तड़प - तड़प के इस दिल से , आह जो निकली ,
क्यों तूने सजा दी प्यार की , हमने क्या गुनाह किया ?
हम लुट गए तेरी मोहब्बत में , हम लुट गए ||
तड़पने वाले जहां वालों से तू , कोई फरियाद ना कर ,
कोई भी ना तड़प को तेरी , दूर करेगा आकर ,
जिंदगी में पैदा हुई तड़प तो , तेरा सुकून ले जाएगी ,
तो संभल जा तू तड़पने वाले , और सब्र कर , सब्र कर ||
सुकून के साथ , तड़पन भी जरूरी है ,
उसी तड़पन को प्यार से , अपना लो दोस्तों ,
तड़पन के बाद ही तो , सुकून का मजा आएगा ,
तो तड़पन को भी अपने , दिल में बसा लो दोस्तों ||
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