Saturday, February 21, 2026

MAHAK BAGIYAA KII ( KSHANIKAA )

 

                         महक बगिया की 

 

ये धरा एक बगिया है दोस्तों  ,फूल खिले हैं बहुत से ,

कुछ महक फैलाते  हैं दोस्तों  ,कुछ रंग बिखराते हैं  ,

तितलियाँ फर - फर उड़ती हैं  , बच्चे खूब दौड़ते हैं  ,

पकड़ने को तितलियों के  , पीछे - पीछे दौड़ते हैं   || 

 

अनेक जीव - जंतु बसते हैं यहाँ  , धरती के आँचल  में ,

मानव इस बगिया का  , मालिक बनना चाहता है  ,

इस चाहत को पाने को  , वह बगिया उजाड़ता  जाता है ,

रचनाकार है बगिया का मालिक  ,सब कुछ सुंदर बनाता है   || 

 

तुम भी ये बगिया महका लो दोस्तों  , बना लो उसको सुंदर ,

बगिया में बिखरेंगे रंग , वो तुम को भी रंग जाएँगे दोस्तों  ,

बगिया जो महकेगी दोस्तों  , तुम भी तो महकते जाओगे  ,

रचनाकार भी देख के बगिया  ,आँचल तुम्हारा  भर देगा ,  

तो अपना आँचल भर लो  ,  बगिया को महका लो  ,

रचनाकार के प्यार को  समेट लो दोस्तों   ||   

 

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