Thursday, February 5, 2026

BECHAIN ( AADHYAATMIK )

 

                              बेचैन 

 

ऊपर आसमान में रहने वाले से ,

दुनिया बनाने वाले से , पूछा एक दिन  ,

जवाब मिला हमें ---- क्यों तू है सुनती ,सारी बातें जहां की ? 

दो कान दिए हैं मैंने , एक से सुन , दूसरे से  निकाल  ,

सारे जहां की बातें , दिल में तू मत रख  ||  

 

जो तुझे नहीं समझते अपना , तू भी ना समझ उन्हें अपना  ,

जो प्यार ना करें तुझे  ,तू भी ना डूब प्यार में उनके लिए  ,

छोड़ उनका हाथ और दूर तू निकल   || 

 

संसार में रंगों का खजाना है , तू भी कुछ चुन  ,

इंद्रधनुष बना कर , आँखों में  तू बसा ले  ,

अपना जहां सजा ले  ,अपना जहां सजा ले   || 

 

और जीवन अपना , मुस्कानों में डुबा ले  ,

राहें सुंदर कर ले  , उन पर कदम बढ़ा ले  ,

अपनी मंजिल पा ले , जीवन नया बना ले   || 

  

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