खिला मन
शब्द मिलें शब्दों से , तो गीत बन जाता है ,
सुर मिलें सुरों से , तो संगीत बन जाता है ,
गीत और संगीत के मिलने से , राग बन जाता है ,
जो दिल में बस जाता है , मुस्कान बन जाता है ||
मुस्कान उतरे होठों पर , तो चेहरा भी सज जाता है ,
चेहरे के सजते ही , आँखों में चमक आती है ,
उसी चमक से तो , ये दुनिया चमक जाती है ||
दुनिया के चमकने से ही ,मन भी खिल उठता है ,
तभी तो चमन के फूल भी खिल जाते हैं ,
फूलों के खिलने से , पूरा चमन महक उठता है ,
हर चमन की खुश्बुओं से , ये जग महक उठता है ||
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