Wednesday, September 2, 2020

NANHEN MUNNE SE KHWAB ( JIVAN )

                       नन्हें  -मुन्ने से ख़्वाब 

 

ख़्वाब नहीं ऊँचे अपने ,सच्चे हैं जो थे सपने ,

छोटे -छोटे ख़्वाबों से ,भरी हुई थी जिंदगी ,

आज वो सब साकार हुए ,कल तक थे जो सिर्फ सपने | 

 

नहीं रूठने दिया है हमने ,नन्हे -मुन्ने ख़्वाबों को ,

जित उसी की होती है ,करता जो पूरे ख़्वाबों को ,

इस जीवन में जीते हम ,आगे की ईश्वर जाने ,

क्यों सोचें हम कैसे -कैसे ,करलें पूरा ख़्वाबों को ? 


दुःख -सुख आते जीवन में ,क्यों ख़्वाबों को जाने दें ? 

तपती हुई जिंदगी में ,ख़्वाबों की हवा तो आने दें ,

नन्हीं -नन्हीं खुशियों से ,जीवन को सज जाने दें ,

इंद्रधनुष के रंगों को ,जीवन में भर जाने दें | 


नहीं ख़्वाब सोते देखे ,खुली आँख भी देखे हैं ,

ऐसे ही हमारी तो मित्रों ,सागर से बातें होती हैं ,

चंदा तो अपना सखा है मित्रों ,बरखा भी सहेली है ,

पौधों -फूलों के संग तो किटी पार्टी होती है | 


सभी दोस्त हैं अपने मित्रों ,सभी तो शामिल होते हैं ,

सभी बाँटते खुशियाँ हैं ,खूब ठहाके होते हैं | 


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