Saturday, October 31, 2026

SHUBH RAATRII ( CHANDRAMAA )


                       शुभ रात्रि  


आवाज आई गगना से , चाँद और सितारों की  ,

जरा निगाहें उठा कर , तो देख सखि ,

जब देखा मैंने , तो उन्होंने मुस्का के कहा  , 

देख सखि हम गगना से , बोल रहे हैं सखि   || 


मैं भी मुस्का के बोली  , क्या हाल - चाल हैं दोस्तों  ?

वो भी पलट के बोले , हाल - चाल तो ठीक हैं  ,

पर ये दूरी तुमसे , बहुत बुरी लगती है  || 


रात में ही दिखाई देते हो  , तुम  सब  दोस्तों  ,

बात इतनी दूर से , अच्छी तरह नहीं हो पाती  ,

पर जितनी भी होती है  , उसी में सब्र करना है दोस्तों   || 


चलो दोस्तों अब सो जाती हूँ  ,

तुम्हारा तो  जागने , और चमकने का समय है  ,

पर मेरी तो रात है  , सोने का समय  ,

तो शुभ रात्रि दोस्तों   || 


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