Saturday, February 28, 2026

LAHAREN ( RATNAAKAR )

 

                                रत्नाकर 

 

सागर ने दी आवाज  , लो सागर मैं आ गई  ,

लहरें अपनी चंचलता लेकर , सागर तट पार कर गईं ,

सागर उन्हें रोकता रहा , मगर कौन रोक पाया है   ?

उन चंचला लहरों को , जो दौड़ती , खेलती रहीं  || 

 

लहरों ने हाथ थामा , एक - दूजे की ओर दौड़ पड़ीं  ,

सागर की आवाज और उसकी , पाबंदी भी उन्हें रोक ना पाई ,

उन चंचला लहरों को , कौन बाँध पाया हैं  ?

वो तो आजाद हैं  , वो तो आजाद हैं   || 

 

शक्तिशाली सागर अपनी ही , लहरों से मानो हार गया  ,

सागर तो तट बंध को , तोड़ नहीं सकता  ,

मगर लहरें तो उछलती - कूदती , दौड़ती जाती हैं  ,

तट बंध को पार  कर जाती हैं  , और खिलखिलाती हैं   || 

 

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