Monday, October 16, 2023

SATKARM ( JIVAN )

 

                            सत्कर्म 


जग में आए खाली हाथ ,हाथ पसारे जाएँगे ,

ना कुछ लेकर आए थे ,ना कुछ लेकर जाएँगे || 


उसने दिया भाग्य में  लिख कर ,

वही पा लिया हमने जग में ,

जीवन की बगिया में सुंदर ,कर्म के फूल खिलाए हमने || 


सत्कर्मों से जीवन महका ,

मुस्कानें फैली चारों ओर ,

कुछ खुश्बुओं के ,कुछ मुस्कानों के ,

रंग बिखर गए चारों ओर || 


जब सब यूँ मुस्काए तो ,

भाग्य - विधाता भी मुस्काया ,

उसने ही सबके लिए ,प्यार और आशीर्वाद बरसाया || 


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