कर्म
घर के पते कितने भी , बदल लो यारों ?
छिपने की कोशिश , कितनी भी कर लो यारों ?
कर्मों को तुम्हारा , हर ठिकाना मिल ही जाएगा ||
आपके कर्मों की गंध , तेजी से फैल जाती है ,
उसी गंध का छोर पकड़ कर , कर्म पहुँच जाते हैं ,
तो कर्मों को सुंदर राह पर ही ,ले जाओ यारों ||
परिणाम भी कर्मों के तरीके , पर ही मिलेंगे ,
उसी के अनुसार ही , फूल भी खिलेंगे ,
और उन्हीं फूलों की महक से ,राहें महकेंगी ||
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