Saturday, February 14, 2026

HALAAHAL ( AADHYAATMIK )

 

                             हलाहल 

 

शिव ने जब पिया हलाहल , धरा को बचाया उससे ,

अपने कंठ में ही रोक लिया ,धरा को बचाया उससे , 

धरावासियों  ने उनको पुकारा , नीलकंठ के नाम से   || 

 

बचा लिया शिवशंकर ने , धरा को एक विनाश से ,

मगर जब भगीरथ गए , और प्रार्थना की गंगा से  ,

जब गंगा राजी हुईं तब ,शिव ने ही अपनी जटाओं में  ,

समाया गंगा की लहरों को , और बचाया गंगा  बहाव से  || 

 

ऐसे ही शिवशंकर को ,हमारा प्रणाम है ,

उन्हीं को हम शीश नवाते हैं , नमन करते हैं  ,

जय -जय , जय - जय , हे शिवशंकर  ,

दो आशीष  हमें , दो आशीष हमें   || 

 

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