Thursday, December 31, 2020

DO BOONDEN ( GEET )

     दो  बूँदें 

 

बूँद - बूँद आँसुओं की ,

 एक बूँद ग़म की ,दूसरी ख़ुशी की | 


बूँद - बूँद झरी आँखों से ,

मगर होठों पे मुस्कुराहटें ,

एक मुस्कान ग़म की ,दूसरी ख़ुशी की | 


हाथ दो मिले काँपते हुए ,

कँपन था दोनों हाथों में ,

एक कँपन ग़म का ,दूसरा ख़ुशी का | 


एक बूँद ने कहा दूसरी से ,

मैं झरती हूँ ,तो ग़म को बहा ले जाती ,

दूसरी बोली ,मैं झरती हूँ ,तो खुशियाँ बढाती | 


आँखें चमक उठीं ,बूँदों से बोलीं ,

मैं तो दोनों ही परिस्थितियों में नम हो जाती ,

एक नमी ग़म की ,दूसरी ख़ुशी की | 


साथ बूँदों का रहे हमेशा ,

दोनों साथ रहेंगी हमेशा ,

भाव हो चाहे अलग - अलग ,

एक भाव ग़म का , दूसरा भाव ख़ुशी का | 


Wednesday, December 30, 2020

BYE - BYE ,TWENTY - TWENTY ( GEET )

 

 

बाय - बाय ,  20 -20 


टवेंटी - टवेंटी तू जा - जा ,

टवेंटी वन को ले आ ,

जा वे जा तैनू रब दा वास्ता | 

 

जब से तू आया है ,सब को ही सताया है ,

आँसुओं से ही तूने , सब को रुलाया है ,

जा वे जा तैनू रब दा वास्ता | 

 

कोई बचा नहीं तुझसे ,दुनिया काँपी है तुझसे ,

सड़कें वीरान हुईं ,मानो शमशान हुईं ,

जा वे जा तैनू रब दा वास्ता | 

 

स्कूल - कॉलेज का तूने ,रस्ता भुलाया है ,

मंदिर - मस्जिद को तूने ,ताला लगाया है ,

जा वे जा तैनू रब दा वास्ता | 

 

 

Thursday, December 24, 2020

JALATE DEEPAK ( SHORT POEM )

 

  जलते  दीपक 


अँधेरी रातों में दीपक जलाए रखिए ,

रात को राहों में दीपक जलाए रखिए ,

कोई भी ठोकर लगे ना किसी को ,

रास्ता ठीक से दिखाई दे सभी को |


दीपक जो जलता रोशनी है देता ,

दीपक की लौ से करिश्मा है होता ,

वही लौ तो सबको रास्ता दिखाती ,

वही तो सभी को मंजिल पर पहुँचाती | 


छोटा सा दीपक प्रकाश है फैलाता ,

सूर्य का अंश ही है वो तो ,

तभी तो किरणों से राहें चमकाता ,

चलने वाले राही को रास्ता दिखाता |


हर समस्या का समाधान है दीपक ,

आशा का सामान है दीपक ,

कभी भी इसे बुझने ना देना ,

आँखों का अभिमान है दीपक |




Wednesday, December 23, 2020

PYAR BASATA HAI ( SHORT POEM )

      प्यार बसता है 


पहाड़ों में बसीं वादियाँ ,

मानो प्यार में डूबीं घाटियाँ ,

बुलातीं सभी को , आओ बस जाओ तुम ,

पाओगे तुम यहाँ ,हसीन सी झाँकियाँ |


प्यार बसता यहाँ ,प्यार रिसता यहाँ ,

मानो कोई हो झरना ,यहाँ प्रेम का ,

प्यार हर फूल में ,हर कली में बसा ,

प्यार की माला हर कोई ,पिरोए यहाँ |


प्यार की धुन यहाँ ,वादियों में गूँजती ,

प्यार की महक से ,बहारें महकतीं ,

हरेक घर में प्यार की ,खिचड़ियाँ हैं पकतीं ,

प्यार की खिलखिलाहट ,मुस्कानों में सजतीं |


छोड़ कर अपने शहर ,अपने घर ,

लोग आते यहाँ ,लोग बसते यहाँ ,

तुम भी आकर यहाँ ,इन्हीं में खो जाओ ,

छोटा सा अपना नीड़ ,बसाओ यहाँ |




Tuesday, December 22, 2020

AAI TITALI ( GEET )

     आई  तितली 


रंग - बिरंगी तितली आई ,उड़ती - उड़ाती ,

मेरे फैले हाथों पर ,आकर बैठ जाती ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |


मेरे बचपन की यादों को ,ताज़ा कर जाती ,

उन खेलों की यादों को ,वो तो दोहराती ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |


फर - फर,फर - फर करती ,पंखों को फैलाती ,

बचपन के दिनों की बीती ,कहानियाँ सुनाती ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |


रंगों से भरी बगिया में ,जब वह उड़ती जाती ,

उसे पकड़ने के लालच में ,मैं भी दौड़ लगाती ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |


यादें तो अनमोल हैं ,मेरे इस जीवन में ,

तितली कहती मुझसे ,मेरे भी जीवन में ,

मेरी मुस्कानों के जवाब में ,वह भी मुस्काती |





Monday, December 21, 2020

PATRA - NAMAN VIRON KO ( LEKH - PATRA )

   नमन वीरों को 


नमन करूँ मैं वीरों को ,

हाथ जुड़ें ना मेरे भगवन ,तेरी मूरत के आगे ,

शीश झुके ना मेरे ईश्वर ,तेरे मंदिर में जाके ,

मेरे हाथ जुड़ाना भगवन ,मेरा शीश झुकाना ईश्वर ,

जहाँ खड़ा हो टोला ,मेरे देश के वीरों का ,

जो देश की रक्षा करते ,देश हेतु ही मरते |


बीते मेरा सारा जीवन ,उनके ही गुणगान में ,

जो हैं सच्चे हीरे -मोती ,भारत की इस खान में ,

देशभक्ति की शक्ति बहती,उनके लहु की रवानी में,

जो देश की रक्षा करते ,देश हेतु ही मरते |


वीरों सिर झुकता है मेरा ,सदा तुम्हारे आगे ,

नमन मेरा स्वीकार करो तो ,मेरे भाग्य हैं जागे ,

तुम ही हो शक्ति भारत की ,हम करें भक्ति तुम्हारी ,

जो देश की रक्षा करते ,देश हेतु ही मरते |

        जय जवान ,जय भारत ,

                                      वीरों की भक्तिन

 

Saturday, December 19, 2020

PATRA DESH KI MAHILA KA ( LEKH -- PATRA )

 पत्र देश की महिला का 

 

 नमन सरहद के वीरों को ,

तीन रिश्ते पहुँचे हमारे ,सरहद की रक्षा करने हेतु ,

देश की रक्षा हेतु |

 

पहला दोस्त पति अपना ,दूसरा है बेटा अपना ,

तीसरा है भाई अपना ,देश की रक्षा हेतु | 

 

दोस्त पति के साथ जीवन बीत रहा ,

बेटे ने माँ होने के अर्थ बताए ,

भाई के संग बचपन से खेले हम तो ,

गए सभी सरहद पर ,देश की रक्षा हेतु | 

 

प्यार किया दोस्त पति से ,आशीष दिया बेटे को ,

राखी बाँधी भाई को हमने ,देश की रक्षा हेतु | 

 

प्यार करेगा रक्षा पति की ,आशीष फलेगा बेटे को ,

राखी रक्षा करे भाई की ,देश की रक्षा हेतु | 

 

विजय श्री पाओ तुम तीनों ,नहीं पीठ दिखलाना ,

यही कामना है मेरी ,सरहद पर डट जाओ तुम ,

देश की रक्षा हेतु | 

 

आओगे जब वीरों तुम ,विजय श्री को पाकर ,

मैं ही क्या ये पूरा देश ,उतरेगा आरती हाथ जोड़कर ,

देश की रक्षा हेतु | 

जय जवान ,जय भारत | 

                                            देश की महिला ,

 

 

 

Thursday, December 17, 2020

PATRA MAATI KA (LEKH --- PATRA )

                 पत्र माटी का 

 नमन वीरों को ,

सरहद के वीरों सुनलो ,पुकार देश की माटी की ,

मेरा तिलक लगा के पहुँचे तुम,भूमि रेखा पर सीमा की |

  

मुझ से तुमने जन्म लिया ,मैंने ही तुमको पाला ,

मैंने ही तो भरा तुम्हारी ,आँखों में उजाला | 


मेरे ऊपर चलकर ही तुम ,चलना - फिरना सीखे ,

सभी खेल खेले मुझ संग ,कभी हारे ,कभी जीते | 


बढ़ते -बढ़ते बने काबिल ,आज बने वीर सरहद के ,

संघर्षों से जूझ -जूझकर ,सीना तान खड़े सरहद पे | 


आज समय आया है वीरों ,मेरा क़र्ज़ चुकाना है ,

सरहद पार के आतंकियों से ,तुमने मुझे बचाना है | 


हाथ लगा ना पाए कोई ,गंदे ,नापाक इरादों से ,

तोड़ के रखना उन हाथों को ,बढ़ें जो गलत इरादों से | 


पत्र लिखा है तुमको वीरों ,दिल की बात लिखी है ,

देश को गर्व है तुमपे वीरों ,माटी भी सलाम करती है | 

 जय जवान ,जय भारत ,          

                                              देश की माटी

Wednesday, December 16, 2020

NAYA SAVERA , PURANE PATTE ( JIVAN )

                नया सवेरा , पुराने पत्ते 

 

आई चिड़ियों की आवाज ,उठ जाओ हुआ प्रभात , 

नहीं नींद में डूबे रहो ,नहीं सपनों में खोए रहो | 


सूरज की किरणें फ़ैल गईं ,संसार सुनहरा हो गया ,

जागो सभी सोने वालों ,देखो सवेरा हो गया | 

 

दिन कीसुंदर शुरुआत हुई ,चाय की चुस्की शुरु हुई ,

तुम भी उठकर आओ अब ,गरम नाश्ता खाओ अब | 

 

राही चल रहे सड़कों पर ,रेलगाड़ी भी चल दी अब ,

तुम भी अब तैयार होकर,ऑफिस को चले जाओ अब | 

 

 काम चलेगा सारे दिन ,नहीं मिलेंगे खाली छिन ,

काम में तुम लग जाओ अब , व्यस्तता को अपनाओ अब | 


खिड़कियों को बंद ना रखो,आने दो ताज़ी हवाओं को अब,

दिल ,दिमाग खुल जाने दो ,नए विचार अपनाओ अब | 

 

पतझड़ का मौसम आया है ,झड़ जाने दो पुराने पत्ते ,

झड़ जाएंगे पुराने पत्ते ,आने दो नए पत्ते अब | 

 

पतझड़ के बीतते ही ,हरियाली छा जाएगी ,

बागों में तभी तो ,बहार मुस्कुराएगी | 

 

 

 

 




Monday, December 14, 2020

DWAR KI BAGIYAA ( GEET )

    द्वार की बगिया


मेरे द्वार के पार ,एक बगिया है दोस्तों ,

सूरजमुखी खिली है ,उसमें तो दोस्तों |


सूरज की किरणें ,उसको तपातीं हैं दिनभर ,

पर वो तो मुस्कुराती ,रहती है फिर भी दिनभर ,

नहीं उदास कभी वो ,होती नहीं है दोस्तों |


रंग है उसका पीला ,जैसे शगुन की हल्दी हो ,

सबके नयनों में वो ,चमक लाती है दोस्तों |


मैं कदम जब निकालूँ ,द्वार के बाहर को ,

तब वो मेरा अभिवादन ,करती है दोस्तों |


प्यार से जब उसे ,छू लूँ मुस्कुरा कर ,

तब वो और भी अधिक ,खिल जाती है दोस्तों |


देती है फायदा वो ,जाने ,अनजाने को भी ,

प्यार वो सभी में ,बाँटती है दोस्तों |


सूरजमुखी की महक तो ,द्वार से भी अंदर आती ,

उस महक से मेरा घर ,महका रहता है दोस्तों |


मेरे घर की पहचान ,वही सूरजमुखी बनी है ,

अनजान कोई भी मेरा घर तो ,ढूँढ लेता है दोस्तों | 




Saturday, December 12, 2020

DHADAKTA DIL ( PREM )

 

धड़कता  दिल

 

आजकल खत नहीं लिखता कोई ,

खाली हैं सारे लैटर - बॉक्स शहर में ,

मोबाईल से एस . एम . एस . जाते हैं ,

मिनटों में आ जाता है जवाब उनका |


खतों का  एक जमाना था यारों ,

राह तकते थे हम उनके खत की ,

शब्दों में भाव दिखते थे उनके ,

शब्दों में दिल धड़कता था उनका |


आज राहें भी जैसे सूनीं हैं ,

नयन उनपे ना बिछे हैं कोई ,

डाकिया भी कोई नहीं आता है ,

लाता नहीं है कोई खत उनका | 


कितनी खुश्बुएँ हवा में उड़ती थीं ?

कितनी संगीत भरी धुन हवा में उड़ती थीं ? 

मुस्कराहट लबों पर यूँ बिखर जाती थीं ,

जब भी लाता था कोई खत उनका |


हम कैसे जवाब लिखें उनको ?

शब्द जब सामने नहीं हमारे हैं ,

लेखनी सो गई है अब यारों ,

कागज़ भी लगता है कुँवारे हैं |


कोई जाए उन्हें ये समझाए ,

कोई तो उनसे खत भी लिखवाए ,

कभी तो वो भी हमको बतलाएँ ,

कितनी जोर से धड़कता है दिल उनका ?  


Friday, December 11, 2020

DHADAKANE DE (PREM )

                    धड़कने  दे 

 

जुल्फों को हटाले चेहरे से ,थोड़ा सा चांदना होने दे ,

हम मिलने आए हैं तुझसे,एक चाय का सिप तो होने दे | 

 

 जुल्फों के अँधेरे में तुझको ,कैसे हम देख पाएँगे ?

बिना देखे तुझको हम,कैसे बातें कर पाएँगे ?

थोड़ा सा उजाला हो जाए ,तो गप्पों का संगीत बहने दे | 

 

लंबी काली जुल्फों के घनेरे ,अंधकार की छाँव में ,

हम तुम बैठेंगे साजन ,पीपल की गहरी छाँव में ,

बातों के छनकते झुरमुट में,छन छन की धुन तो बजने दे|

 

बैठे बैठे हम करेंगे बातें ,सपनों की सुन्दर दुनिया की ,

भूल जाएँगे हम ये दुनिया,और परंपराएं इस दुनिया की,

बातों के उन सपनों में ,प्यार की बीना बजने दे | 

 

मुलाकात तो रोज़ ना होती ,रोज ना सजतीं हैं महफ़िल ,

रोज ना गुल खिलते चँहु ओर,रोज ना धड़के जोर से दिल, 

आज तो मुलाकाती के ,दिल को जरा धड़कने दे | 

 

Friday, December 4, 2020

JADUI SHAKTI ( JIVAN )

                   जादुई शक्ति 

 

धरा हमारी परियों जैसी ,जादू करना जाने ,

 नन्हें - नन्हें बीजों से ,पौधे उगना जाने | 


उन पौधों में अनगिनत पत्तियाँ ,

और फूल खिलाना जाने ,

उन फूलों की खुश्बु को वो ,

दूर - दूर फैलाना जाने | 


फूलों से बनाती फल मीठे ,

फलों से फिर बीज बनाना जाने ,

ऐसे ही प्यारी धरती हमारी ,

गोल - गोल सा चक्र चलाना जाने | 


ये सब गुण वो रखे छुपा कर,

किसी को नहीं बताना जाने ,

तभी तो हम उसको कहते हैं ,

धरती माँ ना  अपने गुणों को जताना जाने | 

 

पौधे भी जादुई बन कर ,

मानव की खुशियों को बढ़ाना जानें  ,

फल ,फूलों से मानव की ,

दुनिया को भरना जानें | 

 

रंग , स्वाद , खुश्बु से दुनिया ,

भर देना तो जानें ,

ऐसी अलौकिक शक्ति रखते हैं वो ,

फिर भी कोई घमंड ना जानें | 

 

 

 

MEGHA RE ( RANI PARI )

   

( रानी  परी  )  

 

पंख नहीं हैं मेरे ,कैसे उड़ आऊँ मैं ? 

तू मुझे बुलाए बेशक ,पर उड़ ना पाऊँ मैं | 

 

उधार के पंख तो ,पंछी से ले ना सकूँ मैं ,

कोई भी अपने पंख ,कैसे देगा भला ? 

मोल तो उन पंखों का ,चुका ना पाऊँ मैं | 

 

बिन पंख भी कोई उड़ता ,बस बदरा ही हैं ऐसे ,

बदरा तो उड़ते गगन में ,पंख नहीं हैं उनके ,

बिन पंखों के उनके जैसा ,कैसे उड़ पाऊँ मैं ? 

 

पवन सखि है मेरी ,उसकी भी मजबूरी ,

ना पंख हैं उसके पास ,ना है उसको कोई आस ,

कैसे उड़ाए वो मुझको ,जबकि पंख ना उसके पास ,

ना मैं हूँ कोई तिनका ,जो पवन से उड़ जाऊँ मैं | 

 

पंख अगर होते मेरे ,उड़ जाती मैं बदरा के पार ,

गगना में उड़ती रहती ,दिख जाती दुनिया अपार ,

दिलवा दे मुझको कोई ,दो दिन को पंख उधार ,

तो दो दिन के लिए ही सही ,रानी परी बन जाऊँ मैं |