सुबह आई
चाँद खिड़की से जब झाँका , हम दोनों मुस्काए ,
तभी निंदिया ने दस्तक दी , और हम दोनों सो गए ,
नींद में सपनों ने डेरा डाल लिया ,
अलग - अलग दुनिया में हम दोनों खो गए ||
सपनों में हम बहुत जगह घूमें ,
बहुत से लोगों से मुलाकात हुई ,
समय बीतता रहा ,तो रात भी बीतती गई ,
चाँद का सफर भी , धीरे - धीरे खत्म हुआ ||
धीरे से सुबह का तारा चमका ,
भोर की लालिमा , गगन पे छाने लगी ,
धीरे - धीरे सूरज , चमका गगन में ,
सूरज ने दुनिया को , अपनी किरणें दीं ,
और सुबह आ गई , इस दुनिया में ||
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