Monday, September 7, 2020

SUBAH KA SAPNA ( SHORT STORY )

   सुबह  का  सपना 


सुबह अँधेरे सपना आया ,

चंदा मेरे घर पर आया ,

उसने मेरा द्वार खटकाया ,

खोला तो वो मुस्काया ,

अंदर मैंने उसे बुलाया ,

हँसते -हँसते वो अंदर आया ,

सोफे पर उसको मैंने बिठाया |


पानी लाई जब दोस्तों ,

वो हँस दिया खाली पानी ,लाओ शिकंजवी ,

तब मैंने शिकंजवी का गिलास थमाया ,

पी लूँगा तुम अंदर जाओ ,

कड़क चाय बना कर लाओ |


चाय चढ़ा दी जब मैंने तो ,

अंदर से आवाज़ ये आई ,

फिंगर -चिप्स बना दो भाई ,

ये सुनकर मैं भी मुस्काई ,

मैंने तेल की कड़ाही ,गैस पर चढ़ाई |


बना चाय और फिंगर -चिप्स ,

मैं लेकर जब अंदर आई ,

चंदा मुस्का कर बोला ,

तू तो बड़ी कमेरी भाई ,

मैंने मुस्का कर चाय का कप ,

अपने होठों तक बढ़ाया ,

तभी आई आवाज़ ,

मम्मी ! बेटा मेरा गया था जाग ,

नींद खुली तब मेरी ,

तो सपना भी टूट गया था ,

आँखें खोल कर मैं मुस्काई ,

खिड़की से बाहर चाँद मुस्का रहा था |

 

 

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