Saturday, October 17, 2026

ULJHANON KAA JALAA ( KSHNIKAA )


                  उलझनों का जाला  


मकड़ी ने बुना जब जाला ,

मच्छर , मक्खी , कीड़ों के लिए  ,

मच्छर आदि मकड़ी के शिकार बन गए ,

और मकड़ी जाले बुनती गई   || 


मकड़ी खुद जाले में नहीं फँसती ,

दूसरों को ही , अपने जाले में फाँसती  ,

समझदार मकड़ी  , दूर ही जाले से रहती  ,

दूर रहकर ही , शिकार करती रहती   || 


मानव समझ , सबसे ज्यादा रखता  ,

दूजों के लिए ही , ताना - बाना बनाता रहता  ,

मगर मानव खुद ही , उसमें उलझता जाता  ,

क्यों नहीं मानव , उन उलझनों से बचता  ? 

कौन देगा  ---  इस प्रश्न का उत्तर   ?

क्या कहा आपने   --- मानव देगा   ?

वो तो खुद ही उलझा है  ---  उत्तर क्या देगा   ??  


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