Thursday, September 17, 2026

TEEN SAHELIYAN ( PREM )


                      तीन सहेलियाँ 


तीन सहेलियाँ हैं दोस्तों  , सोच , मुस्कान और चमक ,

तीनों की दोस्ती गहरी है  दोस्तों ,

सब उभरीं दिल - दिमाग में  || 


सोच मीठी थी  , तो होठों पे मुस्कान खिली  ,

आँखों में चमक जगी   || 


सोच कड़वी थी  , तो होठों की मुस्कान मिटी  ,

आँखों की चमक खोई   || 


सोच प्यार की थी , तो होठ गुनगुनाए ,

आँखों ने नृत्य किया  || 


सोच तीखी सी थी  , होठों ने आह भरी  ,

आँखों में नमी छाई   || 


सोच हास्य की थी  , होंठ खिलखिलाए  ,

आँखों में मस्ती छाई   || 


तीनों   सहेलियाँ  हर रंग में  ,

सुंदर लगीं दोस्तों   ,  बहुत सुंदर  लगीं   || 


Wednesday, September 16, 2026

MELAA SHABDON KAA ( JIVAN )


                            मेला शब्दों का 


एक हाथ लंबी कलम से  , उकेरा जाता ,

मीलों तक लंबा समूह , शब्दों का  ,

एक मुट्ठी जितने बड़े , दिल से  ,

निकलता जाता मीलों लंबा समूह , शब्दों  का  ||  


उनमें कुछ शब्द हँसते , मुस्कुराते  ,

और कुछ शब्द गाते  ,  गुनगुनाते  ,

इन्हीं मुस्कुराहटों और , गुनगुनाहटों  के साथ  ,

एक बड़ा मेला लगा उन , शब्दों का   || 


आँखों की चमक जैसे  , चमकते शब्द   ,

आँखों के अश्रुओं जैसे  , बिखरते शब्द  ,

उन आँखों की चमक और  , अश्रुओं से  ,

एक बड़ा मेला लगा उन  , शब्दों  का  ,

आइए दोस्तों  , इस मेले में शब्दों के   || 


Tuesday, September 15, 2026

SAPNEY ( JIVAN )


                          सपने 


सपने हैं सपने , बिल्कुल ही अपने  ,
नींद में ही होठों पर , लाते मुस्कानें  ,
नहीं कोई मेहनत , करवाते सपने  ,
दिन में भी , सोच - सोच लाते मुस्कानें   || 


गुपचुप - गुपचुप , आते हैं सपने  ,
बिना कीमत हम , पाते हैं सपने  ,
बिना किराया दिए , जाते हैं घूमने  ,
नई - नई जगहों को देखने ,
नए - नए लोगों से मिलने   || 


बिना संदेसे आते ,  हमारे सपने  ,
हमारे दोस्तों को , साथ में लाते सपने  ,
हँसी खूब बरसाते हैं सपने  ,
झर - झर - झर , झरवाते  झरने  ,
देखा कितने , मीठे - मीठे हैं सपने  ?
पलकों में बस जाते हैं सपने   || 

Monday, September 14, 2026

ANKHIYAN ( PREM )


                                अँखियाँ 


अँखियों री अँखियों , मेरी प्यारी सखियों  ,

सारी दुनिया तुम ही दिखातीं  ,

सभी रंगों का अहसास दिलातीं  || 


नींद आने पर , रात्रि के पहर में ,

तुम तो बंद हो जातीं   ,

मगर रात भर तुम मुझको  ,

सुंदर स्वप्न दिखाती जातीं  || 


स्वप्न दिखाते - दिखाते तुम  ,

सारी दुनिया की सैर करातीं  ,

जो जगहें हमने ना देखी हों  ,

उनकी भी तुम तो सैर करातीं   || 


प्यारी सखियों , मेरी अँखियों  , 

जीवन के आकाश में तुम , 

इंद्रधनुष भी सजा जातीं  ,

वह इंद्रधनुष , जिससे तुम , 

हमें क्या ,आकाश को भी रंग जातीं    ?? 


Sunday, September 13, 2026

VIDHAAN VIDHI KAA ( AADHYAATMIK )


                       विधान विधि का 


विधि का विधान ही तो  , संसार को चलाता है  ,

हर किसी के लिए , नियम बने होते हैं  ,

कोई भी तो  , इस नियम से परे नहीं होता है   || 


स्वयं परमात्मा भी तो , इसी से बँधे होते हैं  ,

जो कुछ विधान में लिखा होता है , 

वही उन्हें भी अपनाना होता है   || 


गजानन का जन्म ही , विधि विधान से ही हुआ है ,

कान्हा भी इसी कारण , राधा से दूर रहे ,

राम ने भी इसी कारण , सीता को त्याग कर वन भेजा  ,

मानव योनि में रहकर , मानव जीवन बिताया   || 


विष्णु , शिव सभी बँधे ,विधि की डोर में ,

कोई भी अपने मन की , नहीं  कर सका था  ,

तो हम क्या कर सकते हैं दोस्तों   ?? 


Saturday, September 12, 2026

BHAAV ( PREM )


                             भाव 


राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने ,

बहुत सुंदर भावों को , व्यक्त किया अपनी लेखनी से  ,

" जो भरा नहीं है भावों से , बहती जिसमें रसधार नहीं ,

वह ह्रदय नहीं है पत्थर है  , जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं "|| 


दोस्तों ह्रदय को ह्रदय , बनाए रखना है तो  ,

ह्रदय में भावों का , समावेश होना जरूरी है  || 


ईश्वर के लिए   ------ ,

एक भक्तिभाव जरूरी है  ,

ईश्वर के लिखे विधान के लिए  ,

ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास ,

जो कुछ ईश्वर ने हमें दिया , उसके लिए  ,

समर्पण और धन्यवाद जरूरी है   || 


अपने देश के लिए   -------  ,

प्यार के सम्मान के भाव जरूरी हैं  ,

देश की धरा , प्रकृति ,पहाड़ ,नदियाँ ,समंदर ,

हर  स्थान , हर मानव से प्यार जरूरी है   || 


अपनों के लिए   -------- ,

अपनों के प्यार के लिए  ,

अपनों के दिए सम्मान और भरोसे के लिए  ,

उनके प्रति आदर ,प्यार और विश्वास जरूरी है  || 


ये भाव जब दिल को भर देंगे ,

तो दिल में सभी के लिए ,

प्यार ही उत्पन्न होता है  ,

विश्व में सभी के लिए  ,

प्यार और सम्मान का भाव जरूरी है  ,

समझो दोस्तों  ---  विश्व बंधुत्व जरूरी है   || 



Friday, September 11, 2026

DHEERE - DHEERE ( PREM )

                             धीरे - धीरे 


बदलोगे जो खुद को , तो रंग जमा लोगे  ,
जहां की मुसीबतों से , पीछा छुड़ा लोगे  ,
कोई कुछ भी बोले बंद तुम , कान कर लोगे ,
अपने दिल की बातें दिल में ,ही छुपा लोगे    || 


दुनिया वालों का तो काम है , कुछ भी कहना ,
तब अपने कानों में तुम , थोड़ी सी रुई रखना  ,
फिर मजे से तुम दोस्तों , मुस्कुराते रहना ,
तभी तो तुम मजे से , जीवन बिता लोगे   || 


दोस्तों ये जिंदगी तुम्हारी है  , मत भूलो यह बात  ,
दिन के बाद आती है  , हमेशा रात  ,
चैन की नींद सो जाओगे  , बीतेगी  रात  ,
सुबह को उठो तो खूब  ,  खिलखिला लोगे   || 


बगीचे की घास  पर चलो  , नंगे पैर धीरे - धीरे  ,
मानो चल रहे हो तुम ,नदिया के तीरे ,
समेटो  फूलों की महक अपनी  , साँसों में धीरे - धीरे  ,
फूलों पे जमी ओस की बूँदें , होठों पे तुम समेट लोगे   ||