Wednesday, August 31, 2022

JHADII ( RATNAKAR )

                      झड़ी 

 

बदरा से जल की झड़ी लगी ,इतना जल बरसा कि ,

सागर की लहरें उफ़न चलीं ,तट की ओर ,

सागर ने बाँह पकड़ रोका ,वापस अपनी राह लौटाया | 

 

सागर की गहराई बहुत ही ,लहरों की ऊँचाई बहुत ही ,

कूद -कूद कर लहरें खेलें ,सागर का भी दिल खुश होता ,

लहरें उसकी दोस्त हैं घनी ,

उनकी ख़ुशी तो है सागर की ख़ुशी | 


सागर के दिल में है छिपा ,

लहरें सोचें लिए खजाना हम चलें बाहर ,

मगर वज़न ले चलना मुश्किल ,

वापस चलीं सागर की ओर ,

वापस चलीं सागर की ओर | 


Monday, August 29, 2022

SAJAA KAAFILA ( JIVAN )

 

             सजा काफिला 

 

घबराना नहीं कभी कठिनाइयों से ,

ऐ दोस्त ,अगर अंदर कुछ टूटन हो ,

तो आना पास हमारे ,

अपने दिल का हाल बताना | 


दोस्तों के पास तो हौसलों की ,

सिलाई होती है ,

आत्मविश्वास के धागों से कढ़ाई होती है | 


बढ़ता है आत्मविश्वास तो ,

कठिनाइयाँ कम हो जाती हैं ,

मुस्कुराहटें अपने आप बढ़ जाती हैं | 


दोस्ती का तो माहौल ही ऐसा है ,

कहकहों और खिलखिलाहटों ,

का काफिला सजा ही रहता है | 


Tuesday, August 23, 2022

AAJ KE BHOOT ( KSHANIKA )

 

                आज के भूत 

 

आया - आया जादूगर आया ,

बच्चों आओ ,साथ बड़ों के ,

लेकर जादू का चश्मा ,

लगाएगा  तो देख पाएगा ,

जो कुछ दिखता सब को ,

और जो नहीं दिखे किसी को ,

दबा ,ढका ,छिपा ,उघड़ा ,सभी कुछ | 


देखो अब आया है तांत्रिक ,

अपना तंत्र - मंत्र का चश्मा ,

लगा के देखेगा ,दुनिया की दबी ,

छिपी वो सभी आत्माएँ , जिन्हें सब कहते ,

भूत ,प्रेत ,जो नहीं दिखते हैं औरों को | 


आज के वैज्ञानिक युग में ,नया है चश्मा ,

जिसका नाम माइक्रोस्कोप ,

जिसका प्रयोग डॉक्टर करते ,

जो आज के तांत्रिक हैं ,

आज के भूत वायरस हैं ,

अलग -अलग नाम होता ,बीमारी के अनुसार ,

दवा रुपी भभूति से उन भूतों को मारते हैं ,

मरीज को ठीक करते हैं ,

आज समय बदला है बंधु | 


Tuesday, August 16, 2022

SAAWAN ( JALAD AA )

 

                          सावन 

 

सावन की झड़ी लगी है बंधु ,

बदरा की गर्जन भी शामिल है ,

ऐसे मौसम में तो बंधु ,

दामिनी की चमकन भी शामिल है | 

 

बिना दामिनी बदरा का वज़ूद क्या है ? 

बिना बदरा सावन कुछ नहीं ,

बदरा और दामिनी दोनों मिलें तो ,

सावन है ,सावन है बंधु ,सावन है | 

 

चारों ओर जल ही जल है ,

हर तरफ छायी हरियाली है ,

सब ओर पेड़ - पौधे खुश हैं ,

पूरी धरा ही मानो तृप्त है | 


पेड़ों पर झूले लगने से ,

बच्चे - बड़े झूलते बारी - बारी ,

यही तो सावन का महीना है बंधु ,

अभी तो धरा तृप्त हो गई है सारी | 


Sunday, August 14, 2022

AMRIT MAHOTSAV ( DESH )

 

 

 

                     अमृत महोत्सव 

 

कितने थे वीर देश के ? जान की निछावर देश पर ,

कितने थे लाल माँओं के ?हुए कुर्बान देश पर | 


फाँसी पे लटके कुछ तो ,सीने पे गोली खाई थी ,

पर सब किसी के दिल में बसी ,भारत की माई थी | 


आज़ादी मिली जब देश को ,सब ही खुशियों में डूब गए ,

कुछ - कुछ की तो पलकों में ,ख़ुशी के आँसू तैर गए | 


देश के लाडलों के बलिदान ने ,दिलाई आज़ादी देश को ,

लहराया तिरंगा अपना ,लहराया तिरंगा अपना | 


आज हुए पिचहत्तर बरस ,अमृत महोत्सव आ गया ,

आज़ाद भारत अपना आज ,पिचहत्तर बरस का हो गया | 


Friday, August 12, 2022

BACHCHE - TAARE ( CHANDRAMA )

 

                           बच्चे - तारे 

 

उतर आ चाँद धरती पर ,साथ में ले के तारों को ,

धरती मेरी अनोखी है ,मज़ा आएगा तारों को | 


खेलेंगे तारे बच्चों संग ,सभी खुश होते जाएँगे ,

तुम भी खुश हो जाओगे चंदा ,मज़ा आएगा बच्चों को | 


खेलों का रूप तो चंदा ,यहाँ दिन ,दिन बदलता है ,

कोई धरती पे चलता है ,कोई पानी पे चलता है | 


हवा में भी तो उड़कर के ,पकड़ते एक - दूजे को ,

इन्हीं सब खेलों में तो ,मज़ा आएगा बच्चों को | 


चंदा तुम खुश होगे ,मैं भी तो खुश हूँगी ,

जो भी देखेगा ये खेल ,वही तो बहुत खुश होगा ,

मज़ा आएगा तारों को ,मज़ा आएगा बच्चों को | 


Wednesday, August 10, 2022

BAHUT SARA PYAR ( GEET )

   

              बहुत सारा प्यार 

 

तू है मेरा भाई ,मैं हूँ तेरी बहना ,

तू मान मेरा कहना ,मैं मानूँ तेरा कहना | 

 

मैं हूँ तेरा भाई ,तू है मेरी बहना ,

तू मान मेरा कहना ,मैं मानूँ तेरा कहना | 

 

हम हैं नानी ,नानू ,तुम हो नाती ,नातिन ,

तुम मानो हमारा कहना ,हम मानें तुम्हारा कहना | 

 

साथ हम रहेंगे ,प्यार हम करेंगे ,

बहुत ,बहुत ,बहुत सारा प्यार | 

 

Monday, August 8, 2022

MACHALTEE LAHAREN ( RATNAKAR )

 

                        मचलती लहरें 

 

एक अनोखी दुनिया है बसी ,तेरे अंदर -ऐ -सागर ,

रत्नों का है तू आकर ,तभी कहलातातू रत्नाकर | 

 

हर रंग छिपा है तेरे अंदर ,

मगर बाहर से है पानी - पानी ,

कोई रंग ना दिखाई दे ,

बस परछाईं दिखे है आसमानी | 

 

लहरें मचलतीं  तेरी शोर यूँ मचातीं ,

बाहर के लोगों को आवाज़ दे बुलातीं ,

खिलखिलाहटों से उनकी ,

सभी के मन पास आने को मचल  मचल जाते | 

 

हम भी तो तेरे पास आकर ,

लहरों में हैं तैरे ,लहरों में हैं डूबे ,

खेलों का सिलसिला ऐसा ,

चलता रहेगा यूँ ही सागर ,रत्नाकर |