं  ,

आस - पास कलियाँ खिल गईं  , बगिया भी महक गई  ,

संसार ही मानो महक से भर गया  ,

चमन भी तितलियों से भर गया  ,

गगना का चाँद भी , मुस्कुरा उठा दोस्तों   || 

 

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