Tuesday, February 3, 2026

KARM ( KSHANIKAA )

 

                                       कर्म 

 

घर के पते कितने भी , बदल लो यारों   ?

 छिपने की कोशिश , कितनी भी कर लो यारों  ?

कर्मों को तुम्हारा , हर ठिकाना मिल ही जाएगा  || 

 

आपके कर्मों की गंध , तेजी से फैल जाती है  ,

उसी गंध का छोर पकड़ कर  , कर्म पहुँच जाते हैं  ,

तो कर्मों को सुंदर राह पर ही ,ले जाओ यारों  || 

 

परिणाम भी कर्मों के तरीके  , पर ही मिलेंगे  ,

उसी के अनुसार ही , फूल भी खिलेंगे  ,

और उन्हीं फूलों की महक से  ,राहें महकेंगी   || 

 

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