Wednesday, February 4, 2026

NASHEELII BARAKHAA ( JALAD AA )

 

                             नशीली बरखा 

 

जिंदगी आज भीग गई बरखा में ,

ये बरखा कैसे छिपी थी , बरखा के आँचल में  ?

बरस गई रिमझिम बन के , आज मेरे आँगन  में  ,

उसी ने भिगो दिया मेरा आँचल   || 

 

इसी रिमझिम सी बरखा ने , हमें नशे में डूबा दिया ,

चलो इसी रिमझिम को , भर लें  बोतल में  ,

जब ये बरखा बंद हो जाएगी  ,

तो उसी पानी से फिर , नशे में डूब जाएँगे   || 

 

दोस्तों क्या ऐसा नशा भी होता है  ,

जिसमें बरखा की रिमझिम डुबाती है  ,

ख्वाबों की सुंदर नगरी में वो , 

रिमझिम ही लेकर जाती है  ||  

 

ये नशा तो ना किसी शराब  है  ,

और ना ही किसी अन्य चीज में है  ,

ये तो सिर्फ बरखा की रिमझिम में है  ,

जो बरस रही है , बदरा के आँचल से  || 

 

No comments:

Post a Comment