उलझनों का जाला
मकड़ी ने बुना जब जाला ,
मच्छर , मक्खी , कीड़ों के लिए ,
मच्छर आदि मकड़ी के शिकार बन गए ,
और मकड़ी जाले बुनती गई ||
मकड़ी खुद जाले में नहीं फँसती ,
दूसरों को ही , अपने जाले में फाँसती ,
समझदार मकड़ी , दूर ही जाले से रहती ,
दूर रहकर ही , शिकार करती रहती ||
मानव समझ , सबसे ज्यादा रखता ,
दूजों के लिए ही , ताना - बाना बनाता रहता ,
मगर मानव खुद ही , उसमें उलझता जाता ,
क्यों नहीं मानव , उन उलझनों से बचता ?
कौन देगा --- इस प्रश्न का उत्तर ?
क्या कहा आपने --- मानव देगा ?
वो तो खुद ही उलझा है --- उत्तर क्या देगा ??
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