बेचैन
ऊपर आसमान में रहने वाले से ,
दुनिया बनाने वाले से , पूछा एक दिन ,
जवाब मिला हमें ---- क्यों तू है सुनती ,सारी बातें जहां की ?
दो कान दिए हैं मैंने , एक से सुन , दूसरे से निकाल ,
सारे जहां की बातें , दिल में तू मत रख ||
जो तुझे नहीं समझते अपना , तू भी ना समझ उन्हें अपना ,
जो प्यार ना करें तुझे ,तू भी ना डूब प्यार में उनके लिए ,
छोड़ उनका हाथ और दूर तू निकल ||
संसार में रंगों का खजाना है , तू भी कुछ चुन ,
इंद्रधनुष बना कर , आँखों में तू बसा ले ,
अपना जहां सजा ले ,अपना जहां सजा ले ||
और जीवन अपना , मुस्कानों में डुबा ले ,
राहें सुंदर कर ले , उन पर कदम बढ़ा ले ,
अपनी मंजिल पा ले , जीवन नया बना ले ||
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