Thursday, December 31, 2020

DO BOONDEN ( GEET )

     दो  बूँदें 

 

बूँद - बूँद आँसुओं की ,

 एक बूँद ग़म की ,दूसरी ख़ुशी की | 


बूँद - बूँद झरी आँखों से ,

मगर होठों पे मुस्कुराहटें ,

एक मुस्कान ग़म की ,दूसरी ख़ुशी की | 


हाथ दो मिले काँपते हुए ,

कँपन था दोनों हाथों में ,

एक कँपन ग़म का ,दूसरा ख़ुशी का | 


एक बूँद ने कहा दूसरी से ,

मैं झरती हूँ ,तो ग़म को बहा ले जाती ,

दूसरी बोली ,मैं झरती हूँ ,तो खुशियाँ बढाती | 


आँखें चमक उठीं ,बूँदों से बोलीं ,

मैं तो दोनों ही परिस्थितियों में नम हो जाती ,

एक नमी ग़म की ,दूसरी ख़ुशी की | 


साथ बूँदों का रहे हमेशा ,

दोनों साथ रहेंगी हमेशा ,

भाव हो चाहे अलग - अलग ,

एक भाव ग़म का , दूसरा भाव ख़ुशी का | 


Wednesday, December 30, 2020

BYE - BYE ,TWENTY - TWENTY ( GEET )

 

 

बाय - बाय ,  20 -20 


टवेंटी - टवेंटी तू जा - जा ,

टवेंटी वन को ले आ ,

जा वे जा तैनू रब दा वास्ता | 

 

जब से तू आया है ,सब को ही सताया है ,

आँसुओं से ही तूने , सब को रुलाया है ,

जा वे जा तैनू रब दा वास्ता | 

 

कोई बचा नहीं तुझसे ,दुनिया काँपी है तुझसे ,

सड़कें वीरान हुईं ,मानो शमशान हुईं ,

जा वे जा तैनू रब दा वास्ता | 

 

स्कूल - कॉलेज का तूने ,रस्ता भुलाया है ,

मंदिर - मस्जिद को तूने ,ताला लगाया है ,

जा वे जा तैनू रब दा वास्ता | 

 

 

Thursday, December 24, 2020

JALATE DEEPAK ( SHORT POEM )

 

  जलते  दीपक 


अँधेरी रातों में दीपक जलाए रखिए ,

रात को राहों में दीपक जलाए रखिए ,

कोई भी ठोकर लगे ना किसी को ,

रास्ता ठीक से दिखाई दे सभी को |


दीपक जो जलता रोशनी है देता ,

दीपक की लौ से करिश्मा है होता ,

वही लौ तो सबको रास्ता दिखाती ,

वही तो सभी को मंजिल पर पहुँचाती | 


छोटा सा दीपक प्रकाश है फैलाता ,

सूर्य का अंश ही है वो तो ,

तभी तो किरणों से राहें चमकाता ,

चलने वाले राही को रास्ता दिखाता |


हर समस्या का समाधान है दीपक ,

आशा का सामान है दीपक ,

कभी भी इसे बुझने ना देना ,

आँखों का अभिमान है दीपक |




Wednesday, December 23, 2020

PYAR BASATA HAI ( SHORT POEM )

      प्यार बसता है 


पहाड़ों में बसीं वादियाँ ,

मानो प्यार में डूबीं घाटियाँ ,

बुलातीं सभी को , आओ बस जाओ तुम ,

पाओगे तुम यहाँ ,हसीन सी झाँकियाँ |


प्यार बसता यहाँ ,प्यार रिसता यहाँ ,

मानो कोई हो झरना ,यहाँ प्रेम का ,

प्यार हर फूल में ,हर कली में बसा ,

प्यार की माला हर कोई ,पिरोए यहाँ |


प्यार की धुन यहाँ ,वादियों में गूँजती ,

प्यार की महक से ,बहारें महकतीं ,

हरेक घर में प्यार की ,खिचड़ियाँ हैं पकतीं ,

प्यार की खिलखिलाहट ,मुस्कानों में सजतीं |


छोड़ कर अपने शहर ,अपने घर ,

लोग आते यहाँ ,लोग बसते यहाँ ,

तुम भी आकर यहाँ ,इन्हीं में खो जाओ ,

छोटा सा अपना नीड़ ,बसाओ यहाँ |




Tuesday, December 22, 2020

AAI TITALI ( GEET )

     आई  तितली 


रंग - बिरंगी तितली आई ,उड़ती - उड़ाती ,

मेरे फैले हाथों पर ,आकर बैठ जाती ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |


मेरे बचपन की यादों को ,ताज़ा कर जाती ,

उन खेलों की यादों को ,वो तो दोहराती ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |


फर - फर,फर - फर करती ,पंखों को फैलाती ,

बचपन के दिनों की बीती ,कहानियाँ सुनाती ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |


रंगों से भरी बगिया में ,जब वह उड़ती जाती ,

उसे पकड़ने के लालच में ,मैं भी दौड़ लगाती ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |


यादें तो अनमोल हैं ,मेरे इस जीवन में ,

तितली कहती मुझसे ,मेरे भी जीवन में ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |





Monday, December 21, 2020

PATRA - NAMAN VIRON KO ( LEKH - PATRA )

   नमन वीरों को 


नमन करूँ मैं वीरों को ,

हाथ जुड़ें ना मेरे भगवन ,तेरी मूरत के आगे ,

शीश झुके ना मेरे ईश्वर ,तेरे मंदिर में जाके ,

मेरे हाथ जुड़ाना भगवन ,मेरा शीश झुकाना ईश्वर ,

जहाँ खड़ा हो टोला ,मेरे देश के वीरों का ,

जो देश की रक्षा करते ,देश हेतु ही मरते |


बीते मेरा सारा जीवन ,उनके ही गुणगान में ,

जो हैं सच्चे हीरे -मोती ,भारत की इस खान में ,

देशभक्ति की शक्ति बहती,उनके लहु की रवानी में,

जो देश की रक्षा करते ,देश हेतु ही मरते |


वीरों सिर झुकता है मेरा ,सदा तुम्हारे आगे ,

नमन मेरा स्वीकार करो तो ,मेरे भाग्य हैं जागे ,

तुम ही हो शक्ति भारत की ,हम करें भक्ति तुम्हारी ,

जो देश की रक्षा करते ,देश हेतु ही मरते |

        जय जवान ,जय भारत ,

                                      वीरों की भक्तिन

 

Saturday, December 19, 2020

PATRA DESH KI MAHILA KA ( LEKH -- PATRA )

 पत्र देश की महिला का 

 

 नमन सरहद के वीरों को ,

तीन रिश्ते पहुँचे हमारे ,सरहद की रक्षा करने हेतु ,

देश की रक्षा हेतु |

 

पहला दोस्त पति अपना ,दूसरा है बेटा अपना ,

तीसरा है भाई अपना ,देश की रक्षा हेतु | 

 

दोस्त पति के साथ जीवन बीत रहा ,

बेटे ने माँ होने के अर्थ बताए ,

भाई के संग बचपन से खेले हम तो ,

गए सभी सरहद पर ,देश की रक्षा हेतु | 

 

प्यार किया दोस्त पति से ,आशीष दिया बेटे को ,

राखी बाँधी भाई को हमने ,देश की रक्षा हेतु | 

 

प्यार करेगा रक्षा पति की ,आशीष फलेगा बेटे को ,

राखी रक्षा करे भाई की ,देश की रक्षा हेतु | 

 

विजय श्री पाओ तुम तीनों ,नहीं पीठ दिखलाना ,

यही कामना है मेरी ,सरहद पर डट जाओ तुम ,

देश की रक्षा हेतु | 

 

आओगे जब वीरों तुम ,विजय श्री को पाकर ,

मैं ही क्या ये पूरा देश ,उतरेगा आरती हाथ जोड़कर ,

देश की रक्षा हेतु | 

जय जवान ,जय भारत | 

                                            देश की महिला ,

 

 

 

Thursday, December 17, 2020

PATRA MAATI KA (LEKH --- PATRA )

                 पत्र माटी का 

 नमन वीरों को ,

सरहद के वीरों सुनलो ,पुकार देश की माटी की ,

मेरा तिलक लगा के पहुँचे तुम,भूमि रेखा पर सीमा की |

  

मुझ से तुमने जन्म लिया ,मैंने ही तुमको पाला ,

मैंने ही तो भरा तुम्हारी ,आँखों में उजाला | 


मेरे ऊपर चलकर ही तुम ,चलना - फिरना सीखे ,

सभी खेल खेले मुझ संग ,कभी हारे ,कभी जीते | 


बढ़ते -बढ़ते बने काबिल ,आज बने वीर सरहद के ,

संघर्षों से जूझ -जूझकर ,सीना तान खड़े सरहद पे | 


आज समय आया है वीरों ,मेरा क़र्ज़ चुकाना है ,

सरहद पार के आतंकियों से ,तुमने मुझे बचाना है | 


हाथ लगा ना पाए कोई ,गंदे ,नापाक इरादों से ,

तोड़ के रखना उन हाथों को ,बढ़ें जो गलत इरादों से | 


पत्र लिखा है तुमको वीरों ,दिल की बात लिखी है ,

देश को गर्व है तुमपे वीरों ,माटी भी सलाम करती है | 

 जय जवान ,जय भारत ,          

                                              देश की माटी

Wednesday, December 16, 2020

NAYA SAVERA , PURANE PATTE ( JIVAN )

                नया सवेरा , पुराने पत्ते 

 

आई चिड़ियों की आवाज ,उठ जाओ हुआ प्रभात , 

नहीं नींद में डूबे रहो ,नहीं सपनों में खोए रहो | 


सूरज की किरणें फ़ैल गईं ,संसार सुनहरा हो गया ,

जागो सभी सोने वालों ,देखो सवेरा हो गया | 

 

दिन कीसुंदर शुरुआत हुई ,चाय की चुस्की शुरु हुई ,

तुम भी उठकर आओ अब ,गरम नाश्ता खाओ अब | 

 

राही चल रहे सड़कों पर ,रेलगाड़ी भी चल दी अब ,

तुम भी अब तैयार होकर,ऑफिस को चले जाओ अब | 

 

 काम चलेगा सारे दिन ,नहीं मिलेंगे खाली छिन ,

काम में तुम लग जाओ अब , व्यस्तता को अपनाओ अब | 


खिड़कियों को बंद ना रखो,आने दो ताज़ी हवाओं को अब,

दिल ,दिमाग खुल जाने दो ,नए विचार अपनाओ अब | 

 

पतझड़ का मौसम आया है ,झड़ जाने दो पुराने पत्ते ,

झड़ जाएंगे पुराने पत्ते ,आने दो नए पत्ते अब | 

 

पतझड़ के बीतते ही ,हरियाली छा जाएगी ,

बागों में तभी तो ,बहार मुस्कुराएगी | 

 

 

 

 




Monday, December 14, 2020

DWAR KI BAGIYAA ( GEET )

    द्वार की बगिया


मेरे द्वार के पार ,एक बगिया है दोस्तों ,

सूरजमुखी खिली है ,उसमें तो दोस्तों |


सूरज की किरणें ,उसको तपातीं हैं दिनभर ,

पर वो तो मुस्कुराती ,रहती है फिर भी दिनभर ,

नहीं उदास कभी वो ,होती नहीं है दोस्तों |


रंग है उसका पीला ,जैसे शगुन की हल्दी हो ,

सबके नयनों में वो ,चमक लाती है दोस्तों |


मैं कदम जब निकालूँ ,द्वार के बाहर को ,

तब वो मेरा अभिवादन ,करती है दोस्तों |


प्यार से जब उसे ,छू लूँ मुस्कुरा कर ,

तब वो और भी अधिक ,खिल जाती है दोस्तों |


देती है फायदा वो ,जाने ,अनजाने को भी ,

प्यार वो सभी में ,बाँटती है दोस्तों |


सूरजमुखी की महक तो ,द्वार से भी अंदर आती ,

उस महक से मेरा घर ,महका रहता है दोस्तों |


मेरे घर की पहचान ,वही सूरजमुखी बनी है ,

अनजान कोई भी मेरा घर तो ,ढूँढ लेता है दोस्तों | 




Saturday, December 12, 2020

DHADAKTA DIL ( PREM )

 

धड़कता  दिल

 

आजकल खत नहीं लिखता कोई ,

खाली हैं सारे लैटर - बॉक्स शहर में ,

मोबाईल से एस . एम . एस . जाते हैं ,

मिनटों में आ जाता है जवाब उनका |


खतों का  एक जमाना था यारों ,

राह तकते थे हम उनके खत की ,

शब्दों में भाव दिखते थे उनके ,

शब्दों में दिल धड़कता था उनका |


आज राहें भी जैसे सूनीं हैं ,

नयन उनपे ना बिछे हैं कोई ,

डाकिया भी कोई नहीं आता है ,

लाता नहीं है कोई खत उनका | 


कितनी खुश्बुएँ हवा में उड़ती थीं ?

कितनी संगीत भरी धुन हवा में उड़ती थीं ? 

मुस्कराहट लबों पर यूँ बिखर जाती थीं ,

जब भी लाता था कोई खत उनका |


हम कैसे जवाब लिखें उनको ?

शब्द जब सामने नहीं हमारे हैं ,

लेखनी सो गई है अब यारों ,

कागज़ भी लगता है कुँवारे हैं |


कोई जाए उन्हें ये समझाए ,

कोई तो उनसे खत भी लिखवाए ,

कभी तो वो भी हमको बतलाएँ ,

कितनी जोर से धड़कता है दिल उनका ?  


Friday, December 11, 2020

DHADAKANE DE (PREM )

                    धड़कने  दे 

 

जुल्फों को हटाले चेहरे से ,थोड़ा सा चांदना होने दे ,

हम मिलने आए हैं तुझसे,एक चाय का सिप तो होने दे | 

 

 जुल्फों के अँधेरे में तुझको ,कैसे हम देख पाएँगे ?

बिना देखे तुझको हम,कैसे बातें कर पाएँगे ?

थोड़ा सा उजाला हो जाए ,तो गप्पों का संगीत बहने दे | 

 

लंबी काली जुल्फों के घनेरे ,अंधकार की छाँव में ,

हम तुम बैठेंगे साजन ,पीपल की गहरी छाँव में ,

बातों के छनकते झुरमुट में,छन छन की धुन तो बजने दे|

 

बैठे बैठे हम करेंगे बातें ,सपनों की सुन्दर दुनिया की ,

भूल जाएँगे हम ये दुनिया,और परंपराएं इस दुनिया की,

बातों के उन सपनों में ,प्यार की बीना बजने दे | 

 

मुलाकात तो रोज़ ना होती ,रोज ना सजतीं हैं महफ़िल ,

रोज ना गुल खिलते चँहु ओर,रोज ना धड़के जोर से दिल, 

आज तो मुलाकाती के ,दिल को जरा धड़कने दे | 

 

Friday, December 4, 2020

JADUI SHAKTI ( JIVAN )

                   जादुई शक्ति 

 

धरा हमारी परियों जैसी ,जादू करना जाने ,

 नन्हें - नन्हें बीजों से ,पौधे उगना जाने | 


उन पौधों में अनगिनत पत्तियाँ ,

और फूल खिलाना जाने ,

उन फूलों की खुश्बु को वो ,

दूर - दूर फैलाना जाने | 


फूलों से बनाती फल मीठे ,

फलों से फिर बीज बनाना जाने ,

ऐसे ही प्यारी धरती हमारी ,

गोल - गोल सा चक्र चलाना जाने | 


ये सब गुण वो रखे छुपा कर,

किसी को नहीं बताना जाने ,

तभी तो हम उसको कहते हैं ,

धरती माँ ना  अपने गुणों को जताना जाने | 

 

पौधे भी जादुई बन कर ,

मानव की खुशियों को बढ़ाना जानें  ,

फल ,फूलों से मानव की ,

दुनिया को भरना जानें | 

 

रंग , स्वाद , खुश्बु से दुनिया ,

भर देना तो जानें ,

ऐसी अलौकिक शक्ति रखते हैं वो ,

फिर भी कोई घमंड ना जानें | 

 

 

 

MEGHA RE ( RANI PARI )

   

( रानी  परी  )  

 

पंख नहीं हैं मेरे ,कैसे उड़ आऊँ मैं ? 

तू मुझे बुलाए बेशक ,पर उड़ ना पाऊँ मैं | 

 

उधार के पंख तो ,पंछी से ले ना सकूँ मैं ,

कोई भी अपने पंख ,कैसे देगा भला ? 

मोल तो उन पंखों का ,चुका ना पाऊँ मैं | 

 

बिन पंख भी कोई उड़ता ,बस बदरा ही हैं ऐसे ,

बदरा तो उड़ते गगन में ,पंख नहीं हैं उनके ,

बिन पंखों के उनके जैसा ,कैसे उड़ पाऊँ मैं ? 

 

पवन सखि है मेरी ,उसकी भी मजबूरी ,

ना पंख हैं उसके पास ,ना है उसको कोई आस ,

कैसे उड़ाए वो मुझको ,जबकि पंख ना उसके पास ,

ना मैं हूँ कोई तिनका ,जो पवन से उड़ जाऊँ मैं | 

 

पंख अगर होते मेरे ,उड़ जाती मैं बदरा के पार ,

गगना में उड़ती रहती ,दिख जाती दुनिया अपार ,

दिलवा दे मुझको कोई ,दो दिन को पंख उधार ,

तो दो दिन के लिए ही सही ,रानी परी बन जाऊँ मैं | 

 

 

Saturday, November 28, 2020

THAMO HAATH MERA ( PREM )

       थामो हाथ मेरा 

 

माँ थाम लो तुम  हाथ मेरा ,

चलना मुझे सिखा दो ,

टेढ़े - मेढ़े रास्ते दुनिया के हैं माँ ,

संभलना मुझे सिखा दो | 

 

गुरु जी थाम लो तुम हाथ मेरा ,

पढ़ना - लिखना मुझे सिखा दो ,

बड़ी सी इस दुनिया में ,

आगे बढ़ना मुझे सिखा दो | 

 

बापू थाम लो तुम हाथ मेरा ,

कर्मक्षेत्र मुझे दिखा दो ,

इतनी सारी राहें हैं दुनिया की ,

कर्मठ बनना मुझे सिखा दो | 

 

दोस्तों थामो तुम हाथ मेरा ,

प्यार की दुनिया में ले जाओ ,

मौज - मस्ती भरी इस दुनिया में ,

मस्त रहना मुझे सिखा दो | 

 

हे ईश्वर थाम लो तुम हाथ मेरा ,

तुम्हारी रची इस दुनिया में ,

अज़ब - गज़ब जिंदगी में , 

इंसान बनना मुझे सिखा दो | 

 

 

Thursday, November 26, 2020

AAKAR HAI KANKAL ( JIVAN )

    आकार है कंकाल 


कंकाल है आधार ,इस शरीर का ,

कंकाल है तो आकार ,इस शरीर का ,

कंकाल के कारण ही तो ,हम खड़े हैं ,

कंकाल के कारण ही तो ,हम बड़े हैं |


कंकाल को समझे कोई ,क्यों डरावना ?

कंकाल है गर ठीक तो ,मौसम सुहावना ,

कंकाल ना हो गर हमारे अंदर, तो हम क्या हैं ?

माँस का एक लोथड़ा है, आकार के बिना |


दिल - दिमाग सब तो, कंकाल में सुरक्षित ,

उसी ने तो किया है, सभी को रक्षित ,

कंकाल ही तो दोस्तों है,नींव जिंदगी की ,

सुंदरता है हमारी साँस की ,है आस भी रक्षित |


मजबूती से बना हो ,तो दौड़ हम लगाते ,

वरना तो दोस्तों हम ,चल भी नहीं पाते ,

इसका ख्याल रखना ,रखना इसे सुरक्षित ,

हमारा है कर्त्तव्य कि ,रखें इसको हम सुरक्षित |



Sunday, November 22, 2020

CHANDA -- 1 ( PAIDAL -PAIDAL )

 चंदा -- 1 (  पैदल - पैदल )  भाग - 28 

 

चाँद घूमे पूरी रात ,पैदल - पैदल ,

थक जाता है क्योंकि चले रात भर ,पैदल - पैदल ,

तपस्या वो करता रात भर ,पैदल - पैदल | 

 

माँ से कहा तो बाजार गए ,पैदल - पैदल ,

खाली था बाजार भी ,नहीं मिली नई साईकिल ,

चलने लगे दोनों वापस ,पैदल - पैदल | 

 

ऊँची दुकान फीके पकवान के बीच से ,

किसी ने पुकारा जोर से ,पलटे दोनों ,

देखा दुकानदार आ रहा था ,पैदल - पैदल | 

 

एक पुरानी साईकिल है ,क्या लोगे तुम ? 

चाँद बोल पड़ा एकदम ,हाँ -हाँ ,हाँ - हाँ ,

क्या दाम देना पड़ेगा जरा बताओ ? 

कुछ नहीं ,कुछ नहीं ,तुम वापस तो आओ | 

 

नहीं चाहिए मुझको पैसे ,तुम साईकिल ले जाओ ,

मिली साईकिल ,थी पुरानी ,मगर अच्छी ,

लेकर चले दोनों ,माँ को था पीछे बिठलाया ,

नहीं अब चलना पड़ा दोनों को ,पैदल - पैदल | 

 

रात हुई चाँद ने उठाई साईकिल ,

चला चाँद दुनिया की सैर को ,

मुस्कुराता चाँद अब ना चला ,पैदल -पैदल | 

 

एक छोटी सी ,भोली सी लड़की ,

देख चाँद को मुस्कायी ,माँ से बोली ,

देखो माँ चाँद है साईकिल पे सवार ,

नहीं आज चलता है वो पैदल - पैदल | 

 

चाँद भी मुस्काता बोला ,अब ना चलूँगा पैदल -पैदल ,

अब तो दौड़ लगाऊँगा मैं ,मार के पैडल -पैडल |

Tuesday, November 17, 2020

ULJHE DHAGE MOH KE ( PREM )

       उलझे धागे मोह के 


मोह के हैं जो रंग - बिरंगे धागे ,

उलझ -उलझ कर घूमते जाएँ ,

कैसे हम उनको अलग -अलग सुलझाएँ ? 


तारे भी कुछ उनमें फँस कर ,

जगमग उन्हें भी कर जाएँ ,

कैसे हम उनको अलग - अलग कर पाएँ ? 


सूखे गुलाब मिल गए किताबों में ,

सभी पंखुड़ियाँ बिखर गईं सी ,

कैसे हम उनको एक साथ जोड़ पाएँ ? 


जल परियाँ तो सिर्फ कहानियों में ,

मगर सभी करती हैं मोहित दिलों को ,

कैसे हम उनको हकीकत में देख पाएँ ? 


दीप जले तो गुम हुआ अँधियारा ,

सारे जग में छा गया उजियारा ,

आओ मिलकर हम सब ही मन के दीप जलाएँ ,

प्यार बाँट कर दुनिया में प्यार के दीप जलाएँ ,

मोह के रंगीन धागों में और भी उलझ जाएँ | 



Monday, November 16, 2020

MOHAN PYARE ( GEET )

     मोहन प्यारे 


भागो मोहन प्यारे ,भागो ,

भागो इस कोरोना से दूर को ,भागो ,

भागो  2020  है साथ तुम्हारे ,भागो मोहन प्यारे -- |


कोरोना की लड़ियाँ लटकीं मोहन ,

तोड़ के उनको दूर करो ना ,

जो मानव परेशान हैं उनसे ,

उनकी तुम परेशानी हरो ना ,

तुम भी दूर हो जाओ मोहन ,भागो मोहन प्यारे -- |


सभी मानव तुमको पुकारें ,

उनकी तुम पुकार सुनो ना ,

दुनिया से इस कोरोना को ,

जल्दी से तुम दूर करो ना ,

सबकी तुम परेशानी हरो ना ,

तुम भी दूर हो जाओ मोहन ,भागो मोहन प्यारे -- |


नोट --  इसको पढ़ने वाले अगर जागृति

         फिल्म के गीत "  जागो मोहन प्यारे " की

        धुन पर गुनगुनाएंगे तो अच्छा लगेगा |

Saturday, November 14, 2020

PARIYON JAISI BETIYAN ( GEET )

      परियों जैसी बेटियाँ 


परियों की कहानियाँ ,कहानियों की परियाँ ,

परियों के सपने या ,सपनों की परियाँ ,

उड़ती हुई ,सुंदर सी ,नन्हीं - नन्हीं परियाँ |


सोचकर ही दिल में ,प्यार उमड़ आता है ,

आँखों में सुंदर सी,गुड़िया सी,मूरत उभर आती है|


घर की नन्हीं बेटियाँ ,परियाँ ही तो होतीं हैं ,

सुंदर सी ,चुलबुली सी ,नन्हीं -नन्हीं गुड़ियाँ होतीं हैं |


उन्हीं परियों से ही तो ,घर भी परीलोक बन जाता है ,

सपनों में जैसे हम रहते हैं,सपना भी सुंदर बन जाता है|




Friday, November 13, 2020

AAJ DIWALI RE ( GEET )

    आज दिवाली रे 


दीप जलाओ ,दीप जलाओ ,आज दिवाली रे ,

दीपों की सुंदर हैं लड़ियाँ ,आज दिवाली रे |


मंदिर में सजती है आरती ,आज दिवाली रे ,

मन मयूर भी नृत्य कर उठा ,आज दिवाली रे |


छुटे पटाखे ,बँटी मिठाई ,आज दिवाली रे ,

पूरे देश में बजी बधाई ,आज दिवाली रे |


पकवानों की खुश्बु उड़ती ,आज दिवाली रे ,

बच्चे उड़ते पंछी जैसे ,आज दिवाली रे |


तुम भी खुश हो हम भी खुश हैं ,आज दिवाली रे ,

मुस्कानों की लड़ियाँ सजतीं ,आज दिवाली रे |



Thursday, November 12, 2020

BAYAR OR TOOFAN (POETRY FESTIVAL )

    बयार और तूफ़ान 


मीठी -मीठी चली बयार,साँसें आतीं रहीं हजार ,

पेड़ों का ये जादू है, जो चलती रही सरस बयार |


मुस्कान से खिले चेहरे,कहते सब मौसम खुशगवार,

देख-देखकर,सुन -सुनकर,खुद भी तो मुस्काई बयार |


गुड़िया भी खुश होकर खेले ,भैया भी तो झूला झूले ,

पौधों की पत्तियाँ जब हिलतीं ,फूलों की मुस्कानें झूलें | 


जब बयार बन जाए पवन ,मम्मी का उड़ जाए दुपट्टा ,

गुड़िया ,भैया भागे जाएँ ,तितलियों को पकड़ ना पाएँ |


होती जाए तेज पवन ,बादल आए उड़ -उड़कर ,

सूरज छिपा बादलों में ,बूँदें झरने लगी झर -झर |


पवन ने अब तेजी पकड़ी ,बदरा भी घनघोर हुए ,

तेजी से वर्षा है आई ,अंधकार फैला है भाई |


सभी छिप गए घर में अपने ,जीव -जंतु, बच्चे जितने ,

कोई नहीं है बाहर अब ,झाँक रहे हैं बाहर सब |


खिड़की भी ना खुले अभी ,वर्षा हो चली मूसलाधार ,

हवा तेज आँधी के जैसी ,कहाँ से आई हवा ये ऐसी ?


पेड़ भी अब तो डोले हैं ,लगता जैसे नहीं हैं बस में ,

हवा ने उनको पस्त किया ,मानो उन्हें परास्त किया |


हवा का ये कैसा है रूप?छिप गई जिसके कारण धूप,

बदरा आए ,वर्षा आई ,हवा ने बदला मौसम का स्वरूप |


हवा के तो हैं अनेकों रंग ,चलते जाते जो संग -संग ,

शांत हो तो है नाम बयार ,ऐसे चलती जैसे तरंग |


हो तेज तो आँधी ,तूफ़ान ,टूटें पेड़ ,उड़ें सामान ,

पर यही हवा जरूरी है ,साँसों का है ये सामान |

Wednesday, November 11, 2020

JALDHAR ( JIVAN )

                  जलधार


पहाड़ों का सीना चीरकर ,जलधारा झरी झर -झर ,

नाम मिला इस जलधार को, झरना कहा जलधार को,

जलधार थी बर्फीली ,बर्फ का पिघला स्वरूप ,

स्वच्छ जल की धार थी ,उसका स्वरूप था अनूप |


वो ना रुकी चट्टान से ,वो ना रुकी पहाड़ से ,

बहती गई लगातार ,रास्ता अपना बनाती गई ,

शीशे जैसी पारदर्शी ,शीशे जैसी स्वच्छ ,

चेहरा उस में देखकर ,कर सकते हैं मेकअप |


जलधार जब झरना बनी ,नीचे को वो गिरती गई ,

नीचे बही नदिया के जैसी ,आगे को बढ़ती गई ,

जिधर भी मिला रास्ता ,उधर ही वो बढ़ गई ,

उसके दोनों किनारों पर ,हरियाली छा गई |


मैंने तो जब उसको देखा ,दिल मेरा डोल गया ,

कदम बढ़े उस ओर को,जल में मेरा कदम गया,

ठंडी सी सिहरन से मैं,अंदर तक तब काँप गई,

मगर लंबी साँसें लेकर ,जल में मैं तो उतर गई |


खड़ी हो जल के अंदर ,दिल भी  मानो भीगा था ,

तनमन जल के अंदर थे,ख़ुशी का मानो सागर था,

ऐसी खुशी ना पाई थी ,पहले कभी ,पहले कभी ,

आज मिली है मुझको जो ,पहली - पहली बार |


आसपास की  हरियाली ,नई -नई सी ,सुन्दर सी,

दिया रूप उसने जलधार को ,सुंदर और प्यारा सा ,

जलधार थी पूरक हरियाली की ,

हरियाली थी शुक्रगुज़ार जलधार की,उस झरने की |


यही है दोस्तों प्रकृति ,स्वरूप है उसका अनोखा ,

प्रकृति खिल जाती है अगर ,उसे मिले एक मौका |




Tuesday, November 10, 2020

KHOLO DWAR ( JIVAN )

                     खोलो द्वार

 

ऊपर बैठे कुम्हार ने ,माटी के पुतले बनाए ,

नीचे भेजा उनको ,उनमें प्राण जगाए ,

दुनिया में आकर वो खेले ,कूदे ,नाचे ,गाए ,

खुशियाँ फैलीं दुनिया में ,पुतले मानव कहलाए | 


उसी कुम्हार ने कुछ ,भिन्न आकार बनाए ,

उनमें से कुछ आकार तो ,मानव को लाभ कराए ,

लेकिन कुछ आकार तो ,मानव को सताएँ ,

ऊपर बैठे कुम्हार ने उनके ,इलाज नहीं बताए | 


छोटे -छोटे नुकसान तो,मानव भी सहता जाए ,

मगर कुछ नुकसान तो ,मानव को तड़पाएँ ,

उन्हीं में एक कोरोना है ,जो मानव को रुलाए ,

बिना मास्क के मानव ,घर से निकल ना पाए | 

 

मास्क पहन मानव तो ,शुद्ध हवा ना ले पाए ,

अपनी छोड़ी साँस ही मानव ,फिर अंदर ले जाए ,

कोरोना से बच जाने पर भी,मानव दूसरे रोग लगाए,

 अस्थमा जैसी बीमारी का ,वो शिकार बन जाए | 


अपना द्वार खोलो हे ईश्वर ,कोरोना वहाँ आ जाए ,

आज जो उसका रूप बना है ,सब को वह रुलाए ,

लाखों मानव उसके कारण ,काल के गाल में समाए ,

उसका रूप बदल दो ईश्वर ,सभी को लाभ पहुँचाए | 



Monday, November 9, 2020

PREM KAHANI ( PREM )

   प्रेम कहानी 


सखि एक प्यारी ,सब की थी दुलारी ,

स्कूल जब छूटा ,कॉलेज से नाता जुड़ा था ,

मस्ती भरे थे दिन,मन मयूर नाचे तिनक दिन,

वो उम्र ऐसी थी,सब कुछ सुंदर लगता था|


एक दिन वह बोली ,एक लड़का मेरे पीछे ,

रोज घर से कॉलेज और कॉलेज से घर आता है,

बोलता कुछ नहीं बस देखता जाता है |


हम भी हँस दिए दोस्तों ,कहा उससे ,

मत डर सखि ये तो तेरा बॉडीगार्ड है ,

किसी तरह की समस्या नहीं आएगी ,

आएगी तो डर कर भाग जाएगी |


ऐसे ही दिन बीतते रहे ,साथ चलता रहा ,

सभी कुछ यूँ ही पलता रहा ,

मुस्कानों,खिलखिलाहटों का दौर चलता रहा |


एक दिन वह सखि मेरे घर आई ,

नई बात उसने सुनाई,उस लड़के ने कहा है,

उसे प्रेम है सखि से ,वह जान दे देगा ,

यदि वह सखि हाँ नहीं कहेगी तो |


मैंने कहा जान कोई नहीं देता डर मत ,

वह बोली यदि सच हुआ तो ,

मैंने कहा -तो तू हाँ कर दे ,

लड़का तुझसे सुंदर है ,पढ़ा -लिखा है ,

जाति भी तुम्हारी है ,प्रेम भी करता है ,

व्यापार भी करता है ,क्या परेशानी है ,

सखि उलझन में थी,माता-पिता का डर था|


खैर दोस्तों ,कुछ दिन बाद ,

सखि की कजिन की शादी थी ,

सखि के जीजाजी से उसने दोस्ती बढ़ाई ,

उन्हें सारी बात समझाई ,जीजाजी ने ,

घरवालों को बताया ,सारा माजरा समझाया |


माता -पिता खुश हुए ,और कुछ महीनों बाद ,

सखि दुल्हन बनी डोली थी सजी ,

सपनों जैसा संसार सजा ,जिंदगी आगे बढ़ी ,

एक प्रेम -कहानी शादी में तब्दील हुई ,

जिंदगी भी मानो चलने की जगह उड़ती गई |




 

Saturday, November 7, 2020

MILA BACHPAN ( RATNAKAR )

    मिला बचपन  ( रत्नाकर )


एक लड़की नादान सी ,शैतान सी ,

पहुँच गई उड़ते हुए बादलों के पार ,

ढूँढते हुए अपने नादान बचपन को ,

चाँद के देश में बादलों के पार |


बचपन तो पता नहीं कहाँ खो गया ?

सारी नादानियाँ अपने साथ ले गया ,

शैतानियों के साथ खिलखिलाहटें भी ले गया ,

बादलों के पार सूरजमुखी का बगीचा मिल गया |


बादलों से उतर कर चली नीचे को ,

सूरज की रश्मियों ने उजालों से भर दिया ,

समंदर की लहरों ने उछालों से भर दिया ,

सूरज और समंदर को मुस्कुराहटों से भर दिया |


समंदर के साथ रेत भी था दोस्तों ,

उसमें भी अनगिनत लहरें छिपीं थीं ,

मगर ये लहरें उछालों से ना भरीं थीं ,

सूखे - सूखे ,ऊँचे -ऊँचे टीलों से भरीं थीं |


पवन ने तेज होकर रेत को उड़ाया ,

रेत ने उड़ -उड़ कर बवंडर बनाया ,

तभी बादलों की समझ में बात आई ,

छाकर गगन में सूरज को छिपाया |


वर्षा को नीचे भेजा बवंडर को दबाया ,

तभी बचपन आया रेत का घरोंदा बनाया ,

घरोंदे को बनाकर लड़की ने उसको देखा ,

मुस्कुराहटों से उसने घरोंदे को सजाया | 




Wednesday, November 4, 2020

DARPAN ME BACHPAN KAHAN ( GEET )

   दर्पण में बचपन कहाँ ?


दर्पण तो है आज बताता ,कैसे बताए कल की बात ?

आज दिखेगा दर्पण में ,छोड़ो कल की कल पर बात |


बचपन की गलियाँ छूट गईं,जिंदगी चल दी आगे-आगे,

वो गलियाँ अब देखें कैसे?बँधे जहाँ बचपन के धागे |


कुछ सखियाँ हैं साथ अभी ,कुछ को ढूँढे नयन मेरे ,

इतनी बड़ी दुनिया है बँधु ,उम्मीद बड़ी है मन में मेरे |


रुकता नहीं किसी का बचपन,उम्र तो आगे बढ़ती जाती,

तभी तो बँधु सफर में आगे ,बचपन की यादें हैं आतीं |


जीते हैं अब अपना बचपन ,बच्चों के संग खेल नए ,

उन्हीं की हँसी में हँसते हम ,उन्हीं में पाते बोल नए |


पकड़ नहीं पाते हैं हम ,बचपन को इन हाथों में ,

बस बचपन के खेल ही तो ,बच्चों को सिखाते जाते हैं |

Tuesday, November 3, 2020

JIVAN ME ( GEET )

     जीवन में 


सुनहरी सुबह की लाली ,

बसी रहे जीवन में ,

खिलतीं रहें प्यार की कलियाँ ,

महकी रहें जीवन में |


बरसों - बरस साथ रहे ,

तुम्हारा और जीवन साथी का ,

उजाला भरपूर रहे दोनों के जीवन में |


शुभकामनाएँ सदा हमारी ,

तुम्हारे साथ बनी रहें ,

प्यार फैलता रहे दोनों के जीवन में |


ये करवा चौथ मुबारक हो ,

ऐसे ही ये आती रहे ,

सदा खुशियाँ बरसाती रहे ,

समेट लो सारी खुशियाँ अपने जीवन में |




Sunday, November 1, 2020

CHANDA ----- 1 ( PATR CHANDA KA )

 चंदा   ----  1   (  पत्र चंदा  का  )   

 

कल चंदा ने भेजा है खत ,लिखा है उसने मेरे नाम ,

लिखा है उसमें यारों ,सब घर वालों को परनाम | 

 

बहुत दिनों से मिले नहीं हम ,मैं भी घर में ,तुम भी ,

बदरा मुझे छिपा लेते हैं ,तुम हो द्वार के अंदर में | 

 

मेरे करोड़ों ,अरबों बच्चे ,नन्हें से तारे शैतान ,

अगर आऊँगा तुमसे मिलने,मचा ही देंगे वो तूफ़ान | 

 

तुम्हें भी तो पाबंदियाँ हैं ,मैं भी घर में कैद सखि ,

कैसे निकालूँ मैं बाहर ,डर की है दीवार खड़ी | 

 

वायरस बहुत ही छोटा है ,मगर है वो घना ही घातक ,

तारा एक बीमार हुआ तो ,मच जाएगा फिर आतंक | 

 

सृष्टि का क्या हाल ही होगा ? कौन इलाज करेगा फिर ? 

एक अकेला रखवाला हूँ ,कौन साथ देगा मेरा फिर ? 

 

सूरज तो है ताप भरा ,मैं ठंडा हूँ शीतल सा ,

सूरज के साथी भी तगड़े ,मैं तो बड़ा ,कभी छोटा सा | 

 

ठीक  चंदा घर में रहना ,सारे नियम निभाओ तुम ,

जब सब ठीक हो जाएगा ,तब मेरे घर आओ तुम | 

 

पत्र सदा लिखते रहना ,हाल चाल बतलाओ तुम ,

मेरी चिंता नहीं तुम करना ,प्यार मेरा सब पाओ तुम | 



TERI SOORAJMUKHI ( GEET )

     तेरी  सूरजमुखी


सूरज का उदय नील गगन में ,

जब होता है तो किरणें उसकी ,

फ़ैल गगन में लेतीं हैं चुस्की ,

खिलने लगती है सूरजमुखी |


रंग बदलता है गगना का ,

ख़ुशी वो जाहिर करता है ,

तभी धरा पर खिलते - खिलते ,

मुस्काती है सुंदर सूरजमुखी |


सूरज के संग -संग उसी दिशा में ,

घूमती रहती सूरजमुखी ,

पूरा दिन सूरज को देख - देख ,

खिल जाती पूरी सूरजमुखी |


सूरज के प्यार में डूब के ,

देख उसे संभलती हुई ,

अदृश्य डोर से बँधी हुई ,

घूमती रहती सूरजमुखी |


मानो गुनगुना रही हो ,

"तू सूरज मैं सूरजमुखी हूँ पिया ,

ना देखूँ तुझे तो खिले ना जिया |"




"तू सूरज मैं सूरजमुखी हूँ पिया ,

ना देखूँ तुझे तो खिले ना जिया |"




Saturday, October 31, 2020

VO LADAKI ( GEET )

     वो लड़की 


कहाँ है वो लड़की ,जो घूम रही थी ,

आज़ाद होकर के ,शिखर को चूम रही थी |


तेरी गलियों में आई क्या वो ?

बहारों में खिली क्या वो ?

क्या वो फूलों को चूम रही थी ?

क्या वो तितली सी घूम रही थी ?


रिमझिम फुहारों में वो बसी थी ,

सावन के झूलों में वो फँसी थी ,

सावन के झूलों में तो वो झूल रही थी |


पतझड़ ने उसको रोका ,उसको था पुकारा ,

आज़ादी ने हाथ खींचा ,आगे को बढ़ाया ,

सावन की रिमझिम हरियाली ,

तो उसको खींच रही थी |


अपनी हिम्मत से वो बढ़ी थी ,

अपने साहस से वो चढ़ी थी ,

हारी ना वो कभी भी ,

अपनी मुस्कानों में वो खड़ी थी |




Friday, October 30, 2020

CHANDA ----- 1 ( KITANE DINON KE BAAD )

        चंदा ---- 1  

 (  जाने कितने दिनों के बाद  ) 

 

जाने कितने दिनों के बाद ,

खिड़की में मेरी चाँद निकला , 

रोज बदरा के पीछे छिपा रहता था ,

थोड़ा -थोड़ा सा झाँकता रहता था ,

आज तो बड़े अरसे के बाद ,

खिड़की में मेरी चाँद निकला | 


उसका चमकीला रंग भी है,आज तो बढ़ा हुआ,

चाँदनी की छटा भी है ,आज तो बढ़ी हुई ,

देखो -देखो तो मुस्काता हुआ ,

सखि री आज चाँद निकला | 


पहले तो रोज आता था रात में ,

कभी -कभी तो सखि री आधी रात में ,

कभी होता बड़ा ,कभी होता छोटा ,

मगर आज तो ये जादू सा हो गया ,

मेरा पूरा चाँद तो सरे शाम निकला | 


हम दोनों की बातें चलतीं रहीं ,

रात गहराती रही और गुजरती रही ,

हमारी बातें वो लगातार सुनती रही ,

साथ ही साथ वो मुस्कुराती रही ,

विदा ली चाँद ने सुबह को ,जब रवि निकला | 



Thursday, October 29, 2020

NANHEN SE KHWAB ( GEET )

 

                      नन्हें से ख्वाब 


देश हुआ आज़ाद हमारा,सच में क्या आज़ाद हुआ?

पहले अंग्रेजों के गुलाम थे ,अब हम अंग्रेजी के हुए | 


पहले परंपराएँ थीं अपनी ,अब रूढ़िवादिता हुई ,

पहले पंडित मौलवी थे,अब बाबाओं की बानी हुई |


पहले घर में बड़े लोग थे,समझाते हर बात को ,

अब घर में कम्प्यूटर हैं ,हल करते हर बात को |


सबसे आज़ादी चाहें हम ,नहीं बंदिशें चाहते ,

नन्हें -नन्हें ख्वाब हमारे ,पूरा करना चाहते |


दुनिया को खुशहाल हमेशा ,निरोगी,खुशियों भरी,

पेड़ों की हर डाली हो ,पत्तों से सदा हरी -भरी |





Wednesday, October 28, 2020

AANEN VALIN HAIN BAHAREN ( SAMAJIK )

   आने वालीं हैं बहारें 


मौसम है आज पतझड़ का ,

चिंता मत करो यारों ,

नए फूल खिलेंगे ,

आएंगी फिर से बहारें यारों |


खुद को सुरक्षित रखो तुम,

घर में प्यार बनाओ तुम,

चिंता कुछ नहीं करो तुम,

जिंदगी भरपूर जियो तुम|


मत सोचो तुमने क्या खोया है ?

सोचो कि तुमने क्या पाया है ?

क्यों प्रकृति ने तुम्हें रुलाया है ?

क्यों वक्त ने तुम्हें सताया है ?


आज वक्त का सम्मान करो तुम यारों ,

आज तो प्रकृति से जुड़ जाओ तुम यारों ,

प्यार से परिवार खुश कर जाओ तुम यारों ,

तभी तो पाओगे सभी चिंताओं से मुक्ति तुम यारों |


वक्त बीत रहा है और बीतेगा ,

नया द्वार दुनिया में खुलेगा ,

नया रास्ता दुनिया में मिलेगा ,

उसी पर तो मानव फिर चलेगा |


प्रकृति देगी बहारें फिर से तुम्हें ,

वक्त देगा ठहाके फिर से तुम्हें ,

होठों पे मुस्कराहट तुम्हारे आएगी ,

भरेगी नै सी चहचहाहट फिर से तुम्हें |


जिंदगी फिर से मुस्कुराएगी ,

मुस्कुरा के नए गीत गुनगुनाएगी ,

रुको ना उस पल का इंतज़ार करो ,

एक नै सुबह जल्दी ही आएगी ,

उसी का इंतज़ार करो ,

आने पे उसका सत्कार करो ,

द्वार खोल दो उसके लिए ,

उठो और आरती सजा लो उसके लिए |






Tuesday, October 27, 2020

CHAND JAANE KAHAN ( GEET )

            चंदा ---- 1      (चाँद जाने कहाँ  ) 

 

गगन में जब सूरज चमका,चाँद जाने कहाँ खो गया? 

बदरा छाए जब गगन में ,चाँद  जाने कहाँ खो गया ? 

मैं जो निद्रा में डूबी ,चाँद जाने कहाँ खो गया ? 

मैं जो सपनों में खोयी ,चाँद जाने कहाँ खो गया ? 

 

दिन निकलता रहा ,शाम ढलती रही ,

चाँद का हमको, कुछ भी  पता ना चला ,

ढूँढा किए हम उसे ,आसमां में सारा दिन ,

मगर अपना चाँद तो ,जाने कहाँ खो गया ? 

 

रात गहराती गई ,तारे टिम - टिम किए ,

रोज़ सपनों की ,दुनिया बदलती रही ,

सपनों में तो ,चाँद आता था रोज ,

जगते में चाँद की ,रंगत बदलती रही  | 

 

गायब रहता था चाँद ,दिखाई ना देता ,

गगना के माथे का टीका ,घूँघट में छिपा रहता ,

बदरा ऊपर गगन में ,फैले रहते थे रोज ,

पवना के संग खेलते - खेलते ,

चाँद को अपने घर में छिपाते थे रोज | 

 

क्या करें ,कहाँ ढूँढें ? हम अपने चाँद को ,

तुमने भी तो देखा होगा दोस्तों ,हमारे चाँद को ,

कोई हमको बता दे ,चाँद जाने कहाँ खो गया ? 

आओ संग हमारे दोस्तों ,ढुंढवाओ चाँद को दोस्तों | 

 

 

GALIYAN LAHARON KI ( GEET )

   गलियाँ लहरों की 


चंचल लहरें उछल - उछल कर ,

शोर मचाकर ,पहुँचीं मेरे पास ,

भीग गया मेरा तो तन -मन ,

पहुँच के उनके पास |


दाएँ -बाएँ खड़े थे जो ,सूखे -सूखे थे वो ,

नहीं था उनके कपड़ों पे,पानी का एक छींटा,

पर मैं भीगी थी इतना ,मन -तन सब ही भीगा |


लहरों में एक गीत था ,गीत में संगीत था ,

तन मन को मेरे उन ,लहरों ने थिरकाया ,

गलियाँ थीं वो कैसी ,जहाँ पे मुझको ,

लहरों ने नाच नचाया |


गलियाँ भीगी-भीगी सी,भरीं थीं फिसलन से,

नाच उठा था मन मेरा,संगीत की हर धड़कन पे,

यारों वो लहरों का साथ ,वो बजता संगीत ,

उन गलियों में लगे गूँजने ,प्यार के लाखों गीत |

Monday, October 26, 2020

EISI EK LADAKI ( JIVAN )

            ऐसी एक लड़की 


मुस्कान सी एक लड़की ,चेहरे वो सबके खिलाए ,

चमक चाँदनी सी ,मुस्कान बाँट जाए ,

ठहाकों की दुनिया में ,सबको वो ले जाए |


जिंदगी सी एक लड़की ,जिंदादिली सिखाए ,

साँसों में सबकी बस के ,जिंदगी दे जाए |


फूलों सी एक लड़की ,खुश्बु बिखेर जाए ,

सभी की जिंदगी को ,खुश्बुओं से महका जाए |


लहरों सी एक लड़की ,कल -कल की धुन सुनाए ,

सागर के जैसी शांत ना वो ,चंचल लहर सी गाए |


धूप सी एक लड़की ,छन से खिड़की से आए ,

पूरे घर को हरदम ,रोशन वो कर जाए |


यह सभी गुण ,उसी लड़की में समाए ,

वो लड़की मुस्काती हुई ,जीवन को खुश कर जाए |




CHANDA ---- 1 ( NAACH GAGAN ME )

 चंदा ----- 1   (  नाच गगन में    )

 

झीना सा पर्दा चाँद के ,मुख पर बदरा ने डाला ,

दुनिया ने कहा चाँद तो ,बादलों में छिप गया ,

पर्दे से भला कहाँ ,छिप सकती थी चाँदनी ? 

पर्दे को भेद कर वह ,दुनिया में फ़ैल गई | 

 

पवन  पर्दे को उड़ाया ,तो चाँद उजलाया ,

दुनिया मुस्काई कि ,चाँद निकल आया ,

चाँदनी की चमक ने ,दुनिया को चमकाया ,

दुनिया की मुस्कान देख ,चाँद भी मुस्काया | 

 

झीने -झीने से बदरा ने ,पवन को साथ मिलाया ,

पवन ने बदरा से मिल ,गगन में खेल दिखाया ,

चाँदनी ने भी खेल खेला ,दुनिया को उजलाया , 

सभी ने मिलकर इस सारी ,दुनिया को मुस्काया | 


चाँद ,चाँदनी ,बदरा ,पवन ,सब ही मिलकर खेले ,

तभी तारे गगन में छाए ,लेके मुस्कानों के मेले ,

सारे तारों ने मिलकर ,इन चारों को घेरा ,

टिम -टिम ,टिम -टिम करते ,तारों ने डाला डेरा | 

 

एक साथ फिर खेले सब ही,गगन साथ मुस्काया ,

उसने अपने आँगन में , सभी को साथ नचाया ,

साथ में गगन ने ,मधुर गीत गाया -------- ,

"टिम -टिम तारे आओ ,नाचो और गाओ ,

अपने साथ में तुम ,सारी दुनिया को नचाओ | "

Sunday, October 25, 2020

EK AHSAS MAHAL ME ( JIVAN )

    एक अहसास महल में  


आज दोस्तों तुम्हें सुनाएं,अपने सपनों की बातें,

आँखें खुलीं थीं जागे थे हम ,

महल में घूमने आए थे हम |


राजस्थान के महलों के बारे में बहुत पढ़ा था,

इसीलिए राजस्थान घूमने का नशा चढ़ा था ,

एक महल में जैसे ही अंदर प्रवेश पाया ,

तभी एक अहसास नया सा मैंने यूँ पाया ,

एक पालकी देखी मैंने ,उसमें मुझे बिठाया ,

उसे कहारों ने उठा कर महल में पहुँचाया ,

बजी दुदुंभी और नौबत तभी महल के अंदर ,

पर्दे से देखा मैंने चहल-पहल थी महल के अंदर|


नज़र गई दर्पण पर तो देखा,मैं हूँ सजी-धजी सी,

रानी जैसा रूप था मेरा ,वैसा ही श्रृंगार ,

मुस्कानों से सजी पालकी ,दिल में उठी हिलोर ,

मगर नहीं थी कोमल,सुंदर ही,साथ में थी तलवार |


तभी किसी ने मुझे पुकारा ,सपना टूटा मेरा ,

"चलो! भई अंदर,क्यों खड़ी -खड़ी मुस्कातीं "?

पति की थी आवाज ,लौटी आज की दुनिया में ,

मगर वो बरसों पुराना अहसास ,

आज भी है मेरे दिल की थाती |


क्या जन्मों -जन्मों का चक्कर है ?

क्या पहला कोई जन्म था ?

क्या ये फ़्लैश बैक था ?

मगर दोस्तों जो भी मैंने देखा ,

जो अहसास मैंने पाया ,

मुझे तो बड़ा मज़ा आया ,

आज भी वो अहसास बाकि है |





RAAVAN NE POOCHHAA ( SAMAJIK )

 

                   रावण ने पूछा


आज फिर क्यों आ गए ,मुझको जलाने तुम ?

आज फिर क्यों लेकर मशाल ,आ गए हो तुम ?

क्या किया  है मैंने बोलो मैं?

बहिन के अपमान का बदला लिया मैंने ,

सीता का हरण जरूर ही किया मैंने |


मगर क्या मैं उसको अपने घर लाया ?

क्या छुआ मैंने उसे ,क्या उसको सताया ?

मंदोदरी के साथ ही तो ,

मैं मिला जानकी को अशोक वाटिका में |


व्यवहार भी शालीन था मेरा ,

शब्द भी शालीन थे ,

मैं तो बहिन के अपमान के ,

बदले में तल्लीन था |


युद्ध से पहले यज्ञ में ,राम ने बुलवा लिया ,

यज्ञ करवा कर मैंने ,कर्त्तव्य अपना पूरा किया ,

विजयी भव का आशीष भी ,मैंने राम को दिया |


मेरे अंतिम समय में राम ने ,

लक्ष्मण को भेजा पास मेरे ,

मेरे राजनीतिक ज्ञान को लेने ,

वो भी सब दिया मैंने ,

जो भी था पास मेरे | 


फिर भी तुम मेरा पुतला ,

हर साल जलाते हो क्यों ?

क्यों नहीं मिटाते उन लोगों को ?

जो हर दिन अपमान करते ,एक नई सीता का ,

उन्हें मिटाओ ,मेरा अपमान करना बंद करो ,

मुझे बदनाम करना बंद करो ,

मेरा पुतला जलाना बंद करो |


मेरे नाम को उजियाओ ,

रावण ने नारी का अपमान ,

कभी नहीं किया और ना कभी सोचा |






SAPANE SUHANE ( SMALL POEM )

    सपने  सुहाने 


सपने सुहाने लड़कपन के ,

आज हैं बच्चों के बचपन में ,

कुछ हैं पूरे ,कुछ हैं अधूरे ,

सपने  जो देखे नैनन ने |


रात जो आए इंतज़ार जगाए ,

नयन हमारे नींद को बुलाएं ,

नींद हमारी नया द्वार खोले ,

और सपनों को अंदर बुलाए |


सपनों की दुनिया है अनूठी ,

कुछ है सच्ची कुछ जादू की ,

जादू कैसा मैं न जानूं ,

ना समझूँ भाषा सपनों की |


दूर अजनबी जगह दिखाएं ,

नई जगह की सैर कराएँ ,

ऐसे सपने हमको आएँ ,

निद्रा में ही हमें सुलाएँ |


सपनों में ही मन जो चाहे ,

जिन राहों पे चलना चाहे ,

जिन कामों को करना चाहे ,

वही तो सपने हमसे करवाएं |





Friday, October 23, 2020

SADAKEN MUMBAI KI ( GEET )

   सड़कें मुंबई की 


ये हैं सड़कें मुंबई की ,

कोई सड़क चिकनी है ,

फिसल जाएं जो भीगी हो ,

कोई सड़क मुड़ती है ऐसे ,

मानो पेड़ों की हों डालियाँ ,देखो तो ज़रा |


कुछ सड़कें गड्ढों वाली ,

गड्ढों में हैं सड़कें या ,

सडकों में हैं गड्ढे ,बताओ तो ज़रा |


गड्ढों वाली सडकों पर ,

कारें बोलें धड़क -धड़क ,

ट्रेन की आवाज़ ली है कारों ने ,सुनो तो ज़रा |


धीरे चलना यारों ,तेज ना चलाना ,

कारों का पंक्चर हो ,फिर ना पछताना ,

कितना लगा समय फिर ,बताओ तो ज़रा |



Thursday, October 22, 2020

JAY MATA KI ( AADHYATMIK )

    जय माता की 


जय माँ ,जय माँ ,जय शेरावालिए ,

मेरे घर आओ ,जय शेरावालिए |


रोली का माथे तिलक लगाऊँ ,

फूलों का हार मैं तुमको पहनाऊँ ,

जय माँ ,जय माँ ------ |


पूजा की विधि मैं ना जानूँ ,

अनगढ़ की पूजा माँ स्वीकारो ,

जय माँ ,जय माँ ------ |


घी  के दीए की जोत जलाऊँ ,

आरती तेरी रज -रज गाऊँ ,

जय माँ ,जय माँ ------ |


हलवा ,चने का भोग लगाऊँ ,

पूरियाँ भी मैं संग खिलाऊँ ,

जय माँ ,जय माँ ------ |

Wednesday, October 21, 2020

BANDHAN PYAR KE ( JIVAN )

               बंधन प्यार के 


जिंदगी आगे बढ़ी ,रिश्ते नए जुड़ते गए ,

आगे बढ़ते कदमों से ,बंधन नए बंधते गए |


कुछ दोस्त नए बन गए,मगर पुराने तो वहीं थे,

कुछ रिश्ते नए बन गए,मगर पुराने तो वहीं थे,

कुछ बंधन नए बंध गए,मगर पुराने तो वहीं थे | 


बच्चे बड़े हुए ,शादीशुदा हुए ,

खूब ही रिश्ते जुड़े ,नए -नए बंधन बंधे ,

नया जुड़ता है तो ,पुराने वहीं रहते हैं ,

टूटते नहीं हैं ,श्रृंखला को और बड़ी करते हैं |


प्यार के हैं सारे रिश्ते ,प्रेम के हैं सारे बंधन ,

सबसे प्यारा ,सबसे सुंदर ,

उस परमात्मा से है बंधन ,

वो है अलौकिक ,बाकि हैं लौकिक ,

सभी को निभाना ,हमारी जिम्मेदारी ,

सभी में हो हमारी भागीदारी |

Tuesday, October 20, 2020

MAN BAVARA ( GEET )

      मन बावरा 


मन बावरा ढूँढे यहाँ ,

खुशियों के फूल खिलते यहाँ ,

आशाओं का रंग बिखरे जहाँ , मन बावरा --|


प्यार ही प्यार बसा हो जहाँ ,

मीठे से बोल चहकें जहाँ ,

उम्मीदों के आशियाने बने हों जहाँ ,मन बावरा--|


मेरे दिल के अंदर झाँको जरा तुम ,

प्यार से लबालब है दिल का जहां ,

तुम भी पाओगे प्यार ही जहाँ ,मन बावरा ---|


जीवन में मुस्कानें खिलतीं जहाँ ,

ठहाकों में वो तो बदलतीं जहाँ ,

ढेरों कलियाँ चटखतीं जहाँ ,मन बावरा ---|


दीपों से राहें उजियाती जहाँ ,

कदमों की आहटें भी रिझाती जहाँ ,

इंतज़ार भी मीठा लगता जहाँ ,मन बावरा --|


सपने सभी के सच हों जहाँ ,

दोस्तों का लगे झुरमुट जहाँ ,

ठंडी बयार करे कुछ बयां ,मन बावरा ---|




 

Monday, October 19, 2020

YE YAADEN

        ये यादें 


" भूली - बिसरी यादें मेरे ,

हँसते गाते बचपन की ",

आतीं हैं ये यादें मेरे ,

नींद चुराने नैनन की |


गुदगुदाती हैं ये यादें ,मेरे दिल को ,

छेड़ जातीं हैं ये यादें ,मेरे दिल को |


मुस्कराहट की वजह होती हैं ,ये यादें ,

गुनगुनाने की वजह होती हैं ,ये यादें ,

कदमों में गति भर देतीं हैं ,ये यादें ,

उड़ने को मजबूर कर देती हैं ,ये यादें ,

रुनझुन पायल सी बज उठतीं हैं ,ये यादें ,

जब बचपन के पिटारे से ,

निकल आतीं हैं ये यादें |



 

Sunday, October 18, 2020

PARCHHAIN (GEET )

    परछाईं 


जिस माँ ने जन्म दिया ,जिस माँ ने हमें पाला ,

उनको है नमन हमेशा ,जिस ने दिया उजाला |


चलना सिखाया ,बोलना सिखाया ,

पढ़ना और लिखना सिखाया ,

जीवन में आगे बढ़ना सिखाया ,

सबसे प्यार करना सिखाया ,उनको है ----|


मिला है प्यार हमेशा उनका ,

जीवन की हर राहों पर ,

ऐसी माँ को प्यार हमेशा ,

करेंगे हम जीवन भर ,उनको है ----|


अब हैं हम दूर उनसे ,

फिर भी दिल तो पास हैं ,

उनका दिया आशीर्वाद तो ,

आज भी अपने साथ है ,उनको है ----|


जो कुछ है दिया उन्होंने ,

हमने बच्चों में बाँटा ,

और कुछ नहीं हैं हम ,

हम तो माँ की परछाईं हैं ,उनको है ----|





NINDIYA MAIN ( GEET )

     निंदिया  में

  निंदिया में तुम डूब के बच्चों ,
   मीठे सपनों में खो जाओ ,  निंदिया में ---

   मत देखो चाँद की धरती को ,
   सूखी नदियों और मिट्टी को ,
   चन्दा पर बसे परी - लोक को ,
   ढूँढो और उसमें खो जाओ ,  निंदिया में --

   नन्हीं - नन्हीं परियाँ उसमें ,
   नए - नए खेल खिलाएँगी ,
   हाथ पकड़ उन परियों का ,
   गगन में  भी तुम उड़ पाओ , निंदिया में ---

   हर रंग के फूल खिले होंगे ,
   खुशबू से भरे चमन होंगे ,
   तुम भी उन फूलों जैसा ,
   गुलशन अपना महकाओ , निंदिया में ---

   चन्दा की चमक निराली है ,
   धवल चाँदनी  आली  है ,
  साथ में तुम नन्हें बच्चे ,
  तारों के झुरमुट छू आओ , निंदिया  में ----



 

Friday, October 16, 2020

JAADUI GHADI ( SMALL POEM )

                  जादुई घड़ी 


एक घड़ी है मेरे पास ,बंधु है वो बिल्कुल खास ,

हर घंटे वो हँसती जाए ,कभी ना दिखती मुझे उदास |


अपने साथ सब को हँसाए,मुस्कानों के फूल खिलाए,

घर भर में खुश्बू महकाए ,बच्चे भी तो खिलखिलाएं |


चेहरा उसका बड़ा अनूठा ,देखो तुम तो कहोगे चंदा ,

साथ में आए हैं दो तारे ,मुस्काता है मंदा -मंदा |


बच्चे कहते जादुई घड़ी ,समय बताती और मुस्काती ,

हम को वो खुश कर जाती,ऐसी जादुई छड़ी घुमाती|

Thursday, October 15, 2020

SANDALI KHUSHBU ( GEET )

                 संदली खुश्बु 


भोली -भाली प्यारी सी ,मेरी राजकुमारी सी ,

बोली ऐसी कोयल कूके,संदल सी फूलों में महके|


नन्हीं सी वो मटके चटके,गले में मेरे जब वो लटके,

मुस्कानों का वो भंडार ,मिलती हैं यूँ ख़ुशी हजार |


परी है वो तो सारे घर की,सारे घर में उड़ती फिरती,

हमें मिली है ऐसी माया ,घर में खुशियों की है छाया |


छोटे -छोटे खेल खिलाए,घर में सबको वही सिखाए,

सबकी हुई साकार कल्पना,रंगों से जब सजी अल्पना|


अंश ॐ के पाए उसने ,घर में अरविंद खिलाए उसने ,

खिलती ऐसे चमन के फूल ,संदल सी महके है धूल |

ASTRONAUT (JIVAN )

         एस्ट्रोनॉट 


धरती के आकाश में दिखते ,

जगमग करते करोड़ों तारे ,

ये तारे सब सूरज जैसे ,

इन सब तारों का भी तो ,

सूरज जैसा सोलर सिस्टम होगा ,

हर सोलर सिस्टम में ही ,

एक ग्रह तो ऐसा होगा ,

जिस पर पृथ्वी जैसा जीवन होगा ,

मानव जैसा प्राणी भी होगा |


कितना विकास होगा उस ग्रह पर ?

क्या होगा पृथ्वी जैसा या पृथ्वी से कम ? 

या होगा पृथ्वी से बहुत अधिक ?

ना जाने कोई ,ना जानें हम ,

हमसे आगे जाने वाले प्राणी ,

जब हमें मिलेंगे तो क्या बोलेंगे ?

हिंदी ,इंग्लिश ,तमिल ,तेलुगु या चीनी ,

और ना जाने कौन सी भाषा ? 


भाषाएँ जब अलग -अलग हों ,

एक ही भाषा सब को आती ,

इशारों और मुस्कराहट की ,

प्यार की और दुलार की ,

किसी भी ग्रह पर रहता कोई ,

मुस्कान सभी की खिलती होगी | 


सोचो कितने हैं ग्रह ऐसे ,

जिनपे जीवन खिलता होगा ,

वो प्राणी आएं पृथ्वी पर ,

तो वो एस्ट्रोनॉट कहलाएँगे ,

हम भी एस्ट्रोनॉट बनेंगे ,

जब उस ग्रह पर जाएँगे ,

वहाँ के रहने वाले हमको एस्ट्रोनॉट बुलाएँगे |





 

Tuesday, October 13, 2020

PED HAMARE ( GEET )

  पेड़ हमारे 


पेड़ों के हैं भिन्न प्रकार ,

लाभ हमें देते हजार ,

नीम ,पीपलऔर बरगद ,

अलग -अलग हैं इनके लाभ |


नीम के हर एक अंग में ,

प्रकृति ने दिया दवा  का रूप,

नहीं पेड़ कोई इसके जैसा ,

जिसका हो ऐसा स्वरूप |


बरगद ,पीपल छाया हैं देते ,

वर्षों तक हैं जीवित रहते ,

लंबा इनका जीवन काल ,

मजबूती की हैं ये मिसाल |


अनगिनत हैं पेड़ हमारे ,

जो हैं गुणों के भंडारे ,

क्या -क्या उनके हम गुण गाएँ ,

बस हम उनको शीश नवाएँ |


नहीं जानते धरा पे हमारी ,

किस पेड़ की थी पहली बारी ?

हम तो जानें बनें दोस्त सब ही,

आए पेड़ धरा पर संग ही |

 

Monday, October 12, 2020

AAYA SAAWAN ( PREM )

             आया सावन 


रिमझिम गिरे सावन ,मचल -मचल जाए मन ,

कैसे मनाऊँ मैं सावन ,साथ में नहीं हैं साजन?


सखियाँ सब झूला झूलतीं,हैं पास जिनके साजन,

मैं कैसे झूला झूलूँ ,जब दूर बसे हैं साजन ?


अंबुआ पे कोयल कूकती ,

सखियाँ जब झूला झूलें ,

मैं बगिया द्वार खड़ी हो ,

राहें साजन की तकती |


राहें हैं सूनी दूर तक ,कोई नहीं निशान ,

इतना नहीं मैं जानती,आएँगे कब साजन?


समय बीतता जा रहा ,

सखियाँ मुझे बुला रहीं ,

साथ - साथ ही साजन को ,

साँसें मेरी बुला रहीं |


दिन यूँ ही बीत चला ,

बदरा घन - घन गरज रहे ,

साजन ऐसे मौसम में ,

तुम कहाँ जा बसे ?


अगली सुबह जब आई ,

द्वार की घंटी बजी अचानक ,

द्वार खोल कर देखा जब मैने,

पाई मैंने ख़ुशी अचानक |


द्वार खड़े थे मेरे साजन ,

तभी अचानक बादल गरजे ,

मैं थी साजन की बाहों में ,

तभी मनाया हमने सावन |

Sunday, October 11, 2020

LUKAA - CHHIPI ( SMALL POEM )

     लुका-छिपी     


बचपन के वो मेले ,

आओ लुका -छिपी खेलें ,

तुम छिप जाओ कहीं सहेली ,

मेरी डैन है आई ,

तुम्हें छिपी हुई को अब तो ,

मैं ढूँढूँगी भाई |


यहाँ -वहाँ है ढूँढा मैंने ,

कहाँ छिपी हो ,कहाँ छिपी हो ?

फ्रॉक तुम्हारा दिखा है मुझको ,

ढूँढ लिया है मैंने तुमको ,

अब तो मेरी प्यारी सखि ,

तुम्हारी डैन है आई |


छिपने का स्थान मिला है ,

ढूँढ नहीं पाओगी तुम तो ,

ढूँढ रही हो सभी जगह पर ,

पर मैं ना मिल पाई ,

परेशान मत हो सखि मेरी ,

खुद ही मैं निकल आई ,

लुका - छिपी के खेल में सहेली ,

जीत ही मैंने पाई ,जीत ही मैंने पाई |

Saturday, October 10, 2020

JAANE KAHAN GAE ? (GEET )

    जाने कहाँ गए ?


कहाँ गईं वो सुनहरी आवाज़ें ,

जो दिल के तार छेड़ जातीं थीं ,

प्यार की दुनिया में हमको ले जातीं थीं ,

मदहोश कर जाती थीं |


" चौदहवीं का चाँद हो ,"

" बहारों फूल बरसाओ ,"

जैसे गीतों ने हमको गुदगुदाया ,

लगा जैसे मेरे लिए ही गाया |


" मेरे सपनों की रानी कब ,"

" ये शाम मस्तानी ,"

ने किया हमको दीवानी ,

कहाँ गई वो आवाज़ सुहानी ?


" ऐ - मेरी ज़ोहरा ज़बीं ,"

" लागा चुनरी में दाग ,"

सुनते लगता हम खो गए ,

गाने वाले की आवाज़ में गुम हो गए |


इन आवाज़ों के मालिक ,

दुनिया से हुए लापता ,

कोई ढूँढे तो दोस्तों ,

उनको बुलाने का रास्ता |




TAARIKH (MUKTAK )

 

       तारीख 

 

तारीख आज की याद रहे ,

05 /06 /2021 ,

कभी नहीं आएगी  फिर से ,

05 /06 /2021 |


भिन्न - भिन्न तारीखें आतीं ,

नए -नए दिन को दर्शातीं ,

दिन ,महीने ,वर्ष बदलते ,

मगर सूर्य ,चंद्रमा वही रहते |


कभी संजोग ऐसा ही आता ,

जो चेहरे पर मुस्कान जगाता ,

आओ हम भी कुछ कर जाएं ,

सबके चेहरे पर मुस्कान जगाएं |

 

तारीख एक हम लिख जाएँ ,

याद रखे फिर हमें जमाना ,

सबकी मुस्कानों  में हम हों ,

सबके दिलों को हम धड़काएँ | 

 

Thursday, October 8, 2020

PRAARTHANA ( GEET )

         प्रार्थना 


कैसे जग ये हुआ निढाल ?

किससे पूछें हम ये सवाल ?


ईश्वर सब कुछ देख रहा ,

मानव ने जो किया बवाल ,

मानव को था दिया सभी ,

पेड़ - पौधे ,धरती और ताल ,

फिर भी मानव ने किया बवाल |


प्रार्थना हमारी प्रकृति तुमसे ,

कर दो ख़त्म  ये सब बवाल ,

माफ़ करो मानव को तुम ,

तुम ही तो दूर कर सकती ,

मानव के मन का जंजाल |


दंड हो गया बहुत प्रकृति ,

कृपया अब इसे दूर करो ,

मानव को सद्बुद्धि दे कर ,

अब तो उसे कृतार्थ करो ,

अब तो उसे कृतार्थ करो |

JEET KAISI ? ( JIVAN )

                      जीत  कैसी ?


खेल हुआ है दो टीमों में ,हार जीत किसकी होगी ?

एक टीम माँ -बापू की ,दूजी बच्चों की होगी |


माँ -बापू ना चाहें बिल्कुल ,बच्चे हारें उनसे ,

वो तो चाहें यही हमेशा ,बच्चे जीतें उनसे |


वही जीत तो माँ -बापू की ,बच्चों से वो हारें ,

आगे बढ़ जाएं बच्चे उनसे ,माँ -बापू उनसे पीछे |


ऐसा जग में कोई ना चाहे ,सब चाहें हैं जीत ,

सिर्फ माँ -बापू हैं ऐसे ,जो चाहें अपनी हार |


ऐसा खेल चलता है बंधु ,अपने ही परिवार में ,

खुश हो जाते माँ -बापू ,देखो अपनी हार में |

Wednesday, October 7, 2020

DUNIYA CHIDIYA KI ( GEET )

  दुनिया चिड़िया की 


नन्हीं सी चिड़िया रानी ,

कहाँ चलीं भई कहाँ चलीं ?

मेरे घर में आओ ना ,

दाना ,चुग्गा खाओ ना ,

पानी पी आराम करो ,

घोंसला यहीं बनाओ ना |


ये छोटी सी खिड़की मेरी ,

हवा ,धूप सब आएगी ,

तिनके ,कतरन पास में ही तो ,

सभी इकट्ठे किए हैं मैंने ,

इन सबसे तुम नया घोंसला ,

खिड़की में बनाओ ना |


मेरा राजा बेटा है ,

मेरी गुड़िया रानी है ,

दोनों को तुम मीठे गीत ,

गा कर सुनाओ ना ,

उड़ - उड़ कर तुम उनको ,

अपने खेल दिखाओ ना |


दोनों तुमको प्यार हैं करते ,

तुको देख -देख खुश होते ,

तालियाँ खूब बजाएँगे ,

तुमको खुश कर जाएँगे ,

तुम भी उन दोनों पर ,

अपना प्यार बरसाओ ना ,

घोंसला यहीं बनाओ ना |

 

Tuesday, October 6, 2020

JAA DOOO ( GEET )

                   जादू 


किसी की बातों में जादू ,किसी के नयनों में जादू ,

किसी के हाथों में जादू ,किसी के लेखन में जादू | 


हर ओर जादू बिखरा है ,हर एक ने समेटा है ,

जो जिसको पसंद आया ,जिसके नसीब ने पाया |


जादूगर है ऊपर वाला ,जिसने जादू बिखराया ,

जिसने सभी जीवों का, जैसा नसीब बनाया |


जिसके हिस्से जो जादू आया,उसने यहाँ बिखराया,

उसी जादू से तो उसने ,अपना जीवन चमकाया |


तभी तो किसी ने मधुर गीत लिखे ,

किसी के स्वर ने उसे गुंजाया है ----

"गोरी तोरे नैना हैं जादू भरे ,"

और " जादू तेरी नज़र "|

Sunday, October 4, 2020

YE DOSTI HAM NAHIN TODENGE

    ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे 


सबसे प्यारा रिश्ता जग में ,दोस्ती का ,

सबसे न्यारा रिश्ता जग में ,दोस्ती का |


नहीं लहू का ,नहीं रिश्तों का ,

बंधन है हमारे साथ में ,

नहीं उम्मीद रखते किसी से ,

फिर भी वो खड़े हैं साथ में |


प्यार असीम है आपस में ,

जान छिड़कते आपस में ,

जीवन में सुख -दुःख के साथी ,

दोस्त ही तो बने मगर |


पहले साथ - साथ थे रहते ,

अब हैं दूर - दूर बसते ,

मगर अभी भी खुले हैं अपने ,

प्यार भरे वो सब रस्ते |


नहीं टूटेगी ,सदा रहेगी ,

ये अपनी दोस्ती बंधु ,

प्यार नाम है अमर इस जग में ,

इसी से दोस्ती है अमर बंधु |


चलो अभी गुनगुना लेते हैं ---

" ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे " |

Saturday, October 3, 2020

PYAR KA DARD ( PREM )

            प्यार का दर्द 


इस नीले गगना तले ,प्यार का दर्द पले |


दुनिया बनाने वाले ने ,प्यार के फूल खिलाए ,

साथ में उन फूलों के ,काँटे भी थे लगाए |


प्रेम,प्यार की राहों को,ऊबड़-खाबड़ बनाया,

उन राहों के आगे, no entry का बोर्ड लगाया |


कुछ राही तो फिर भी,जाते उन्हीं राहों पर ,

कैसे रह पाएँगे वो ,जब जाएँगे ना उधर ?


उन राहों पर चलकर,और प्यार को अपनाकर,

वो दर्द सहन करते हैं,किसी के प्यार में डूबकर |


वो रही हैं मतवाले ,वो हैं भी हिम्मतवाले ,

तभी तो खोलें हैं , no entry के ताले |


पर दर्द में जब पड़ते हैं ,उसको सहन करते हैं ,

तब वही रही हरदम ,रचेता को याद करते हैं |

Wednesday, September 30, 2020

PREM KAHAANII ( PREM )

     प्रेम  कहानी


उनकी आँखों की भूलभुलैयाँ में ,

रस्ता हम तो भूल गए जी ,

चक्रव्यूह अभिमन्यु वाला ,

हम तो उसमें फँस गए जी |


प्यार के सागर में हम डूबे ,

अब तक उबार ना पाए जी ,

खेवैया तो मिला नहीं है ,

कौन पार लगाए जी ?


प्यार की बगिया खिलती जाए ,

जीवन यूँ ही बीते जी ,

खुशियों के ये फव्वारे ,

इसी तरह से छूटें जी |


कह दी हमने प्रेम कहानी ,

आप सभी ने सुन ली जी ,

जीवन बीता जैसे अब तक ,

आगे भी अब बीते जी |




JINDGI KI CHHANV TALE

    जिंदगी की छाँव तले 


जिंदगी की छाँव तले ,जब हम तुमसे मिले ,

             प्यार के तब फूल खिले |


जिंदगी तब मुस्काई,प्यार की बज उठी शहनाई,

              गूँज उठी सारी अँगनाई |


रुक गया समय वहीं ,साज बज उठे वहीं ,

               गीत सज उठे वहीं |


रंग भी बिखर गए ,जीवन को रंगीं कर गए ,

               इंद्रधनुष कर गए |

 

Monday, September 28, 2020

PYAARE SAPNE ( KSHANIKA )

       प्यारे  सपने 


नींद में आते हैं रोज़ सपने ,

वो सपने जो हैं मेरे अपने ,

मीठे सपने ,कुछ खट्टे सपने ,

प्यारे सपने ,दुलारे सपने | 


सुबह हुई ,नींद खुली ,तो गुमे सपने ,

कुछ याद रहते ,कुछ भूले सपने ,

ढूँढे कोई कैसे उन्हें ?

जो गुमे सपने |


कुछ सपने जागते हुए ,

खुली आँखों से देखे सपने ,

कुछ पूरे हुए ,कुछ बचे सपने ,

कैसे करें हम वो पूरे सपने ?

 

चलो छोड़ो सभी तो थे अपने ,

नन्हें - मुन्ने ,प्यारे -प्यारे सपने |

 

GHADI ( MUKTAK )

             घड़ी 


मेरी घड़ी टिक -टिक करती ,

टिक -टिक करती समय बताती ,

सदा चले ये कभी ना रुके ,

समय हो जैसा सभी बताए ,

प्यारी है ये ,न्यारी है ये | 


Sunday, September 27, 2020

GAVAAHI KAUN DEGAA ( MURDER MISTRI )

     गवाही कौन देगा ?


अरमान हों या सपने ,दोनों तो होते अपने ,

उनके क़त्ल की गवाही ,कौन देगा ?


दिल गवाह अरमानों के क़त्ल का ,

मगर ज़ुबां न होती दिल की ,

कैसे देगा वो गवाही क़त्ल की ?


नींद गवाह सपनों के क़त्ल की ,

मगर नींद तो सोयी हुई है ,

कैसे देगी वो गवाही क़त्ल की ?


जब गवाह नहीं ,सबूत नहीं ,

कैसे कातिल मिलेगा ?

कैसे सजा मिलेगी ?

Saturday, September 26, 2020

CHHUKK- CHHUKK - CHHUKK ( GEET )

     छुक - छुक -छुक


कोरोना की रेलगाड़ी चली ,छुक -छुक -छुक ,

बीच के चौराहे बोलें ,रुक -रुक -रुक |


गाड़ी ऐसी जाए ,बीमारी फैलाए ,

तभी तो सभी ,घरों में गए ,छुप -छुप -छुप |


ये गाड़ी तो ऐसी ,दुनिया भर में जाए ,

अपनी ये बीमारी ,सब में फैलाए ,

ये बीमारी बनी महामारी ,

ना कोई बचाव ,ना कोई इलाज़ ,

कैसे इसको कहें हम ,रुक -रुक -रुक |


कोई तो ऐसा बम बनाओ ,

इस रेलगाड़ी को मिटाओ ,

जीवन की गाड़ी को चलाओ ,

तभी तो जिंदगी होगी ,खुश -खुश -खुश |

Friday, September 25, 2020

SABSE PYAR KARATE HAIN HAM ( PREM KATHA )

              सबसे करते हैं प्यार हम 

 

प्यार जिंदगी ,प्यार हर ख़ुशी ,प्यार ही तो साँस है ,

प्यार में बसा हर रिश्ता ,प्यार ही तो हर आस है | 

 

प्यार ही परिवार,प्यार ही मुस्कान ,प्यार वार ,त्योहार है ,

प्यार पे टिकी जिंदगी है ,ये जीवन का आधार है | 

 

 डूबकर हरेक जीव ,बिताता अपनी जिंदगी ,

प्यार से ही तो हम ,करते अपनी बंदगी | 

 

प्यार धूप है ,प्यार चाँदनी ,प्यार ही तो साया है ,

जीवन की तपती धूप में ,प्यार ही तो छाया है | 

 

वही प्यार हम सबसे करते ,दुनिया में मानव मात्र से ,

हम तो चाहें ,सुखमय सबको ,करदें प्यार के पात्र से |

UNSULJHI MURDER MISTRI (MURDER MISTRI )

 

अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री 


थे मेरे भी कुछ अरमान ,

थे मेरे भी कुछ सपने ,

जिनको पूरा करने की ,

खूब की कोशिश हमने |


कुछ पूरे हुए अरमान ,

कुछ पूरे हुए सपने ,

बाकि के नहीं हुए पूरे ,

टूटे वो अरमान ,टूटे वो सपने |


किसने वो तोड़े अरमान ?

किसने वो तोड़े सपने ?

किसने उनका खून किया ?

किसने उनका क़त्ल किया ?


जाकर पता लगाए कौन ?

सभी खड़े हैं देखो मौन ,

नहीं सबूत है कोई भी ,

नहीं गवाह है कोई भी |


ये मर्डर मिस्ट्री यारों ,

रह जाएगी अनसुलझी ,

तुम ही कुछ कर पाओ तो ,

सच का पता लगाओ तो |

Wednesday, September 23, 2020

ANGOOTHI PYAR KI ( MANORANJAN KATHA )

  अँगूठी प्यार की 


गहने प्यारे नारी को ,

इसीलिए तो दोस्तों ,

वो गहनों से सजती है ,

मौका चाहे वो दिल से ,

सजने और सँवरने का ,

गहनों से यूँ सजने का |


सोना ,चाँदी ,हीरे ,मोती ,

सब ही उसको प्यारे हैं ,

उसकी आँखों के तारे हैं ,

गहनों में है एक अँगूठी ,

उसके कई प्रकार हैं |


एक अँगूठी सगाई की ,

एक अँगूठी प्यार की ,

सगाई वाली तो होगी दोस्तों ,

सोने की या हीरे की ,

चम -चम ,चम - चम करती सी |


मगर प्यार की होती है ,

सबसे अलग ,सबसे निराली ,

ये हो सकती है दोस्तों ,

फूल और तिनके से बनी ,

खुश्बु और रंगों से सजी ,

दिल के बहुत ही करीब ,

बना के देखो ,पहन के देखो ,

इस सबसे प्यारी अँगूठी को ,

ये अँगूठी प्यार की ,

प्यार की ,मनुहार की |

Tuesday, September 22, 2020

TOPI KA MIZAZ (SHORT STORY )

    टोपी  का मिज़ाज 


टोपी सबके सिर पर सजती ,सिर को ढक कर ठंडा रखती ,

मौसम बदले पर टोपी ना बदले ,वो तो सिर्फ मिज़ाज बदलती | 


भिन्न -भिन्न आकर की टोपी ,भिन्न -भिन्न नामों की टोपी ,

एक बनी जवाहर टोपी ,तो दूजी है ,बच्चों की टोपी | 


बच्चे टोपी पहन थिरकते ,दर्पण में खुश हो देखते ,

उनको अच्छी लगती टोपी ,सुंदर से आकार की टोपी | 


फिल्में भी ना इससे अछूतीं ,वो टोपी के टॉपिक को छूतीं ,

जैसे ---- " तिरछी टोपी वाले ,बाबू भोले -भाले ,"

और ---- " ऐ मेरी टोपी किधर चली " |

UNKI BACHCHI ( SHORT STORY )

  उनकी  बच्ची 


सुनते हुए किलकारियाँ ,घरों में सभी के ,

मायूस वो हो जाते थे ,सोच में पड़ जाते थे ,

ईश्वर ने हमें इस सुख से ,वंचित क्यों रखा ?


फिर डॉक्टर ने सुझाया ,एक रास्ता दिखाया ,

नहीं मायूस हो जाओ तुम ,

खुशियाँ मिल जाएँगी ,तुम्हें भी और उसे भी ,

गर उसे अपनाओ तुम |


उसे ? किसे ? वो हैरान थे ,

प्रश्न उनके चेहरे पर था ,तभी डॉक्टर बोली ,

एक एक्सीडेंट में ,एक बच्ची क छोड़कर ,

सभी परिवार जन स्वर्गवासी हो गए ,

बच्ची है सिर्फ दो माह की ,

तुम उसे अपनाओ ,खुशियों को बढ़ाओ ,

सुन सारी बात दोनों खिल उठे |


बच्ची घर लाए ,मानो रोशनी लाए ,

कागज़ी कार्यवाही ,दत्तक पुत्री ,

माता -पिता बनकर ,

खुशियों का आर ना पार था ,

दोनों हुए व्यस्त ,पुत्री के साथ व्यस्त ,

अब तो जिंदगी हुई मस्त |


उनकी भी संतान है ,

खुशियों की खदान है ,

उनके आँगन में भी ,

किलकारियों का गान है ,

भाग्य तू बलवान है |

 

Sunday, September 20, 2020

KANOON OR FAISLA ( SHORT STORY )

             कानून  और फैसला 


कानून बना ऊपर वाले का ,

सृष्टि रची उसने ऐसी ,

उसे रखी जाए वैसी ,

उसे ना कोई बर्बाद करे ,

रिश्तों में आबाद करे ,

नदियां सब ही साफ रहें ,

जल को ना बर्बाद करें ,

हवा शुद्ध रहे हरदम ,

पेड़ों को काटें ना हम ,

नए -नए वृक्ष उगाएं ,

और वायु को शुद्ध बनाएं | 


कानून नहीं हमने माना ,

ऊपर वाले को ना पहचाना ,

काटे पेड़ ,हवा अशुद्ध ,

जल को भी बर्बाद किया ,

प्रकृति से छेड़छाड़ करके ,

उसको हमने बर्बाद किया ,

ऊपर वाले ने किया फैसला ,

दिया दंड हम सब को ही ,

आज जो हम सब घर में बंद ,

यही है उसका हमको दंड |

OFFICE YA VIDYALAY ( SHORT STORY )

   ऑफिस या विद्यालय     


ऑफिस यानि कार्यालय ,दफ्तर हो या विद्यालय ,

प्यारा लगता है मुझको ,अपना ये दूजा आलय |


मैं तो इससे प्यार करूँ ,समय नहीं बर्बाद करूँ ,

बच्चों में रम जाती मैं ,उनमें ही खो जाती मैं |


बच्चे मेरे प्यारे हैं ,सारे जग से न्यारे हैं ,

कहना मेरा माने हैं ,मुझको खूब पहचानें  हैं |


करें पढ़ाई वो जी भर ,कभी करें शैतानी जो ,

और मैं चुप हो जाऊँ तो ,मुझको खूब हँसाएँ वो |


प्यार बहुत है आलय से ,प्यार बहुत विद्यालय से ,

कर्म की मैं पूजा करती ,कर्म से ना पीछे हटती |





Friday, September 18, 2020

MUKHAUTE ( SAAMAJIK )

 

         मुखौटे 


ओढ़ मुखौटे दुनिया भागे ,

एक - दूजे के पीछे ,

आगे वाले को खींचें  पीछे ,

ऊपर वाले को नीचे |


रंग बदलती जाए दुनिया ,

रंग बिखराए लाखों ,

इंद्रधनुष में रंग सात हैं ,

दुनिया  में हैं लाखों |


बोल अनोखे हैं दुनिया के ,

सामने - पीछे अलग -अलग ,

सामने बोलें मीठे -मीठे ,

पीछे से हैं कड़वे  - कड़वे  |


दुनिया के ये रंग हैं कैसे ?

कैसे हैं ये मुखौटे ?

एक के ऊपर एक चढ़ा है ,

गिन ना पाऊँ मुखौटे |

 

Thursday, September 17, 2020

AADHA - AADHA ( SHORT STORY )

     आधा  -  आधा 


पानी भरा गिलास में ,पूरा भरा गिलास ,

आधा मैंने पी लिया ,कितना भरा गिलास ? 

किसी ने कहा ,आधा खाली ,

किसी ने कहा ,आधा भरा ,

पर गिलास तो ,पूरा ही भरा था ,

आधे में पानी था ,तो आधे में हवा थी | 


मानव भी इसी प्रकार से ,अच्छाई ,बुराई का पुतला है ,

ना कोई पूरा अच्छा है ,और ना ही पूरा बुरा है | 


जिसे हम अच्छा मानते हैं ,उसमें भी थोड़ी बुराई है ,

जिसे हम बुरा कह जाते हैं ,उसमें भी थोड़ी अच्छाई है | 


अच्छे को हम कहते इंसान ,बुरे को कह देते शैतान ,

मगर दोनों ही तो होते हैं ,थोड़े इंसान , थोड़े शैतान | 


शैतान लगने वाले की ,थोड़ी अच्छाई बढ़ जाए ,

यूँ प्यार उसे हम दे दें तो ,अच्छा इंसान  बन जाए | 

 

SERIAL KILLER ( SHORT STORY )

   सीरियल किलर 


आज तो यारों ,कहें कहानी,

एक सीरियल किलर की ,

टॉपिक ऐसा मिला है हमको ,

प्रतिलिपि के खज़ाने से |


पहला अर्थ है इसका यारों ,

CEREAL यानि ,गेहूँ ,चावल ,मक्का आदि ,

को किल करने वाला ,

उसमें सबसे पहले आता ,बड़ा -सा टिड्डी दल ,

फिर हैं भिन्न -भिन्न कीड़े -मकोड़े |


दूसरा अर्थ है टी.वी. SERIALS के किलर ,

जिसको खलनायक कहते हम ,

कुछ खलनायक तो करें ना किल ,

मगर कुछ -कुछ तो किल करते |


तीसरा अर्थ है मानव रूप में ,

सीरियल किलर का ,

उनमें से कुछ अपने लिए ,

और कुछ पैसे के लिए ,

लगातार किल करते |


अब नंबर आता है यारों ,

एक नए सीरियल किलर का ,

कोरोना नामक वायरस का ,

जो मारता एक ही दिन में हजारों ,

लाखों मार चुका है अब तक ,

ना जाने कितने मारेगा ?


इस कोरोना को मारे कौन ?

ना मारे तीर ,ना तलवार ,

बचाए ना इससे कोई ढाल ,

ना मारे इसको कोई गोली ,ना ही बम ,

ना आए ये बदरा के वश में ,

ना सुखाए इसको सूरज की धूप |


शायद शिव का तांडव ही ,

इससे दुनिया को बचाए ,

आ जाओ शिव उतर कैलाश से ,

तांडव तुम ही मचाओ ,दुनिया को तुम ही ,

इस सीरियल किलर से बचाओ |

Tuesday, September 15, 2020

HAM DOOBE UNKI AANKHON ME (SHORT STORY )

 

  हम डूबे उनकीआँखों में 


नदिया में डूबे ,ना सागर में डूबे ,

हम जाकर डूबे , उनकी आँखों में |


डूबे तो डूबे , ऐसे डूबे ,

उभर ना पाए , उनकी आँखों में |


साँसें भी रुक गईं थीं ,

धड़कनें भी थम गईं थीं ,

डूब के मर गए हम ,उनकी आँखों में |


नया जन्म हुआ तभी ,

हमारी साँसों का , हमारी धड़कनों का ,

हमने नया सा जन्म लिया ,उनकी आँखों में |


ये नया जन्म था दोस्तों ,

उनको प्यार करने वाली प्रेमिका का ,

उनकी दीवानी आज की मीरा का ,

क्योंकि हम डूबे ,उनकी आँखों में |



 

Monday, September 14, 2020

TERE JAISA YAAR KAHAN ? ( SHORT STORY )

     तेरे जैसा यार कहाँ 


बात जब दोस्ती की है ,तो दोस्तों तक जाएगी ,

तभी तो रिश्तों का रंग ,जीवन में ये बिखराएगी|


एक दोस्त है मेरी ,बरस बहुत बीत गए ,

छोटे -छोटे से थे हम ,जब हम दोस्त बन गए |


साथ -साथ हम पढ़े ,खेले साथ -साथ हम ,

शादी के बाद अलग -अलग ,शहर में बसे थे हम |


मगर प्यार दोनों का ,नहीं हुआ कभी भी कम ,

मौका मिला जब भी ,मिलते -जुलते रहे हम |


आज हम दोनों के ही ,भरे -पूरे परिवार हैं ,

आज भी हम दोनों ही ,एक -दूजे के यार हैं |


उसके हसबैंड कहते हमें ,ये लँगोटिया यार हैं ,

उनके इस कमेंट पर हँसते ,हम दो यार हैं |


आगे भी सिलसिला यूँ ,ही जारी रहेगा दोनों का,

ईश्वर से दुआ है अपनी तो,जीवन यूँ ही बीते दोनों का |



 

DANCE CLASS ME DOSTI ( SHORT STORY )

   डांस क्लास में दोस्ती 


नृत्य क्लास में पहुँच के हमने ,

कदम ताल सीखी पहले दिन ,

उसका फिर अभ्यास किया ,

हमने तो पूरे दिन |


दूजे दिन फिर हाथ चलाए ,

हाथ और पैरों क मित्रों ,

तालमेल ना बैठा पाए ,

हाथ चलें तो पैर रुकें ,

और पैर चलें तो हाथ रुक जाएँ |


सखियाँ भी बन गईं वहाँ पर ,

वो भी हमारी जैसी मित्रों ,

उनके भी हाथ -पैरों की भाषा ,

अपने जैसी थी मित्रों |


कुछ -कुछ सीख रहे थे हम ,

कुछ -कुछ हम ना सीखे ,

टीचर से डाँट भी खाई ,

फिर भी थोड़ा ही सीखे |


सखियों संग मिलकर हम ,

अभ्यास नृत्य का करते ,

पर टीचर के सामने हमारे ,

हाथ ,पैर ना लय में चलते |


सीख गए फिर भी  मित्रों ,

हम थोड़ा -थोड़ा नृत्य ,

आज तो हम कर सकते मित्रों ,

मन -भावन सा नृत्य |

HINDI DIVAS

 

         हिंदी दिवस      


माता की भाषा है हिंदी ,

पिता का व्यवसाय है हिंदी ,

बच्चे का पहला कदम है हिंदी ,

नन्हीं का पहला बोल है हिंदी ,

स्कूल का पहला दिन है हिंदी ,

आगे बढ़ता कदम है हिंदी ,

कॉलेज में लिखा नाम है हिंदी ,

कॉलेज के बाद व्यवसाय है हिंदी ,

शादी और परिवार है हिंदी ,

बोल और व्यवहार है हिंदी ,

हम हैं हिंदी देश है हिंदी ,

मातृभाषा और राष्ट्रभाषा है हिंदी ,

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ |

Sunday, September 13, 2020

BAND ZUBAN ( PREM )

     

  बंद ज़ुबां

 

पहली मुलाकात थी वो ,या थी पहेली ,

वो आँखों का मिलना ,पलकों का झुकना ,

क्यों हमारी जुबां ,बंद हो गई थी ,

भाव जग गए थे और ,शब्द सो गए थे ,

ये सब क्या हुआ था ? बता तो -ए -सहेली| 


वो बादलों की छाँव ,ठंडी हवा के झोंके ,

सब कुछ तो साथ में था ,पर हम कहाँ पे खोए ? 

फूलों की खुश्बुएँ भी ,हमको नहीं हैं आतीं ,

ये किसका असर हम पर ?बता तो -ए -सहेली | 


चल छोड़ सब सहेली ,बूझ ये पहेली ,

दिल मेरा तो खो गया है ,किसी और का हो गया है ,

क्या वापस मिलेगा मुझको ?या हो रहेगा उसका ,

क्या एक मुलाकात में ,बेदिल मैं हो चुकी हूँ ? 

शर्म -ओ -हया का आँचल ,मैं ओढ़ चुकी हूँ |

 

Friday, September 11, 2020

RISHTA TUMSE ( JIVAN )

 

                      रिश्ता  तुमसे 


सबसे सुंदर ,सबसे पावन ,रिश्ता माँ बच्चों में ,

तभी सिर ईश्वर का भी ,झुक जाता माँ चरणों में |


माँ बच्चों की जननी बन ,अपना दूध पिलाती ,

बच्चों का पोषण करने में ,अपना समय बिताती |


हर इच्छा बच्चों की पूरी ,करने में जुट जाती ,

दुनिया की पैनी नज़रों से ,बच्चों को बचाती |


मीठी - मीठी नींद बुलाने ,माँ ही लोरी गाती ,

जरा सी खाँसी बच्चों की ,उसको सारी रात जगाती |


बच्चों के लिए हरेक माँ ,सपने खूब सँजोती ,

वो सपने पूरा करने में ,पूरी शक्ति खोती |


ऐसा रिश्ता और ना कोई ,दुनिया भर में मित्रों ,

पूजनीय है यह रिश्ता ,वंदनीय है मित्रों |

Thursday, September 10, 2020

DOST SABHI KA (SHORT STORY )

 

        दोस्त सभी का 


दोस्त अनेकों दुनिया में ,

कुछ पक्के ,कुछ कच्चे ,

उन्हीं दोस्तों में होते हैं ,

कुछ झूठे ,कुछ सच्चे |


कच्चे और झूठे की तो ,

पहचान नहीं है बंधु ,

क्योंकि वे ही तो सबसे ,

मीठे बोलें हैं बंधु |


मगर जो गलती पर टोके ,

हैं वे ही सच्चे दोस्त ,

मानव में ही नहीं ,

जानवर भी हैं सच्चे दोस्त |


कुत्ता सबसे वफ़ादार है ,

वो है सच्चा दोस्त ,

कभी नहीं वह तोड़ता ,

अपने दोस्त का ट्रस्ट |


पुलिस भी उसको मानती ,

अपना सच्चा दोस्त ,

करे भरोसा उसी पर ,

करे उसी का ट्रस्ट |

RAIN BASERA ( SHORT STORY )

     रैन बसेरा 


दुनिया है रैन बसेरा ,ना तेरा है ना मेरा ,

दुनिया है रैन बसेरा |


जन्म लिया जब तूने धरा पर ,

जीवन तेरा दौड़ा दुनिया में ,

पल -पल ,छिन -छिन बीत रहे ,

दुनिया है रैन बसेरा |


सब रिश्ते यहीं बने हैं ,

सब दोस्त यहीं मिले हैं ,

ये सब यहीं छूटेंगे ,

दुनिया है रैन बसेरा |


परिवार यहीं बने हैं ,

पैसा भी खूब मिला है ,

खुशियों में डूबा तू है ,

कल क्या होगा ?क्या जाने तू ?

दुनिया है रैन बसेरा |


सब बीत जाएगा यूँ ही ,

सब रीत जाएगा यूँ ही ,

कुछ कर्म तू अच्छे कर ले ,

वही साथ जाएगा तेरे ,

दुनिया है रैन बसेरा |


सबके दिलों में घर कर ले ,

सब पे प्यार लुटा ले ,

घर -द्वार और सारा धन ,

ना साथ जाएगा तेरे ,

साथ में यही प्यार जाएगा तेरे ,

दुनिया है रैन बसेरा |



Wednesday, September 9, 2020

GRAH BRAHMAND KA ( JIVAN )

     ग्रह ब्रह्मांड का 

 

रचेता ने जब ब्रह्मांड बनाया ,

छोटी -बड़ी गेंदों को बनाकर ,

स्वयं रचेता खेल करे | 

 

कुछ में उसने भरा प्रकाश ,

अलग -अलग उछाल दिया उनको ,

बाकि गेंदें ले लें प्रकाश ,

उनके इर्द -गिर्द घूमकर | 

 

कहीं -कहीं जीवन उपजाया ,

एक हमारी पृथ्वी मित्रों ,

अन्य ऐसी हैं कितनी पृथ्वियाँ ? 

उनको नहीं हम जानते ,

उनको नहीं पहचानते | 

 

अपनी पृथ्वी पर सब कुछ है ,

दिया रचेता ने भरपूर ,

मानव लाभ उठाता सबका ,

जीवन खुशियों से भरपूर | 

 

कभी अगर मानव बढ़ पाए ,

दूर ग्रह का पता लगाए ,

वहाँ अगर जीवन पनपा हो ,

वहाँ के रहने वालों को ,

अपना दोस्त बनाए ,

तभी तो रचेता भी मुस्काएगा | 

 

CHANDA -- 1 ( GEET }

   चंदा -- 1 

 

चंदा -ओ -चंदा घूमें क्यों ?

तू सारी -सारी रैना ,

किसने चुराया हमको बतादे ?

तेरे दिल का चैना |


सारा जग सोए ,मीठी सी नींद में ,

तू ही क्यों जागे चंदा ,कारी -कारी रैना ?


चाँदनी की किरनों के रथ पर ,आजा तू नीचे ,

मीठी लोरी सुनकर मेरी ,पाएगा तू चैना |


सारी रातें जग के ,गर तू बिताएगा ,

थक जाएँगे चंदा ,तेरे चमकीले नैना |


बातें हमारी ,तू तो सुनता रहता ,

कभी तो सुना दे ,अपने तू बैना |


कभी तो बोल चंदा ,अपने मीठे बैन ,

कभी तो तेरे बैन सुने ,तेरी ये मैना |

SAYA ( SHORT STORY )

  साया 


जितने भी रिश्ते हैं यारों ,

सा कोई थोड़ा सात देता है ,

कुछ दूर तक तो चलता है ,

पर फिर छोड़ देता है |


एक साया अपना है यारों ,

जो साथ चलता रहता है ,

अँधेरे में साथ छोड़े तो ,

एक किरण में ही वो पनपता है |


सच्चे दोस्त जो भी हैं यारों ,

वो हरदम ही साथ चलते हैं ,

दूर वो नहीं कभी जाते ,

साए की तरह साथ चलते हैं |


किसी से गहरा प्यार हो जब तो ,

हम गीत ये गुनगुना सकते ,

"तू जहाँ -जहाँ चलेगा ,

मेरा साया साथ होगा "|

 

Monday, September 7, 2020

SUBAH KA SAPNA ( SHORT STORY )

   सुबह  का  सपना 


सुबह अँधेरे सपना आया ,

चंदा मेरे घर पर आया ,

उसने मेरा द्वार खटकाया ,

खोला तो वो मुस्काया ,

अंदर मैंने उसे बुलाया ,

हँसते -हँसते वो अंदर आया ,

सोफे पर उसको मैंने बिठाया |


पानी लाई जब दोस्तों ,

वो हँस दिया खाली पानी ,लाओ शिकंजवी ,

तब मैंने शिकंजवी का गिलास थमाया ,

पी लूँगा तुम अंदर जाओ ,

कड़क चाय बना कर लाओ |


चाय चढ़ा दी जब मैंने तो ,

अंदर से आवाज़ ये आई ,

फिंगर -चिप्स बना दो भाई ,

ये सुनकर मैं भी मुस्काई ,

मैंने तेल की कड़ाही ,गैस पर चढ़ाई |


बना चाय और फिंगर -चिप्स ,

मैं लेकर जब अंदर आई ,

चंदा मुस्का कर बोला ,

तू तो बड़ी कमेरी भाई ,

मैंने मुस्का कर चाय का कप ,

अपने होठों तक बढ़ाया ,

तभी आई आवाज़ ,

मम्मी ! बेटा मेरा गया था जाग ,

नींद खुली तब मेरी ,

तो सपना भी टूट गया था ,

आँखें खोल कर मैं मुस्काई ,

खिड़की से बाहर चाँद मुस्का रहा था |

 

 

Sunday, September 6, 2020

SAAL 2020 ( SHORT STORY )

                  साल  2020 


रोज रवि आता है ,रोज रवि जाता है ,

ऐसे ही हर दिन के बाद ,रत आती -जाती है ,

माह बिट जाते हैं ,साल बन जाते हैं ,

ऐसे ही साल , 2020 आया | 


शुरु से ही इस ,भारी -भरकम साल में ,

एक नन्हें ,अनदेखे , वायरस ने उधम मचाया ,

धीरे से ना चला वो ,तेजी से बढ़ गया ,

बन के महामारी ,दुनिया को है रुलाया | 


कैसे बचाए खुद को मानव ,कोई जरा बताओ ? 

आगे का रास्ता तो ,कोई जरा सुझाओ ,

कोशिशें तो मानव की ,हैं आज बहुत सारी ,

सफल वो कैसे होगा ,कोई तो समझाओ ? 


कैसे बीतेगा ये साल ,शुरु हुआ जो ऐसे ,

रोक दिया है जिसने एकदम ,क्रिकेट मैच का खेल ,

मानव को तो जैसे पिंजरे ,बंद कर दिया इसने ,

जल्दी बिताओ इसको भगवन ,खुल जाए ये जेल |

CHAKRA JIVAN KAA ( JIVAN )

                  चक्र  जीवन का

 

 मृत्यु जिसे समझे दुनिया ,वो क्या है ? 

शरीर ही नष्ट होता है ,आत्मा तो अमर है ,

परमात्मा का अंश है ,आत्मा तो अमर है | 

 

हम कपड़े बदलते हैं ,आत्मा भी बदलती है ,

वह शरीर पुराना छोड़कर ,नया धारण करती है ,

नए पुराने में कन्फ्यूजन ना हो हो ,इसलिए परमात्मा ,

पुराने जीवन की यादों को ,भुला देता है | 

 

जन्म नया मिलता है ,फूल नया खिलता है ,

चक्र जन्मों का तो ,इसी तरह चलता है ,

परमात्मा ने ये ,चक्र इसीलिए बनाया है ,

आत्मा भी उसी ,परमात्मा का ही साया है | 

 

घबरा मत इंसान ,इस मृत्यु जैसे शब्द से ,

पुराना जाएगा नहीं ,तो नया कैसे आएगा ? 

जीवन का चक्र ,कैसे चल पाएगा ? 

परमात्मा क्या हर दिन ,नई आत्माएं बनाएगा ?

Saturday, September 5, 2020

AAO BAPPA (GEET )

                                आओ  बप्पा 


गणपति बप्पा मोरया ,मोरया भई मोरया ,

आओ बप्पा आओ ना ,मेरे घर आओ ना | 


आके तुम मेरे घर ,मंगल तिलक लगाओ ना ,

                        आओ बप्पा आओ ना | 

शृद्धा -सुमन हैं पास मेरे ,उनको तुम स्वीकारो ना ,

                             आओ बप्पा आओ ना | 

मीठे -मीठे बने हुए ,मोदक भोग लगाओ ना ,

                           आओ बप्पा आओ ना | 

हम सब पे तुम प्यारे बप्पा ,आशीर्वाद बरसाओ ना ,

                               आओ बप्पा आओ ना |

BRAKE UP ( SHORT STORY )

                      ब्रेक अप 


ब्रेक अप हुआ जो मेरा ,दिल जो टूटा मेरा ,

चाँद जा छिपा है ,बादलों के पीछे ,

चाँदनी सिमट गई है ,अपने अंचरा के पीछे ,

दोनों ने अपने अश्रु ,बादलों को दे दिए हैं | 


ब्रेक अप की बात सुनकर ,बदरा भी रोया जोरों ,

जल -थल हुई है दुनिया ,बदरा जो रोया जोरों ,

दुनिया हुई परेशां ,बदरा के अश्रुओं से 

पर क्या करे बदरा भी ,मेरे ग़म में रो दिया है ? 


बदरा के साथ ही तो ,दामिनी भी परेशां है ,

साथ में बदरा के ,कड़की है दामिनी शोरों ,

दामिनी के शोर से ,पंछी भी डर गए हैं ,

अपने घोंसलों में ,घबरा के छिप गए हैं | 


सब कुछ हुआ है मित्रों ,पर उसको ना खबर है ,

ब्रेक अप किया है जिसने ,वो तो बेखबर है ,

कोई उसको ये बताए ,जाकर उसे सुनाए ,

उसने जो किया है ,क्या उसका असर है ?

NAMAN ( MUKTAK )

 

              नमन 


नमन सभी गुरुजनों को मेरा ,

पहला नमन माँ को करती ,

पहली गुरु वही थीं ,

दूजा नमन पिता को जाता ,

दूजे गुरु वही थे ,

फिर सभी वो गुरु जिन्होंने ,

ज्ञान का पाठ पढ़ाया ,

ज्ञान का मार्ग दिखाया | 


दोस्त हमारे गुरू थे अपने ,

उन्हीं ने प्यार का पाठ पढ़ाया ,

उन्हीं दोस्तों ने खुश रहना ,

दुनिया में हमें सिखाया | 


प्रकृति हमारी गुरू है सच्ची ,

उसने जीने और जीने दो ,

इसके मायने हमें बताए ,

दूसरों को देकर खुश होना ,

हमें उसी ने सिखलाया | 


VAR DE (MUKTAK )

                 वर दे 

 

वर दे ,वीणावादिनी वर दे ,

अपनी मधुर वीणा के स्वर ,

मेरे अंतर में भर दे ,

वर दे ------- | 

ज्ञान का वरदान दे कर ,

मेरे अंतर को प्रकाशमान कर दे ,

वर दे ------ | 

 

SAPNA LEKHAK KA (SHORT STORY )

 सपना  लेखक का 


हर लेखक का होता सपना ,

सुंदर हो उसकी हर रचना ,

खूबसूरती उसके दिल की ,

पा जाए उसकी हर रचना |


शब्द हों मधुरिम ,भाव हों गहरे ,

बूँदों में समंदर बहता हो ,

जीवन की सच्चाई जिसमें ,

रिमझिम सा मेघ बरसता हो |


लेखनी भावों से भरी रहे ,

पाठक गण उसको प्यार करें ,

ऐसी रचना वो रच पाए

लेखन के द्वारा ही लेखक ,

भावों को लिखता रहता है ,

पाठक गण तक पहुँचाता है ,

अपने दिल का जो हिस्सा है |

Friday, September 4, 2020

STREE HOON MAIN ( SHORT STORY )

                        स्त्री हूँ मैं 

 

एक स्त्री हूँ मैं ,हाँ जी हाँ स्त्री हूँ मैं ,

परिवार वालों के लिए ,एक मिस्त्री हूँ मैं ,

                            एक स्त्री हूँ मैं | 

बेटी ही बन के आई ,मैं इस संसार में ,

माता -पिता तो जैसे ,मिले उपहार में ,

भाई -बहिनों के लिए ,जीजी हूँ मैं ,

                           एक स्त्री हूँ मैं | 

दोस्त मिले ,सखियाँ मिलीं ,खेलों की कलियाँ खिलीं ,

पढ़ाई और खेलों में डूबके ,आगे ही चली हूँ मैं ,

                                     एक स्त्री हूँ मैं | 

शादी के बाद ससुराल पहुँची ,प्यार की दुनिया सजी ,

सपनों में जैसे चलते -चलते ,जिंदगी आगे बढ़ी ,

जीती -जागती प्यारी सी ,एक गुड़िया मिली ,

वो ही तो बिटिया मेरी ,

                                एक स्त्री हूँ मैं | 

जननी हूँ अपने बच्चों की ,प्यारा सा परिवार है ,

कर्त्तव्य सभी अपने हैं ,कोई ना अधिकार है ,

कर्त्तव्य कब जुड़ गए ,अधिकार क्यों खो गए ? 

क्या इसलिए क्योंकि ---- 

                                  एक स्त्री हूँ मैं |

PRAKRITI (PRERAK KATHA )

                         प्रकृति 


सुंदर -सुंदर एक सखि ,जिसका नाम प्रकृति ,

रिमझिम बदरा सी बरसती ,कड़क दामिनी सी चमकती | 


पवन की है वो तो हमजोली ,बदरा संग करती है खेली ,

बरसे रिमझिम सी फुहार ,कभी -कभी मूसलाधार | 


जल बह कर नदिया में जाए ,नदिया कल -कल करती जाए ,

मचल -मचल कर नदिया जाए ,सागर में जाकर मिल जाए | 


सागर तो रहता है शांत ,पर चंचला उसकी लहरें ,

देशों की सीमा पर जैसे ,सागर तो देता है पहरे | 


नीचे है सागर विशाल ,ऊपर बड़े -बड़े पहाड़ ,

दोनों ही हैं फैले ऐसे ,बड़े से पहरेदार हों जैसे | 


दोनों ही में अलग है दुनिया ,सागर तो रत्नों की खान ,

अनगिनत जीव और रत्न ,तभी तो रत्नाकर कहलाए | 


पहाड़ों में जंगल हैं सजते ,जिनके अंदर जीव हैं बसते ,

उन जीवों का वही है घर ,जीवों से जंगल सुंदर | 


जंगलों से हम हैं ,सब कुछ हमको हासिल है ,

अनमोल ख़ज़ाने प्रकृति के ,दुनिया में अपनी शामिल हैं | 


सब कुछ हमें प्रकृति देती ,ख़ज़ानों से झोली भर देती ,

सभी आराम इसी से मिलता ,तभी तो अपना जीवन खिलता | 


बदले में हम क्या देते हैं ,एक वादा दे सकते हैं ,

प्रकृति को विनाशित नहीं होने देंगे ,नहीं होने देंगे | 


BAS YATRA ( SHORT STORY )

   बस यात्रा 


एक दिन हम निकले बंधु ,

बस द्वारा कनॉट प्लेस जाने को ,

पहुँचे हम बस स्टैंड तो देखा ,

डबल डेकर बस खड़ी थी चलने को |


खुश होकर हम चढ़ गए बंधु ,

सीढ़ी द्वारा ऊपर को ,

खिड़की वाली सीट पकड़ ली ,

हमने वहाँ बैठने को |


चली बस तो हमें लगा ,

बिना ड्राइवर बस चल दी ,

नया -नया अनुभव था बंधु ,

डबल डेकर बस में चलने का


खिड़की से हम गए देखते ,

बाहर के बाज़ारों को ,

हर स्टैंड पर बस जब रुकती ,

नीचे खड़ी सवारियों को |


चलते -चलते अपनी बस तो ,

कनॉट प्लेस में पहुँच गई ,

धीरे -धीरे हम उतरे ,

बस यात्रा ख़त्म हुई |

Thursday, September 3, 2020

JAY JAVAAN ( DESH )

                  जय  जवान  

 

सेना में वो सिपाही था ,

वर्दी पहनी शान से घर आया ,

माता -पिता को सलामी दी ,घर में खुशियाँ छाईं ,

घर का बच्चा ,सेना में शामिल हो गया | 

 

गलवान घाटी में भेजा गया ,खतरनाक घाटी ,

उसने भी पहली बार देखी ,ठंड से दॉँत ,हड्डियाँ ,सब जमजाते | 

 

सब कुछ सहन कर ,दुश्मन से लड़ने को तैयार ,

सामना करने को तैयार ,

कुछ दिन ही बीते ,ना खाने का ठिकाना ,

ना सोने का ठिकाना ,मगर हौसला था ,

जवान हिम्मतवाला था ,

मुस्कराहट चेहरे पर लिए ,

दूसरों को भी हौसला देता हुआ | 

 

आक्रमण हुआ ,दोनों ही ओर से ,

गोलियाँ चलीं ,दोनों ही ओर से ,

बारूद फटने के कारण ,

धुआं ही धुआं , घुटन ही घुटन ,

मगर उसी में जीता ,वो वीर जवान ,

सभी हैरान थे ,कैसा जवान है ? 


एकाएक बारूद उसके पास फटा ,

जवान घिर गया ,घुटन से  भर गया ,

साँसें भी थमने लगीं ,पलकें भी झपने लगीं ,

जिंदगी भी मानो ,धुएँ में सिमटने लगी ,

फिर भी -----  मुस्कान के साथ ही ,

होंठ बोल उठे ------ जय हिंद | 


और फिर तिरंगे में लिपटा शरीर ,

घर भेज दिया गया ,

माता -पिता ने देखा ,उसकी मुस्कान को ,

घरवालों ने भी देखा ,चेहरे के तेज को ,

शहर भर उमड़ पड़ा ,सभी ने देखा ,

अपने प्यारे "अमर जवान " को ,

और अश्रुपूर्ण नेत्रों से ,

सैल्यूट देकर विदा किया |

PAHAADON KAA KHAZANA (JIVAN )

             पहाड़ों का  खज़ाना 

 

सूर्य रश्मियाँ बिखर गईं ,पहाड़ों की चोटी पर ,

बहती हुईं  नदियाँ जैसे ,नीचे को उतर गईं ,

आँखों से दिल में उतर गया ,दृश्य वो पहाड़ों का ,

लगा ऐसा हमको ,पहाड़ों को सोना कर गईं | 

 

पहाड़ों पे फैले जंगल ,हरियाली फैली हुई है ,

शुद्ध हवा का मानो ,गोदाम बन गई है ,

साँसें हमारी जैसे ,उन पर ही निर्भर हैं ,

जिंदगी पे ये हरियाली ,एक क़र्ज़ बन गई है | 


झर -झर झरते हैं झरने ,पहाड़ों के सीने से ,

शुद्ध ,शीतल जल हमें ,मिलता है इन्हीं से ,

ऐसा शुद्ध जल हमें ,और कहाँ मिलेगा ? 

क्या खूब है प्रकृति ,रची है रचेता ने ? 


ये सब खज़ाना है छिपा ,पहाड़ों के सीने में ,

जो धीरे -धीरे देता ,झोली हमारी भरता ,

जिंदगी हमारी ,निर्भर इन्हीं पर करती ,

बिन मोल ये खज़ाना ,हमको है देती रहती | 


MENHADI ( JIVAN )

   मेंहदी 


देश है त्योहारों का ,रंगीन से व्योहारों का ,

रंग -बिरंगे माहौल में ,गीतों का मनुहारों का ,

हर त्यौहार ,हर फंक्शन में ,

कुछ जुड़ाव ,कुछ कॉमन है |


वो है मेंहदी ,जो रंग प्यार का लाती ,

खुशबुएँ खूब बिखराती ,

याद करें हम शगुन की मेंहदी ,

शादियों में ससुराल से आती |


नाम पिया का हाथों में ना ,

दिल पे अंकित कर जाती ,

हर त्योहार में ये मेंहदी ,

नये -नये रंग बिखराती |


मेंहदी तो सदियों से ही ,

अपना रंग ,खुशबू फैलाती ,

तभी तो दोस्तों ये मेंहदी ,

सबके ही दिल को लुभाती |


बड़ी उम्र के आने पर ये मेंहदी ,

हाथों से बालों तक चढ़ जाती ,

ऐसे ही तो दोस्तों ये मेंहदी ,

जीवन भर सबका साथ निभाती |

 

Wednesday, September 2, 2020

VYAVHAAR MEETHA ( DESH )

                         व्यवहार मीठा

 

"हिंदु ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई ,आपस में हैं भाई -भाई " 

नारा दिया गया ,मगर क्या ये सच है ? 

यदि ये सच है तो ,फिर देश में इतने दंगे क्यों हैं ? 

क्यों पड़ोसी ही पड़ोसी का दुश्मन बना है ? 

 

अलग -अलग क्यों सोच है ? अलग -अलग क्यों भाषा ?

अलग -अलग क्यों है दोस्त ,धर्म की परिभाषा ? 

कोई मूर्ति पूजता ,कोई पढ़े नमाज़ ,

कोई गुरबानी सुने ,कोई चर्च में जाए ,

एक दूजे की पूजा में ,कोई ना शीश झुकाए ,

जब ईश्वर एक है फिर ,पूजा के तरीके में क्या रखा है | 


हाथ बढ़ाओ प्रेम से ,प्यारा हो व्यवहार ,

पूजा कैसे भी करो ,करना क्या विचार ? 

मानव बन के आए थे ,इस धरती पर तुम ,

क्या ईश्वर ने भेजा धरा पर ,बना के तुम्हारा धर्म ? 


मानव ही बन कर रहो ,मानवता के साथ ,

व्यवहार रखो तुम मीठा ,हर मानव के साथ ,

जीवन भर खुशियाँ ही ,बाँटो सब के संग ,

सब के जीवन में भरो ,इंद्रधनुष के रंग |


ईश्वर भी खुश होगा ,जब ऐसा देखेगा ,

फूलों में वो हँस देगा ,खुशबुएँ बिखेर देगा ,

मानवता की राहें ,भर जाएंगी मानवों से ,

आने वाली पीढ़ियाँ ,खिल जाएंगी दुआओं से | 



NANHEN MUNNE SE KHWAB ( JIVAN )

                       नन्हें  -मुन्ने से ख़्वाब 

 

ख़्वाब नहीं ऊँचे अपने ,सच्चे हैं जो थे सपने ,

छोटे -छोटे ख़्वाबों से ,भरी हुई थी जिंदगी ,

आज वो सब साकार हुए ,कल तक थे जो सिर्फ सपने | 

 

नहीं रूठने दिया है हमने ,नन्हे -मुन्ने ख़्वाबों को ,

जित उसी की होती है ,करता जो पूरे ख़्वाबों को ,

इस जीवन में जीते हम ,आगे की ईश्वर जाने ,

क्यों सोचें हम कैसे -कैसे ,करलें पूरा ख़्वाबों को ? 


दुःख -सुख आते जीवन में ,क्यों ख़्वाबों को जाने दें ? 

तपती हुई जिंदगी में ,ख़्वाबों की हवा तो आने दें ,

नन्हीं -नन्हीं खुशियों से ,जीवन को सज जाने दें ,

इंद्रधनुष के रंगों को ,जीवन में भर जाने दें | 


नहीं ख़्वाब सोते देखे ,खुली आँख भी देखे हैं ,

ऐसे ही हमारी तो मित्रों ,सागर से बातें होती हैं ,

चंदा तो अपना सखा है मित्रों ,बरखा भी सहेली है ,

पौधों -फूलों के संग तो किटी पार्टी होती है | 


सभी दोस्त हैं अपने मित्रों ,सभी तो शामिल होते हैं ,

सभी बाँटते खुशियाँ हैं ,खूब ठहाके होते हैं | 


HAMARA GHAR ( GEET )

   हमारा घर   


" ये मेरा घर ,ये तेरा घर ,

किसी को देखना हो गर ,

तो पहले आके माँग ले ,

मेरी नज़र ,तेरी नज़र |"

ये गीत मेरे घर का है ,

ये गीत हमारे घर का है ,

हमारी आरज़ूओं के घर का है |


हमने जिसे बसाया था ,

दिल से जिसे सजाया था ,

उम्मीदों ,आशाओं का घर ,

विश्वासों के तोरण का घर ,

खुशियों की मिठाइयों से भरा ,

मुस्कानों के नमकीनों से हरा ,

वो घर जो देखना है तो ,

देखो उसे मेरी नज़रों से |


कल्पनाओं से सजाया ,

दीपकों से रोशन किया ,

अरविंदों की खुशबुओं से महकाया ,

हम सभी के अंश ने ,

अल्पनाओं से रंगा ,

नियोति है यही घर की ,

बरस दर बरस फूले -फले ,

ऐसा इंद्रधनुषी घर ,

दूजा नहीं होगा कहीं |

 

Tuesday, September 1, 2020

KAISII AAZADI ? ( DESH )

                         कैसी आज़ादी ?

 

दासता से मिली आज़ादी ,अपने वीरों के कारण ,

दासता की टूटी बेड़ियाँ ,अपने वीरों के कारण ,

बाहर वालों ने लूटा ,अंदर की फूट के कारण ,

देश गरीबी के गर्त में ,डूबा ना समझी के कारण | 


देश में ना थी कहीं एकता ,सब के अलग थे रस्ते ,

मैं हिन्दू हूँ ,मैं मुस्लिम हूँ ,सब थे यही समझते ,

नहीं प्यार था आपस में ,सबके अपने बस्ते ,

भाषाएं सबकी अलग थीं ,अलग थे सब ही चलते | 


ऐसे में ही कुछ वीरों ने ,एक सूत्र बनाया ,

सबको बाँधा उसी सूत्र में ,देश प्रेम उपजाया ,

उपजा देश प्रेम जब उनमें ,एक हुए कुछ लोग ,

उन्हीं ने देश भर में ,"स्वराज्य " का नारा लगाया | 


समझ गए तब भारतीय ,उनका साथ निभाया ,

बढ़ते -बढ़ते वीर बने सब ,अपना अधिकार जमाया ,

कुछ तो लटके फाँसी पर ,कुछ ने गोली खाई ,

कुछ लोगों ने तो अहिंसा ,का रास्ता अपनाया | 


सब मिलकर जब एक हो गए ,दुश्मन डरकर भागा ,

तभी तो मित्रों  देश का ,सोता भाग्य भी जागा ,

आज हैं हम आज़ाद देश के ,जिम्मेदार नागरिक ,

अधिकार हमें बहुत प्राप्त हैं ,संविधान जो ऐसा लागा | 


नहीं बोलने पर पाबंदी ,नहीं धर्म ,जाति पर ,

पढ़ना ,लिखना मिल जाता है ,जो हम चाहें ,अपनाएं ,

जीवन तो बगिया है मित्रों ,इसमें हम जो चाहें ,

उसी रंग ,उसी खुशबु ,उसी प्यार के ,फूल खिलाएं ,

क्योंकि हम हैं ,आज़ाद देश के ,जिम्मेदार नागरिक ,

सभी वीरों को नमन ,जय हिंद |

E - WATAN TERE LIE ( DESH )

 

      ए -वतन तेरे लिए 

 

दुनिया के आकाश में उभरा ,चमकीला एक सितारा ,

और कोई नहीं है मित्रों ,वो तो अपना भारत प्यारा ,

दासता की बेड़ियों से ,हुए थे जब मजबूर ,

आज़ादी की दौलत हमको ,वीरों ने दिलवाई | 

 

बोस ,भगतसिंह ,लक्ष्मीबाई ,आज़ाद और पटेल ,

कोई फाँसी पर लटका ,किसी ने सीने पर गोली खाई ,

कुछ ने अहिंसा को अपनाया ,कुछ ने बढ़कर ललकारा ,

किस -किस का हम नाम लिखेंगे ,सभी को नमन हमारा | 

 

आज के दिन तिरंगा अपना ,लाल -किले पर फहराया ,

उसी दिन का जश्न मनाने ,शेर अकेला ही आया ,

उसने आगे बढ़कर ही ,नयी राह दी देश को ,

उसी राह पर चलकर ही ,सच करेंगे सपनों को | 

 

साथ शेर का देकर हम ,कर्त्तव्य करें अपना पूरा ,

तभी तो आने वाले कल में ,होगा अपना पूरा ,

वंदे मातरम कहते -कहते ,आगे बढ़ते जाएँगे ,

देश भक्ति की राह में मित्रों ,जीवन सफल बनाएँगे | 

 

आज इस महामारी के संकट में ,फँसी है दुनिया सारी ,

भारत माता के बच्चे भी ,झेल रहे हैं ये बीमारी ,

फिर भी डट कर खड़े हुए ,हैं वीर हर सीमा पर ,

अपनी जान की नहीं है परवाह ,दूजे की जान पे वारी | 

 

है नमन सभी को मित्रों ,देश के वीर सपूतों ,

ईश्वर भी आशीष दे रहा ,भारत के वीर सपूतों | 

                                    जय हिंद | 

 

CYCLE ( MANORANJAN )

    साइकिल 


बचपन में मिली साइकिल बंधु ,

नहीं आज तक चल पाई ,

बिना गियर वाली साइकिल भी ,

दो पहियों पर ना संभल पाई |


पाँच गियर वाली मारुति को ,

हम तो खूब चला पाए ,

सीखा ना बचपन में फिर भी ,

हम उसको दौड़ा पाए |


कार के चक्के दौड़ गए ,

काली सी इन सड़कों पर ,

पर दो पहियों वाली साइकिल ,

अब भी रुकी पड़ी है ,

नहीं चली है अब तक बंधु ,

आज भी अड़ी खड़ी है |

PADHA TO BADHA ( DESH )

 

पढ़ा तो  बढ़ा

 

पहला शब्द तो माँ ही सीखा ,माँ से ही सीखा ,

चलना ,बोलना ,खाना ,सभी कुछ तो माँ से सीखा ,

फिर भाषा का चक्कर क्या है ?

मातृभाषा ही सीखेंगे हम ,बोलना ,पढ़ना ,लिखना | 

 

हिंदी हो, मराठी हो ,या फिर हो गुजराती ,

कुछ भी सीखें हम सब ,हैं तो भारतवासी ,

सभी बच्चे सीखें ,पढ़ना और लिखना ,

तभी तो अगली पीढ़ी ,सीखेगी आगे बढ़ना | 


बच्चा हो या बच्ची ,है जरूरी पढ़ना ,

विकास की ओर कदम बढ़ेगा ,जब आएगा लिखना ,

क्रमबद्ध रूप से शिक्षा सब पाएं ,पढ़े ,लिखे जन उन्हें पढ़ाएं ,

मेहनत से ही तो हम ,अपना देश आगे ले जाएं | 


बच्चे सभी पढ़ना सीखें ,ज्ञान को वो गुनना सीखें ,

तभी तो अगली पीढ़ी ,चढ़ेगी अगली सीढ़ी ,

नहीं कदम फिर रुक पाएगा ,हर बच्चा चढ़ जाएगा ,

नहीं कोई अनपढ़ जन हो ,भारत में हर कोई पढ़ा हो ,

तभी तो भारत विकसित ,देशों की श्रेणी में आएगा ,

तभी तो दूजे देश कहेंगे ,"पढ़ा है भारत ,तभी तो बढ़ा है भारत " | 


BATAAO MITRON ( PREM )

 

             बताओ मित्रों

 

दो पल को मिलीं नजरें ,उसमे ही झुक गईं ,

क्या बताऊँ सखियों ,क्या दिल का हाल था ? 

कोई जादू था जो मेरे ,दिल में उतर गया ,

क्या जादू था जो मेरे ? दिल को चुरा गया | 

 

शब्दों का जाल मेरा ,दिल बुन रहा था ,

जुबां पे एक भी तो ,ना शब्द आ रहा था ,

लब खुल नहीं रहे थे ,कुछ कह नहीं रहे थे ,

हमेशा से बोलते लब ,सकुचा रहे थे | 

 

कैसे कहूँ मैं जानम ,तुमने दिल चुरा लिया है ,

दिलवाली थी मैं पहले ,बेदिल कर दिया है ,

दिल एक ही तो होता ,वो भी हुआ है चोरी ,

क्या रपट मैं लिखाऊँ ,पर किसके ख़िलाफ़ होगी ? 

 

सखियाँ भी चुप हैं मेरी ,ना दे रहीं सलाहें ,

कैसी हैं ये सखियाँ भी ,मुस्कातीं धीरे -धीरे ,

आज तो मैं मित्रों ,सखियों का ,विश्वास क्या करूँ ? 

तुम ही बताओ मित्रों उसे ,कह दूँ या चुप रहूँ ?

NAAM LIKHA THA USKA ( PREM )

    नाम लिखा था उसका 


प्यार की पहली चिट्ठी ,जब आई थी उनकी ,

हमने चूम लिया उस जगह को ,

जहाँ पे नाम लिखा था उनका ,

वह था प्यार का पहला किस ,

जिसपे नाम लिखा था उनका |


शादी में जब पहनी चूड़ियाँ ,

प्यार से उनको चूम लिया था ,

क्योंकि उन लाल -हरी चूड़ियों की ,

झंकार पे नाम लिखा था उनका |


ईश्वर ने जब दी हमें एक ख़ुशी ,

नन्हीं ,प्यारी सी ,कोमल बिटिया ,

प्यार में भर उसको चूमा ,

इस प्यार पे नाम लिखा था उसका |


ईश्वर ने दी एक और ख़ुशी ,

नन्हा,प्यारा ,मुस्काता बेटा ,

हमने प्यार से चूम लिया ,

इस चुम्बन पे नाम लिखा था उसका |


ये चुम्बन थे प्यार भरे ,

सबके थे अधिकार भरे ,

इसमें कौन सी पहली किस ?