महक बगिया की
ये धरा एक बगिया है दोस्तों ,फूल खिले हैं बहुत से ,
कुछ महक फैलाते हैं दोस्तों ,कुछ रंग बिखराते हैं ,
तितलियाँ फर - फर उड़ती हैं , बच्चे खूब दौड़ते हैं ,
पकड़ने को तितलियों के , पीछे - पीछे दौड़ते हैं ||
अनेक जीव - जंतु बसते हैं यहाँ , धरती के आँचल में ,
मानव इस बगिया का , मालिक बनना चाहता है ,
इस चाहत को पाने को , वह बगिया उजाड़ता जाता है ,
रचनाकार है बगिया का मालिक ,सब कुछ सुंदर बनाता है ||
तुम भी ये बगिया महका लो दोस्तों , बना लो उसको सुंदर ,
बगिया में बिखरेंगे रंग , वो तुम को भी रंग जाएँगे दोस्तों ,
बगिया जो महकेगी दोस्तों , तुम भी तो महकते जाओगे ,
रचनाकार भी देख के बगिया ,आँचल तुम्हारा भर देगा ,
तो अपना आँचल भर लो , बगिया को महका लो ,
रचनाकार के प्यार को समेट लो दोस्तों ||
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