Tuesday, October 31, 2023

BHOLA HAI VAH ( RATNAAKAR )

 

                       भोला है वह 


मेरा समंदर कहाँ गया ओ -सखि ?

तेरे शहर जा पहुँचा है क्या ?

बहुत ही शांत है ,अकेला है वह ,

ढूँढना जरा उसे ,बहुत ही भोला है वह ||


रत्नों का भंडार है ,उसमें छिपा ,

लूट ना ले ,कोई भोला जान के ,

कैसे बचाएगा वह अपनी दौलत ?

ढूँढना जरा उसे ,बहुत ही भोला है वह || 


साथ में साथी नहीं , उसके  कोई ,

साथ में रक्षक नहीं ,उसके कोई ,

कैसे बच पाएगा वो ,जिंदगी के तूफ़ान में ?

ढूँढना जरा उसे ,बहुत ही भोला है वह || 


आती नहीं हैं उसको ,तो चालाकियाँ ,

कर नहीं सकता है ,वो अपनी मनमर्जियाँ ,

कैसे बुला पाएगा वो ,अपना कोई रहनुमा ? 

ढूँढना जरा उसे , बहुत ही भोला है वह  || 


Monday, October 30, 2023

KARM ( JIVAN )

 

                            कर्म


धर्म दिखाए रास्ता ,कर्म चलाए रास्ता ,

कर्म जो सुंदर होयं तो ,भाग्य सजाए रास्ता || 


सज जाए जब रास्ता ,पार करना आसान होय ,

जीवन की मंजिल मिले ,कठिनाई ना होय || 


सुंदर कर्म के बीज जो ,डालो मन के खेत ,

सुंदर फसल मिलेगी तब ,नहीं तो उड़ेगी रेत || 


दूजों के कर्मों की बंधु ,नकल करो ना कोय ,

अपने मन में तोल के ,तभी करो तुम सोय || 

(  जो ठीक लगे वह कर्म )

Sunday, October 29, 2023

BANSEE ( GEET )

  

                   बंसी 


कान्हा तेरी बंसी की ,मीठी सी तान रे ,

राधा ,राधा ,राधा ,पुकारे ये नाम रे | 


चारों दिशाओं को गुंजाया इसने ,

सबके दिलों को धड़काया इसने ,

लाई ये सबके होठों पर ,मीठी सी मुस्कान रे | 


सारी की सारी गोपियाँ ,दीवानी इसकी ,

गोपियाँ ही क्या सारी दुनिया ? दीवानी इसकी ,

तभी तो सभी इस बंसी पर ,छिड़कते हैं जान रे | 


आजा कान्हा ,बंसी बजा के ,मीठी सी तान सुना दे रे ,

हमें भी दीवाना बना दे ,मीठी सी तान सुना दे रे ,

हम भी तो छिड़का दें ,बंसी पे अपनी जान रे  || 


Friday, October 27, 2023

DHARAA BADAL GAI ( JIVAN )

 

                  धरा बदल गई 


धरा बनी जब अपनी दोस्तों ,क्या हम थे तब ? 

धरा का रूप बना था कैसा ? 

क्या तुम जानो ? क्या हम जानें ? 


आग का गोला थी ,तब धरा हमारी ,

बादल बने ,बरखा हुई ,

धीरे - धीरे धरा ठंडी हुई ,

तब ठोस चट्टानों का रूप लिया ,

उन चट्टानों के बीच - बीच में ,पानी इकठ्ठा हुआ || 


उन बड़ी चट्टानों के टुकड़े बने महाद्वीप ,

बीच में जमा पानी के स्रोतबने महासागर ,

धीरे - धीरे उपजा जीवन ,महासागर मुस्काए ,

कुछ देर बाद यही जीवन ,पहुँचा महाद्वीप में || 


समय बीतता चला ,धीरे - धीरे कदम बढ़े ,

रूप बदलता गया ,मानव ने तब जन्म लिया ,

मानव की सोच चली ,और फिर दौड़ी ,

सारी धरती बदल गई ,उसने आज का रूप लिया ,

आज क्या मानव ,लाखों साल पहले की ,

धरा के रूप को ,सोच में ला सकता है ? 


Tuesday, October 24, 2023

SEEDHIYAN ( JIVAN )

 

                        सीढ़ियाँ 


सीढ़ियों पर चढ़ते जाओ ,और अपनी मंजिल पाओ ,

एक -एक सीढ़ी चढ़ोगे ,तो आसमान छूने के लिए बढ़ोगे ,

सीढ़ियाँ हमेशा ऊँचाइयों तक पहुँचाती हैं ,

करो कोशिश ऊँचाइयों तक पहुँचने  की ,

आसमान छूने की | 

 

आज मानव सीढ़ी  की जगह ,लिफ्ट का प्रयोग करता है ,

मगर लिफ्ट  तो सिर्फ भाग्य है ,जिसका भाग्य साथ देगा ,

लिफ्ट कुछ पलों में ,ऊँचाइयों पर पहुँचा देगी ,

मगर दोस्तों लिफ्ट बंद हुई तो ,तो क्या होगा ? 


धड़ाम से नीचे गिर जाओगे ,

मेहनत की सीढ़ियाँ चढ़ते जाओगे ,

तो सीढ़ियाँ ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगी ही ,

नीचे नहीं गिराएँगी ,नीचे नहीं लुढ़काएँगी || 


Monday, October 23, 2023

RAADHAA KAA JAVAAB ( GEET )

 

                            राधा का जवाब 


मैंने ना बंसरी चुराई ,रे कान्हा ,

चोरनी नहीं मैं कन्हाई , कन्हाई रे || 


तुम तो हो कान्हा ,उसके दीवाने ,

गाते हो उसमें मधुरम तराने ,

चहुँ दिस परत सुनाई ,सुनाई रे |

मैंने ना बंसरी चुराई || 


माना उसकी तान है मीठी ,

कभी तो राखो उसको दीठी ,

क्यों हर पल उसको बजाई ,बजाई रे ? 

मैंने ना बंसरी चुराई || 


सारे जग के तुम हो प्यारे ,

राधे - कृष्णा कह के पुकारें ,

मैं भी तो जग मन भाई ,भाई |

मैंने ना बंसरी चुराई || 


Thursday, October 19, 2023

SARAL ( KSHANIKA )

            

                             सरल 


बिल्कुल सीधा - सादा सा ,एक शब्द है सरल ,

बहते पानी सा ,मीठी बानी सा ,एक शब्द है तरल ,

जो बहता रहता है ,जो हर जगह सजता रहता है || 


दिन में चमकते सूरज जैसा ,रात में चम -चम चंदा जैसा ,

अँधियारे को दूर करे ,सारे जग को रोशन करे ,

जो बहता रहता है ,जो हर जगह सजता रहता है || 


पवन के समान ,जो उड़ता रहता हर ओर ,

पवन के समान ,जो जीवन देता रहता सबको ,

साँसों में बसता है ,जीवन दान देता है || 


ऐसा शब्द सरल है ,मगर क्या हम सरल हैं ? 

सबसे कठिन है ,सरल होना ,

सरलता अपनानी ही ,सबसे कठिन है || 


Tuesday, October 17, 2023

MUSKURAO ( JIVAN )

 

                        मुस्कुराओ 


  मुस्कुराओ दोस्तों !,

होठों पे भीनी सी मुस्कान लाओ ,

जिंदगी में सबक ,

इम्तिहान सभी कुछ मिलेगा ,

सभी कुछ पार करते जाओ ,

अपनी मंजिल तक पहुँच जाओ ,मगर मुस्कुराओ || 


हर सबक से कुछ नया सीखते जाओ ,

हर इम्तिहान से एक -एक सीढ़ी चढ़ते जाओ ,

रास्ते चाहे ऊबड़ - खाबड़ हों ,

हिम्मत से बढ़ते जाओ ,मगर मुस्कुराओ || 


जिंदगी कठिनाइयाँ पैदा करेगी ,

उनको हिम्मत से पार कर जाओ ,

जिंदगी में रुकावटें आएँगी ,

मगर तुम ना घबराओ ,

वादा करो जिंदगी और खुद से ,

कि तुम जिंदगी से कभी नहीं हारोगे ,

और फिर तुम मुस्कुराओ ,मुस्कुराओ || 


Monday, October 16, 2023

SATKARM ( JIVAN )

 

                            सत्कर्म 


जग में आए खाली हाथ ,हाथ पसारे जाएँगे ,

ना कुछ लेकर आए थे ,ना कुछ लेकर जाएँगे || 


उसने दिया भाग्य में  लिख कर ,

वही पा लिया हमने जग में ,

जीवन की बगिया में सुंदर ,कर्म के फूल खिलाए हमने || 


सत्कर्मों से जीवन महका ,

मुस्कानें फैली चारों ओर ,

कुछ खुश्बुओं के ,कुछ मुस्कानों के ,

रंग बिखर गए चारों ओर || 


जब सब यूँ मुस्काए तो ,

भाग्य - विधाता भी मुस्काया ,

उसने ही सबके लिए ,प्यार और आशीर्वाद बरसाया || 


Sunday, October 15, 2023

ADHJAL GAGARI ( KSHANIKA )

 

                          अधजल गगरी 


कहावत तो सुनी होगी ,"अधजल गगरी छलकत जाए ",

थोड़े ज्ञान को रखने वाला इंसान ही ,

अपना बखान करता है ,

ज्ञानी इंसान कभी दिखावा नहीं करता | 


समंदर बड़ा होकर भी ,अपनी सीमा पार नहीं करता ,

अपनी सीमा के अंदर ही रहता ,

लहरें भी कुछ दूर तक आती हैं ,

मगर फिर वापस समंदर में समा जाती हैं | 


इंसान छोटा है फिर भी ,

बड़ा होने का दिखावा करता है ,

अपनी सीमा को लाँघने का ,

निरंतर प्रयास करता है |  


तो बंधु ज्ञान बढ़ाओ ,खूब बढ़ाओ ,

मगर उसका प्रदर्शन मत करो ,

ज्ञान का इस्तेमाल ,सही जगह करो | 


Tuesday, October 10, 2023

SOCH HAMAARI ( SAMAJIK )

 

                       सोच  हमारी 


जीवन जब दिया उसने ,सब कुछ जग में दिया उसने ,

दिल में प्यार दिया उसने ,हर रिश्ता भी दिया उसने ,

हमने कैसे निभाया सबको ? ये सोच हमारी है | 


राहें सुंदर - सी दीं उसने ,कदम दिए आगे बढ़ने को ,

मंजिलें बनाईं सब उसने ,मेहनत तो हमने करनी थी ,

कोशिशें कीं क्या हमने ? ये सोच हमारी है | 


झोली भर दी  हमारी उसने ,इतने संसाधन हमें दिए ,

हमने उनको ख़त्म किया ,नहीं किया सदुपयोग उनका ,

ये क्या हाल किया उनका ? ये सोच हमारी है | 


रंगों की छवि और छटा ,उसने बिखराई चहुँ ओर ,

सुंदर जग था हमारा ये ,फूल खिले थे अँगना में ,

हमने उनको क्यों मुरझाया ? ये सोच हमारी है |

Monday, October 9, 2023

UDAAN HAUSLON KII ( JIVAN )

 

                     उड़ान हौसलों की 


हर पतंग उड़ती है ,डोर से बंध के ,

तुम उड़ो ,हौसलों की डोर से बंध के ,

इस डोर को लंबा कर लो दोस्तों ,

ताकि आसमान छू सको || 


अपने सपनों का आसमान ,

बहुत बड़ा और ऊँचा कर लो ,

डोर को मजबूती से सपनों से ,

बाँध लो ,और उड़ जाओ ऊँचे ,बहुत ऊँचे || 


जितने मजबूत हौसले होंगे ,उतनी ही ऊँची उड़ान ,

ऐसा होगा दोस्तों तभी तो , सजेगा सपनों का जहान ,

और तभी तो बाँहों में होगा ,

सपनों का खुला और ऊँचा आसमान || 


Sunday, October 8, 2023

MAHAABHARAT HAR YUG KII ( JIVAN )

 

                      महाभारत हर युग की  


एक महाभारत थी कौरव ,पांडव और कृष्ण की ,

आज के युग में है , एक नई महाभारत ,

उसमें भीष्म ,धृतराष्ट्र और पांडु तो हैं ,

मगर विदुर नहीं है ,कृष्ण नहीं हैं  || 


भीष्म के कंधों पर ,अतीव जिम्मेदारियाँ हैं ,

कोई सुख नहीं ,जीवन भर बोझ ढोना है ,

आज उनके साथ उनकी सहचरी है ,

जो साथ में भार ढोती है || 


धृतराष्ट्र आराम से बैठकर ,सुख भोगता है ,

साथ में उनका परिवार भी ,राजसी सुख भोगता है ,

कर्म चाहे उनके कैसे हों ? मगर सुख सारे हों || 


पांडु भी सुखों का भागी बनता है ,

कोई जिम्मेदारी नहीं ,उसके परिवार के हिस्से ,

कुछ दुःख ,कुछ सुख आते हैं ,

उनके साथ कृष्ण जो हैं || 


उस युग में भीष्म को ,तीरों की शैय्या मिली थी ,

आज के भीष्म को ,तानों के तीरों की शैय्या मिलती है ,

कुछ तो जीवन संवर जाए उनका भी ,

काश भीष्म को कोई कृष्ण ,

और कोई विदुर मिल जाएँ ,काश ऐसा हो जाए || 


Saturday, October 7, 2023

STREE (JIVAN )

  

                            स्त्री 


मैं एक स्त्री हूँ ,हाँ ,जी हाँ ! मैं एक स्त्री हूँ | 


बेटी बन के जन्मी मैं ,माता - पिता की बेटी जन्मी ,

मैं बेटी थी ,माता -पिता का भी तो जन्म हुआ ,

मेरे जन्म से पहले ,वो कहाँ थे माता -पिता ? 


दादी -दादा की पोती हूँ ,उनका भी तो रिश्ता जन्मा ,

बुआ - चाचा की बनी भतीजी ,नए रिश्ते में वो भी बँधे | 


नानी -नाना की नातिन हूँ ,जुड़ा है नया रिश्ता ,

मौसी -मामा की बनी भाँजी ,वो भी बँधे नए रिश्ते में | 


ये सब जन्म के रिश्ते हैं ,बाकि सब हैं बाद के ,

आज तो मैं किसी की पत्नी ,किसी की बहू ,

बहन और भाभी ,माँ हूँ ,सासू माँ हूँ ,नानी हूँ ,

हैं ना दोस्तों ,सुंदरतम रिश्ते ,

इन सबसे अलग आप सबकी दोस्त हूँ ,

मगर एक स्त्री हूँ मैं ,स्त्री ,स्त्री ,स्त्री | 


GARJAN ( JALAD AA )

 

                          जलद आ 


आया बदरा झूम के ,गर्जन के साथ ,

 साथ ले दामिनी को ,तर्जन के साथ ,

दोनों ही खिलखिलाएँ ,बच्चों को वो डराएँ ,

धीरे बदरा धीरे ,धीरे करो गर्जन | 


रिमझिम सी बरखा आई ,बच्चों का डर है भागा ,

खेलें वो बरखा में ,मौसम है भीगा - भागा ,

बच्चों के खेल देखे ,तो दोनों मुस्कुराए ,

दोनों की ही धीरे - धीरे ,कम हो गई गर्जन | 


बच्चों ने बनाई कश्ती ,कागज की ,और तैराई ,

जिधर को कश्ती तैरी ,उधर ही दौड़ लगाई ,

दोनों की आवाज में ,बच्चों ने आवाज मिलाई ,

बच्चों के मुकाबले ,कम थी दोनों की गर्जन | 


Thursday, October 5, 2023

THAHAKON SE (JIVAN )

 

                                 ठहाकों से 


अपना दिल तो अपना है ,खुश तुम उसे बनाओ ,

मुस्कानों की नदिया में ,डुबकी खूब लगाओ | 


जिम्मेदारी है तुम्हारी ,दिल को खुश कर जाओ ,

नहीं तो बंधु जीवन में ,उदासी ही तुम पाओ | 


खुश हो जाए दिल जब ,मुस्कानें उग जाएँ ,

तभी तो बंधु जग में तुम ,मुस्कानें फैलाओ | 


बात शुरू हो कैसी भी ? मुस्कानों में ढल जाए ,

खत्म ठहाकों से करो ,तभी तो ख़ुशी बढ़ जाए | 

 

Wednesday, October 4, 2023

NAMKEEN JAL ( RATNAAKAR )

 

                               नमकीन  जल  


गिरी शिखरों पर हिम बरसा ,खूब घना ,

शिखरों पर हिम की पर्त चढ़ी ,खूब घनी ,

शीशे से शिखर चमक उठे ,

रवि - किरणों ने उन्हें चमकाया ,

साथ ही गर्मी से पिघलाया ,

एक धार बनी ,उतर चली ,शिखर से नीचे को | 


आस -पास के शिखरों से भी ,जल धार उतर चलीं ,

उतरते हुए मिलीं धाराएँ ,बनी बड़ी जलधार ,

नाम मिला नदिया ,नदिया का वेग बढ़ चला ,

उछलती ,कूदती पहुँची ,नीचे मैदानी क्षेत्र में | 


अपने किनारों पर ,हरियाली फैलाती ,

भूमि उपजाऊ बनाती ,मधुर संगीत सुनाती ,

जल - जीवों को आश्रय देती ,नदिया दौड़ चली | 


मानव ने नदिया के जल का ,उपयोग खूब किया ,

उसे माता कहकर ,पूजा ,अर्चना की ,

दौड़ते -दौड़ते नदिया ,सागर तक पहुँच गई ,

और झट से सागर में समा गया | 

 

सागर से मिल ,नदिया का मीठा जल भी ,

नमकीन हो गया ,नमकीन हो गया ,

हाय रे ,पीने लायक नहीं रह गया ,

सागर वो मीठापन तूने क्या किया ? 

तूने किसको दिया वो मीठापन ? 


Tuesday, October 3, 2023

JEE LEN JARAA ( JIVAN )

 

                              जी लें जरा 


आओ दोस्तों ! इस जिंदगी में ,जी लें जरा ,

मुस्कानों के मोती ,अपने होठों में पिरो लें जरा | 


दोस्ती का रिश्ता ,दुनिया में सबसे प्यारा ,

इसी रिश्ते को मजबूत ,धागे में पिरो लें जरा | 


जग की भूल - भुलैयाँ में ,रिश्ते रह गए हैं बिखर के ,

जो रिश्ते सिमट सकें ,उन्हीं को दिल में समों लें जरा | 


प्यार से बंध जाएँगे जो रिश्ते ,ऐसे प्यारे रिश्तों को ,

बाँध कर फिर से ,रिश्तों को मजबूत कर लें जरा | 


जिंदगी रंग बदल देती है ,हर पल में ,

उन्हीं रंगों की सुंदरता से ,जिंदगी को रंग लें जरा | 


Monday, October 2, 2023

THANDII DHOOP ( CHANDRAMA )

 

                                ठंडी  धूप 


चाँद ने लिया है पूरा रूप ,चम -चम चमके उसका रूप ,

चाँदनी फैली है चहुँ ओर ,मानो चाँद की फैली ठंडी धूप | 


रात का अँधियारा भागा ,देख चाँदनी की ठंडी धूप ,

रात भी चमक गई है दोस्त ,मानो उसने भी बदला रूप | 


चाँद मुस्काया देख -देख ,धरा का उजला -उजला रूप ,

धरा भी शर्माई सी देख ,चाँद की मुस्कानों की धूप | 


काश हर रात चाँद चमके ,ऐसे -ऐसे और ऐसे ही ,

अँधियारा दूर भाग जाए ,ख़त्म हो अंधकार का कूप | 


बदले रात का काला रंग ,धरा भी नहाए चाँदनी में ,

चाँद भी नभ में मुस्काए ,चाँदनी जग में मुस्काए ,

बन के ठंडी धूप ,बन के ठंडी धूप | 


DO KOHINOOR ( DESH )

 

                            दो कोहिनूर 


1)  बापू --- 

तन पे लंगोटी ,हाथ में लाठी ,

साथ में जज़्बा देश - भक्ति का ,

जीवन अर्पण जब किया था उसने,

नहीं था जोर उसमें शक्ति का | 


बसी अहिंसा जेहन में थी ,भाई - चारा दिल में बसा था ,

ऐसे ही उसने देश में ,एकता का सूत्र कमर में कसा था | 


2 ) लाल बहादुर --- 

कद में छोटे ,भाव में बड़े ,एक ही आवाज में ,

सभी को एक सूत्र में पिरोने वाले ,एक ही राह में | 


देश के अन्नदाता (  किसान ) ,और देश के रक्षक ( जवान ),

सभी पिरोए एक सूत्र में ,ख़त्म किए देश के भक्षक ( दुश्मन ),

ऐसे थे हमारे देश के "दो कोहिनूर ",

शत -शत  नमन ,नमन और नमन | 


Sunday, October 1, 2023

MAHFIL ANOKHI ( JIVAN )

 

                        महफ़िल अनोखी  


रत्नाकर का आया फोन ,आओ सखि मेरे अँगना ,

कॉन्फ्रेंस कॉल थी वो ,जुड़े जलद और चंद्रमा ,

चारों हम थे मिलने को | 


मैं पहुँची रत्नाकर अँगना ,किया स्वागत उसने मुस्काकर ,

तभी नीचे आया चंद्रमा ,फैली चाँदनी चारों ओर ,

जलद भी आया मुस्काता ,थामे हाथ दामिनी और पवन का ,

खुश थे हम सब मिल करके | 


अब तो महफ़िल जमी हमारी ,

रत्नाकर की लहरें मचलीं ,दामिनी,चाँदनी चम -चम चमकीं ,

पवन उड़ती रही चहुँ ओर ,मुस्कानों की सुंदर डोर ,

बातों का बढ़ चला सिलसिला ,उठा ठहाकों का भी शोर ,

खुश थे हम सब मिल करके | 


साथ में चाय की चुस्कियाँ ,होठों पर थीं सबके मुस्कियाँ ,

स्नेस्क भी थे खूब चटपटे ,खाए गए चटखारे ले के ,

काश ये महफ़िल खूब चले ,प्यार सभी का फूले - फले ,

सबने मज़ा लिया भरपूर ,मज़ा लिया भरपूर |