Sunday, October 4, 2026

SUBAH AAII ( CHANDRAMAA )


                           सुबह आई 


चाँद खिड़की से जब झाँका , हम दोनों मुस्काए  ,

तभी निंदिया ने दस्तक दी , और हम दोनों सो गए  ,

नींद में सपनों ने डेरा डाल लिया  ,

अलग - अलग दुनिया में हम दोनों खो गए   || 


सपनों में हम बहुत जगह घूमें  ,

बहुत से लोगों से मुलाकात हुई  ,

समय बीतता रहा ,तो रात भी बीतती गई  ,

चाँद का सफर भी , धीरे - धीरे खत्म हुआ  || 


धीरे से सुबह का तारा चमका  ,

भोर की लालिमा , गगन पे छाने लगी  ,

धीरे - धीरे सूरज , चमका गगन में  ,

सूरज ने दुनिया को , अपनी किरणें दीं  ,

और सुबह आ गई  , इस दुनिया में   || 


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