एक - दूजे से
चलती हुई पवन है , शांत और शीतल ,
यही पवन तो , उड़ा ले जाएगी हमें ,
ले चल पवन हमें ऊपर , गगन के प्रांगण में ,
जहाँ चाँद रहता है , हम चाहते हैं पवन ,
हम वहाँ जाएँ , चाँद से दो बातें कर आएँ ||
मेरी पवन , प्यारी पवन ,तेरा बहुत उपकार होगा ,
जो हमें उड़ाएगी ,बहुत दूर ले जाएगी ,
आजा - आजा ले चल ,हमें अपने साथ ,
अपने पंखों के सहारे , ले चल हमें उड़ाकर ||
चाँद भी तो अकेला है , गगना के प्रांगण में ,
उसे भी दोस्त मिल जाएँगे , हमारे वहाँ जाने से ,
तुम्हारा साथ भी होगा पवन , सभी दोस्त मिल कर ,
मुस्कानें बाँटेंगे , एक - दूजे से ,एक - दूजे से ||
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