Saturday, May 16, 2026

NIIND AUR SAPANEY ( KSHANIKAA )

 

                         नींद और सपने 

 

रात का समां  , चमके चंद्रमा गगना में  ,

आई है निंदिया , ले के सपने आँखों में  ,

ना जाने कहाँ - कहाँ की ,सैर कराते ये सपने  ? 

ना  जाने किस - किस से , मिला देते ये सपने  ?? 

 

जिस किसी से हम , ना मिल पाते जागते हुए  ,

उन्हीं को सपने हमारे , सामने ले आते सोते हुए , 

हम को दुनिया की सैर , करा देते सोते हुए   || 

 

सपनों भरी मीठी नींद , होठों पर मुस्कान ले आती  ,

इन्हीं सपनों की याद , दिन में भी मुस्कान लाती  ,

ये सपने ही तो जरूरी हैं , हमारे जीवन में दोस्तों  ,

अपने सपने , अपनी  नींद  , ही तो जरूरी हैं दोस्तों  || 

 

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