Saturday, March 3, 2012

NANHIN KALII ( JIVAN )

                नन्हीं कली 
 

 नन्हीं कली है एक न्यारी सी , नन्हीं परी है एक प्यारी सी ,
 भरा खुशियों से जिसने दामन को,जीवन खुशियों से जगमगाया है ।
 
 रंग सावन का जैसे निखरा है , प्यार भी तो चहुँ ओर बिखरा है ,
  रंग तो चंदनिया का निखरा है , प्यार आँखों में झिलमिलाया है ।
 
 नन्हीं सी मुस्कान उभर आयी है , संग - संग खुशबुएँ भी लाई है ,
  मानो कलियों के रंगीन झुरमुट में,खुशबुओं संग पवन सरसराई है  ।
 
  कलियाँ खिलती रहें यूँ जीवन में , खुशबुएँ उड़ती रहें यूँ आँगन में ,
  इन्हीं खुशबुओं ने तो जीवन को , बगिया के जैसा महकाया है ।
 
  रंग - बिरंगी कलियों पे , उड़ रहीं हैं देखो रंगीन तितलियाँ ,
  इन्हीं कलियों , तितलियों ने ही तो , सभी के मन को लुभाया है ।
 
  ना तोड़ो कलियाँ इन्हें खिलने दो,ना पकड़ो तितलियाँ इन्हें उड़ने दो ,
  इन्हीं  के खिलने व उड़ने ने ही तो , जिन्दगी को सुन्दर बनाया है ।  
 
 

No comments:

Post a Comment