Wednesday, September 30, 2020

PREM KAHAANII ( PREM )

     प्रेम  कहानी


उनकी आँखों की भूलभुलैयाँ में ,

रस्ता हम तो भूल गए जी ,

चक्रव्यूह अभिमन्यु वाला ,

हम तो उसमें फँस गए जी |


प्यार के सागर में हम डूबे ,

अब तक उबार ना पाए जी ,

खेवैया तो मिला नहीं है ,

कौन पार लगाए जी ?


प्यार की बगिया खिलती जाए ,

जीवन यूँ ही बीते जी ,

खुशियों के ये फव्वारे ,

इसी तरह से छूटें जी |


कह दी हमने प्रेम कहानी ,

आप सभी ने सुन ली जी ,

जीवन बीता जैसे अब तक ,

आगे भी अब बीते जी |




JINDGI KI CHHANV TALE

    जिंदगी की छाँव तले 


जिंदगी की छाँव तले ,जब हम तुमसे मिले ,

             प्यार के तब फूल खिले |


जिंदगी तब मुस्काई,प्यार की बज उठी शहनाई,

              गूँज उठी सारी अँगनाई |


रुक गया समय वहीं ,साज बज उठे वहीं ,

               गीत सज उठे वहीं |


रंग भी बिखर गए ,जीवन को रंगीं कर गए ,

               इंद्रधनुष कर गए |

 

Monday, September 28, 2020

PYAARE SAPNE ( KSHANIKA )

       प्यारे  सपने 


नींद में आते हैं रोज़ सपने ,

वो सपने जो हैं मेरे अपने ,

मीठे सपने ,कुछ खट्टे सपने ,

प्यारे सपने ,दुलारे सपने | 


सुबह हुई ,नींद खुली ,तो गुमे सपने ,

कुछ याद रहते ,कुछ भूले सपने ,

ढूँढे कोई कैसे उन्हें ?

जो गुमे सपने |


कुछ सपने जागते हुए ,

खुली आँखों से देखे सपने ,

कुछ पूरे हुए ,कुछ बचे सपने ,

कैसे करें हम वो पूरे सपने ?

 

चलो छोड़ो सभी तो थे अपने ,

नन्हें - मुन्ने ,प्यारे -प्यारे सपने |

 

GHADI ( MUKTAK )

             घड़ी 


मेरी घड़ी टिक -टिक करती ,

टिक -टिक करती समय बताती ,

सदा चले ये कभी ना रुके ,

समय हो जैसा सभी बताए ,

प्यारी है ये ,न्यारी है ये | 


Sunday, September 27, 2020

GAVAAHI KAUN DEGAA ( MURDER MISTRI )

     गवाही कौन देगा ?


अरमान हों या सपने ,दोनों तो होते अपने ,

उनके क़त्ल की गवाही ,कौन देगा ?


दिल गवाह अरमानों के क़त्ल का ,

मगर ज़ुबां न होती दिल की ,

कैसे देगा वो गवाही क़त्ल की ?


नींद गवाह सपनों के क़त्ल की ,

मगर नींद तो सोयी हुई है ,

कैसे देगी वो गवाही क़त्ल की ?


जब गवाह नहीं ,सबूत नहीं ,

कैसे कातिल मिलेगा ?

कैसे सजा मिलेगी ?

Saturday, September 26, 2020

CHHUKK- CHHUKK - CHHUKK ( GEET )

     छुक - छुक -छुक


कोरोना की रेलगाड़ी चली ,छुक -छुक -छुक ,

बीच के चौराहे बोलें ,रुक -रुक -रुक |


गाड़ी ऐसी जाए ,बीमारी फैलाए ,

तभी तो सभी ,घरों में गए ,छुप -छुप -छुप |


ये गाड़ी तो ऐसी ,दुनिया भर में जाए ,

अपनी ये बीमारी ,सब में फैलाए ,

ये बीमारी बनी महामारी ,

ना कोई बचाव ,ना कोई इलाज़ ,

कैसे इसको कहें हम ,रुक -रुक -रुक |


कोई तो ऐसा बम बनाओ ,

इस रेलगाड़ी को मिटाओ ,

जीवन की गाड़ी को चलाओ ,

तभी तो जिंदगी होगी ,खुश -खुश -खुश |

Friday, September 25, 2020

SABSE PYAR KARATE HAIN HAM ( PREM KATHA )

              सबसे करते हैं प्यार हम 

 

प्यार जिंदगी ,प्यार हर ख़ुशी ,प्यार ही तो साँस है ,

प्यार में बसा हर रिश्ता ,प्यार ही तो हर आस है | 

 

प्यार ही परिवार,प्यार ही मुस्कान ,प्यार वार ,त्योहार है ,

प्यार पे टिकी जिंदगी है ,ये जीवन का आधार है | 

 

 डूबकर हरेक जीव ,बिताता अपनी जिंदगी ,

प्यार से ही तो हम ,करते अपनी बंदगी | 

 

प्यार धूप है ,प्यार चाँदनी ,प्यार ही तो साया है ,

जीवन की तपती धूप में ,प्यार ही तो छाया है | 

 

वही प्यार हम सबसे करते ,दुनिया में मानव मात्र से ,

हम तो चाहें ,सुखमय सबको ,करदें प्यार के पात्र से |

UNSULJHI MURDER MISTRI (MURDER MISTRI )

 

अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री 


थे मेरे भी कुछ अरमान ,

थे मेरे भी कुछ सपने ,

जिनको पूरा करने की ,

खूब की कोशिश हमने |


कुछ पूरे हुए अरमान ,

कुछ पूरे हुए सपने ,

बाकि के नहीं हुए पूरे ,

टूटे वो अरमान ,टूटे वो सपने |


किसने वो तोड़े अरमान ?

किसने वो तोड़े सपने ?

किसने उनका खून किया ?

किसने उनका क़त्ल किया ?


जाकर पता लगाए कौन ?

सभी खड़े हैं देखो मौन ,

नहीं सबूत है कोई भी ,

नहीं गवाह है कोई भी |


ये मर्डर मिस्ट्री यारों ,

रह जाएगी अनसुलझी ,

तुम ही कुछ कर पाओ तो ,

सच का पता लगाओ तो |

Wednesday, September 23, 2020

ANGOOTHI PYAR KI ( MANORANJAN KATHA )

  अँगूठी प्यार की 


गहने प्यारे नारी को ,

इसीलिए तो दोस्तों ,

वो गहनों से सजती है ,

मौका चाहे वो दिल से ,

सजने और सँवरने का ,

गहनों से यूँ सजने का |


सोना ,चाँदी ,हीरे ,मोती ,

सब ही उसको प्यारे हैं ,

उसकी आँखों के तारे हैं ,

गहनों में है एक अँगूठी ,

उसके कई प्रकार हैं |


एक अँगूठी सगाई की ,

एक अँगूठी प्यार की ,

सगाई वाली तो होगी दोस्तों ,

सोने की या हीरे की ,

चम -चम ,चम - चम करती सी |


मगर प्यार की होती है ,

सबसे अलग ,सबसे निराली ,

ये हो सकती है दोस्तों ,

फूल और तिनके से बनी ,

खुश्बु और रंगों से सजी ,

दिल के बहुत ही करीब ,

बना के देखो ,पहन के देखो ,

इस सबसे प्यारी अँगूठी को ,

ये अँगूठी प्यार की ,

प्यार की ,मनुहार की |

Tuesday, September 22, 2020

TOPI KA MIZAZ (SHORT STORY )

    टोपी  का मिज़ाज 


टोपी सबके सिर पर सजती ,सिर को ढक कर ठंडा रखती ,

मौसम बदले पर टोपी ना बदले ,वो तो सिर्फ मिज़ाज बदलती | 


भिन्न -भिन्न आकर की टोपी ,भिन्न -भिन्न नामों की टोपी ,

एक बनी जवाहर टोपी ,तो दूजी है ,बच्चों की टोपी | 


बच्चे टोपी पहन थिरकते ,दर्पण में खुश हो देखते ,

उनको अच्छी लगती टोपी ,सुंदर से आकार की टोपी | 


फिल्में भी ना इससे अछूतीं ,वो टोपी के टॉपिक को छूतीं ,

जैसे ---- " तिरछी टोपी वाले ,बाबू भोले -भाले ,"

और ---- " ऐ मेरी टोपी किधर चली " |

UNKI BACHCHI ( SHORT STORY )

  उनकी  बच्ची 


सुनते हुए किलकारियाँ ,घरों में सभी के ,

मायूस वो हो जाते थे ,सोच में पड़ जाते थे ,

ईश्वर ने हमें इस सुख से ,वंचित क्यों रखा ?


फिर डॉक्टर ने सुझाया ,एक रास्ता दिखाया ,

नहीं मायूस हो जाओ तुम ,

खुशियाँ मिल जाएँगी ,तुम्हें भी और उसे भी ,

गर उसे अपनाओ तुम |


उसे ? किसे ? वो हैरान थे ,

प्रश्न उनके चेहरे पर था ,तभी डॉक्टर बोली ,

एक एक्सीडेंट में ,एक बच्ची क छोड़कर ,

सभी परिवार जन स्वर्गवासी हो गए ,

बच्ची है सिर्फ दो माह की ,

तुम उसे अपनाओ ,खुशियों को बढ़ाओ ,

सुन सारी बात दोनों खिल उठे |


बच्ची घर लाए ,मानो रोशनी लाए ,

कागज़ी कार्यवाही ,दत्तक पुत्री ,

माता -पिता बनकर ,

खुशियों का आर ना पार था ,

दोनों हुए व्यस्त ,पुत्री के साथ व्यस्त ,

अब तो जिंदगी हुई मस्त |


उनकी भी संतान है ,

खुशियों की खदान है ,

उनके आँगन में भी ,

किलकारियों का गान है ,

भाग्य तू बलवान है |

 

Sunday, September 20, 2020

KANOON OR FAISLA ( SHORT STORY )

             कानून  और फैसला 


कानून बना ऊपर वाले का ,

सृष्टि रची उसने ऐसी ,

उसे रखी जाए वैसी ,

उसे ना कोई बर्बाद करे ,

रिश्तों में आबाद करे ,

नदियां सब ही साफ रहें ,

जल को ना बर्बाद करें ,

हवा शुद्ध रहे हरदम ,

पेड़ों को काटें ना हम ,

नए -नए वृक्ष उगाएं ,

और वायु को शुद्ध बनाएं | 


कानून नहीं हमने माना ,

ऊपर वाले को ना पहचाना ,

काटे पेड़ ,हवा अशुद्ध ,

जल को भी बर्बाद किया ,

प्रकृति से छेड़छाड़ करके ,

उसको हमने बर्बाद किया ,

ऊपर वाले ने किया फैसला ,

दिया दंड हम सब को ही ,

आज जो हम सब घर में बंद ,

यही है उसका हमको दंड |

OFFICE YA VIDYALAY ( SHORT STORY )

   ऑफिस या विद्यालय     


ऑफिस यानि कार्यालय ,दफ्तर हो या विद्यालय ,

प्यारा लगता है मुझको ,अपना ये दूजा आलय |


मैं तो इससे प्यार करूँ ,समय नहीं बर्बाद करूँ ,

बच्चों में रम जाती मैं ,उनमें ही खो जाती मैं |


बच्चे मेरे प्यारे हैं ,सारे जग से न्यारे हैं ,

कहना मेरा माने हैं ,मुझको खूब पहचानें  हैं |


करें पढ़ाई वो जी भर ,कभी करें शैतानी जो ,

और मैं चुप हो जाऊँ तो ,मुझको खूब हँसाएँ वो |


प्यार बहुत है आलय से ,प्यार बहुत विद्यालय से ,

कर्म की मैं पूजा करती ,कर्म से ना पीछे हटती |





Friday, September 18, 2020

MUKHAUTE ( SAAMAJIK )

 

         मुखौटे 


ओढ़ मुखौटे दुनिया भागे ,

एक - दूजे के पीछे ,

आगे वाले को खींचें  पीछे ,

ऊपर वाले को नीचे |


रंग बदलती जाए दुनिया ,

रंग बिखराए लाखों ,

इंद्रधनुष में रंग सात हैं ,

दुनिया  में हैं लाखों |


बोल अनोखे हैं दुनिया के ,

सामने - पीछे अलग -अलग ,

सामने बोलें मीठे -मीठे ,

पीछे से हैं कड़वे  - कड़वे  |


दुनिया के ये रंग हैं कैसे ?

कैसे हैं ये मुखौटे ?

एक के ऊपर एक चढ़ा है ,

गिन ना पाऊँ मुखौटे |

 

Thursday, September 17, 2020

AADHA - AADHA ( SHORT STORY )

     आधा  -  आधा 


पानी भरा गिलास में ,पूरा भरा गिलास ,

आधा मैंने पी लिया ,कितना भरा गिलास ? 

किसी ने कहा ,आधा खाली ,

किसी ने कहा ,आधा भरा ,

पर गिलास तो ,पूरा ही भरा था ,

आधे में पानी था ,तो आधे में हवा थी | 


मानव भी इसी प्रकार से ,अच्छाई ,बुराई का पुतला है ,

ना कोई पूरा अच्छा है ,और ना ही पूरा बुरा है | 


जिसे हम अच्छा मानते हैं ,उसमें भी थोड़ी बुराई है ,

जिसे हम बुरा कह जाते हैं ,उसमें भी थोड़ी अच्छाई है | 


अच्छे को हम कहते इंसान ,बुरे को कह देते शैतान ,

मगर दोनों ही तो होते हैं ,थोड़े इंसान , थोड़े शैतान | 


शैतान लगने वाले की ,थोड़ी अच्छाई बढ़ जाए ,

यूँ प्यार उसे हम दे दें तो ,अच्छा इंसान  बन जाए | 

 

SERIAL KILLER ( SHORT STORY )

   सीरियल किलर 


आज तो यारों ,कहें कहानी,

एक सीरियल किलर की ,

टॉपिक ऐसा मिला है हमको ,

प्रतिलिपि के खज़ाने से |


पहला अर्थ है इसका यारों ,

CEREAL यानि ,गेहूँ ,चावल ,मक्का आदि ,

को किल करने वाला ,

उसमें सबसे पहले आता ,बड़ा -सा टिड्डी दल ,

फिर हैं भिन्न -भिन्न कीड़े -मकोड़े |


दूसरा अर्थ है टी.वी. SERIALS के किलर ,

जिसको खलनायक कहते हम ,

कुछ खलनायक तो करें ना किल ,

मगर कुछ -कुछ तो किल करते |


तीसरा अर्थ है मानव रूप में ,

सीरियल किलर का ,

उनमें से कुछ अपने लिए ,

और कुछ पैसे के लिए ,

लगातार किल करते |


अब नंबर आता है यारों ,

एक नए सीरियल किलर का ,

कोरोना नामक वायरस का ,

जो मारता एक ही दिन में हजारों ,

लाखों मार चुका है अब तक ,

ना जाने कितने मारेगा ?


इस कोरोना को मारे कौन ?

ना मारे तीर ,ना तलवार ,

बचाए ना इससे कोई ढाल ,

ना मारे इसको कोई गोली ,ना ही बम ,

ना आए ये बदरा के वश में ,

ना सुखाए इसको सूरज की धूप |


शायद शिव का तांडव ही ,

इससे दुनिया को बचाए ,

आ जाओ शिव उतर कैलाश से ,

तांडव तुम ही मचाओ ,दुनिया को तुम ही ,

इस सीरियल किलर से बचाओ |

Tuesday, September 15, 2020

HAM DOOBE UNKI AANKHON ME (SHORT STORY )

 

  हम डूबे उनकीआँखों में 


नदिया में डूबे ,ना सागर में डूबे ,

हम जाकर डूबे , उनकी आँखों में |


डूबे तो डूबे , ऐसे डूबे ,

उभर ना पाए , उनकी आँखों में |


साँसें भी रुक गईं थीं ,

धड़कनें भी थम गईं थीं ,

डूब के मर गए हम ,उनकी आँखों में |


नया जन्म हुआ तभी ,

हमारी साँसों का , हमारी धड़कनों का ,

हमने नया सा जन्म लिया ,उनकी आँखों में |


ये नया जन्म था दोस्तों ,

उनको प्यार करने वाली प्रेमिका का ,

उनकी दीवानी आज की मीरा का ,

क्योंकि हम डूबे ,उनकी आँखों में |



 

Monday, September 14, 2020

TERE JAISA YAAR KAHAN ? ( SHORT STORY )

     तेरे जैसा यार कहाँ 


बात जब दोस्ती की है ,तो दोस्तों तक जाएगी ,

तभी तो रिश्तों का रंग ,जीवन में ये बिखराएगी|


एक दोस्त है मेरी ,बरस बहुत बीत गए ,

छोटे -छोटे से थे हम ,जब हम दोस्त बन गए |


साथ -साथ हम पढ़े ,खेले साथ -साथ हम ,

शादी के बाद अलग -अलग ,शहर में बसे थे हम |


मगर प्यार दोनों का ,नहीं हुआ कभी भी कम ,

मौका मिला जब भी ,मिलते -जुलते रहे हम |


आज हम दोनों के ही ,भरे -पूरे परिवार हैं ,

आज भी हम दोनों ही ,एक -दूजे के यार हैं |


उसके हसबैंड कहते हमें ,ये लँगोटिया यार हैं ,

उनके इस कमेंट पर हँसते ,हम दो यार हैं |


आगे भी सिलसिला यूँ ,ही जारी रहेगा दोनों का,

ईश्वर से दुआ है अपनी तो,जीवन यूँ ही बीते दोनों का |



 

DANCE CLASS ME DOSTI ( SHORT STORY )

   डांस क्लास में दोस्ती 


नृत्य क्लास में पहुँच के हमने ,

कदम ताल सीखी पहले दिन ,

उसका फिर अभ्यास किया ,

हमने तो पूरे दिन |


दूजे दिन फिर हाथ चलाए ,

हाथ और पैरों क मित्रों ,

तालमेल ना बैठा पाए ,

हाथ चलें तो पैर रुकें ,

और पैर चलें तो हाथ रुक जाएँ |


सखियाँ भी बन गईं वहाँ पर ,

वो भी हमारी जैसी मित्रों ,

उनके भी हाथ -पैरों की भाषा ,

अपने जैसी थी मित्रों |


कुछ -कुछ सीख रहे थे हम ,

कुछ -कुछ हम ना सीखे ,

टीचर से डाँट भी खाई ,

फिर भी थोड़ा ही सीखे |


सखियों संग मिलकर हम ,

अभ्यास नृत्य का करते ,

पर टीचर के सामने हमारे ,

हाथ ,पैर ना लय में चलते |


सीख गए फिर भी  मित्रों ,

हम थोड़ा -थोड़ा नृत्य ,

आज तो हम कर सकते मित्रों ,

मन -भावन सा नृत्य |

HINDI DIVAS

 

         हिंदी दिवस      


माता की भाषा है हिंदी ,

पिता का व्यवसाय है हिंदी ,

बच्चे का पहला कदम है हिंदी ,

नन्हीं का पहला बोल है हिंदी ,

स्कूल का पहला दिन है हिंदी ,

आगे बढ़ता कदम है हिंदी ,

कॉलेज में लिखा नाम है हिंदी ,

कॉलेज के बाद व्यवसाय है हिंदी ,

शादी और परिवार है हिंदी ,

बोल और व्यवहार है हिंदी ,

हम हैं हिंदी देश है हिंदी ,

मातृभाषा और राष्ट्रभाषा है हिंदी ,

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ |

Sunday, September 13, 2020

BAND ZUBAN ( PREM )

     

  बंद ज़ुबां

 

पहली मुलाकात थी वो ,या थी पहेली ,

वो आँखों का मिलना ,पलकों का झुकना ,

क्यों हमारी जुबां ,बंद हो गई थी ,

भाव जग गए थे और ,शब्द सो गए थे ,

ये सब क्या हुआ था ? बता तो -ए -सहेली| 


वो बादलों की छाँव ,ठंडी हवा के झोंके ,

सब कुछ तो साथ में था ,पर हम कहाँ पे खोए ? 

फूलों की खुश्बुएँ भी ,हमको नहीं हैं आतीं ,

ये किसका असर हम पर ?बता तो -ए -सहेली | 


चल छोड़ सब सहेली ,बूझ ये पहेली ,

दिल मेरा तो खो गया है ,किसी और का हो गया है ,

क्या वापस मिलेगा मुझको ?या हो रहेगा उसका ,

क्या एक मुलाकात में ,बेदिल मैं हो चुकी हूँ ? 

शर्म -ओ -हया का आँचल ,मैं ओढ़ चुकी हूँ |

 

Friday, September 11, 2020

RISHTA TUMSE ( JIVAN )

 

                      रिश्ता  तुमसे 


सबसे सुंदर ,सबसे पावन ,रिश्ता माँ बच्चों में ,

तभी सिर ईश्वर का भी ,झुक जाता माँ चरणों में |


माँ बच्चों की जननी बन ,अपना दूध पिलाती ,

बच्चों का पोषण करने में ,अपना समय बिताती |


हर इच्छा बच्चों की पूरी ,करने में जुट जाती ,

दुनिया की पैनी नज़रों से ,बच्चों को बचाती |


मीठी - मीठी नींद बुलाने ,माँ ही लोरी गाती ,

जरा सी खाँसी बच्चों की ,उसको सारी रात जगाती |


बच्चों के लिए हरेक माँ ,सपने खूब सँजोती ,

वो सपने पूरा करने में ,पूरी शक्ति खोती |


ऐसा रिश्ता और ना कोई ,दुनिया भर में मित्रों ,

पूजनीय है यह रिश्ता ,वंदनीय है मित्रों |

Thursday, September 10, 2020

DOST SABHI KA (SHORT STORY )

 

        दोस्त सभी का 


दोस्त अनेकों दुनिया में ,

कुछ पक्के ,कुछ कच्चे ,

उन्हीं दोस्तों में होते हैं ,

कुछ झूठे ,कुछ सच्चे |


कच्चे और झूठे की तो ,

पहचान नहीं है बंधु ,

क्योंकि वे ही तो सबसे ,

मीठे बोलें हैं बंधु |


मगर जो गलती पर टोके ,

हैं वे ही सच्चे दोस्त ,

मानव में ही नहीं ,

जानवर भी हैं सच्चे दोस्त |


कुत्ता सबसे वफ़ादार है ,

वो है सच्चा दोस्त ,

कभी नहीं वह तोड़ता ,

अपने दोस्त का ट्रस्ट |


पुलिस भी उसको मानती ,

अपना सच्चा दोस्त ,

करे भरोसा उसी पर ,

करे उसी का ट्रस्ट |

RAIN BASERA ( SHORT STORY )

     रैन बसेरा 


दुनिया है रैन बसेरा ,ना तेरा है ना मेरा ,

दुनिया है रैन बसेरा |


जन्म लिया जब तूने धरा पर ,

जीवन तेरा दौड़ा दुनिया में ,

पल -पल ,छिन -छिन बीत रहे ,

दुनिया है रैन बसेरा |


सब रिश्ते यहीं बने हैं ,

सब दोस्त यहीं मिले हैं ,

ये सब यहीं छूटेंगे ,

दुनिया है रैन बसेरा |


परिवार यहीं बने हैं ,

पैसा भी खूब मिला है ,

खुशियों में डूबा तू है ,

कल क्या होगा ?क्या जाने तू ?

दुनिया है रैन बसेरा |


सब बीत जाएगा यूँ ही ,

सब रीत जाएगा यूँ ही ,

कुछ कर्म तू अच्छे कर ले ,

वही साथ जाएगा तेरे ,

दुनिया है रैन बसेरा |


सबके दिलों में घर कर ले ,

सब पे प्यार लुटा ले ,

घर -द्वार और सारा धन ,

ना साथ जाएगा तेरे ,

साथ में यही प्यार जाएगा तेरे ,

दुनिया है रैन बसेरा |



Wednesday, September 9, 2020

GRAH BRAHMAND KA ( JIVAN )

     ग्रह ब्रह्मांड का 

 

रचेता ने जब ब्रह्मांड बनाया ,

छोटी -बड़ी गेंदों को बनाकर ,

स्वयं रचेता खेल करे | 

 

कुछ में उसने भरा प्रकाश ,

अलग -अलग उछाल दिया उनको ,

बाकि गेंदें ले लें प्रकाश ,

उनके इर्द -गिर्द घूमकर | 

 

कहीं -कहीं जीवन उपजाया ,

एक हमारी पृथ्वी मित्रों ,

अन्य ऐसी हैं कितनी पृथ्वियाँ ? 

उनको नहीं हम जानते ,

उनको नहीं पहचानते | 

 

अपनी पृथ्वी पर सब कुछ है ,

दिया रचेता ने भरपूर ,

मानव लाभ उठाता सबका ,

जीवन खुशियों से भरपूर | 

 

कभी अगर मानव बढ़ पाए ,

दूर ग्रह का पता लगाए ,

वहाँ अगर जीवन पनपा हो ,

वहाँ के रहने वालों को ,

अपना दोस्त बनाए ,

तभी तो रचेता भी मुस्काएगा | 

 

CHANDA -- 1 ( GEET }

   चंदा -- 1 

 

चंदा -ओ -चंदा घूमें क्यों ?

तू सारी -सारी रैना ,

किसने चुराया हमको बतादे ?

तेरे दिल का चैना |


सारा जग सोए ,मीठी सी नींद में ,

तू ही क्यों जागे चंदा ,कारी -कारी रैना ?


चाँदनी की किरनों के रथ पर ,आजा तू नीचे ,

मीठी लोरी सुनकर मेरी ,पाएगा तू चैना |


सारी रातें जग के ,गर तू बिताएगा ,

थक जाएँगे चंदा ,तेरे चमकीले नैना |


बातें हमारी ,तू तो सुनता रहता ,

कभी तो सुना दे ,अपने तू बैना |


कभी तो बोल चंदा ,अपने मीठे बैन ,

कभी तो तेरे बैन सुने ,तेरी ये मैना |

SAYA ( SHORT STORY )

  साया 


जितने भी रिश्ते हैं यारों ,

सा कोई थोड़ा सात देता है ,

कुछ दूर तक तो चलता है ,

पर फिर छोड़ देता है |


एक साया अपना है यारों ,

जो साथ चलता रहता है ,

अँधेरे में साथ छोड़े तो ,

एक किरण में ही वो पनपता है |


सच्चे दोस्त जो भी हैं यारों ,

वो हरदम ही साथ चलते हैं ,

दूर वो नहीं कभी जाते ,

साए की तरह साथ चलते हैं |


किसी से गहरा प्यार हो जब तो ,

हम गीत ये गुनगुना सकते ,

"तू जहाँ -जहाँ चलेगा ,

मेरा साया साथ होगा "|

 

Monday, September 7, 2020

SUBAH KA SAPNA ( SHORT STORY )

   सुबह  का  सपना 


सुबह अँधेरे सपना आया ,

चंदा मेरे घर पर आया ,

उसने मेरा द्वार खटकाया ,

खोला तो वो मुस्काया ,

अंदर मैंने उसे बुलाया ,

हँसते -हँसते वो अंदर आया ,

सोफे पर उसको मैंने बिठाया |


पानी लाई जब दोस्तों ,

वो हँस दिया खाली पानी ,लाओ शिकंजवी ,

तब मैंने शिकंजवी का गिलास थमाया ,

पी लूँगा तुम अंदर जाओ ,

कड़क चाय बना कर लाओ |


चाय चढ़ा दी जब मैंने तो ,

अंदर से आवाज़ ये आई ,

फिंगर -चिप्स बना दो भाई ,

ये सुनकर मैं भी मुस्काई ,

मैंने तेल की कड़ाही ,गैस पर चढ़ाई |


बना चाय और फिंगर -चिप्स ,

मैं लेकर जब अंदर आई ,

चंदा मुस्का कर बोला ,

तू तो बड़ी कमेरी भाई ,

मैंने मुस्का कर चाय का कप ,

अपने होठों तक बढ़ाया ,

तभी आई आवाज़ ,

मम्मी ! बेटा मेरा गया था जाग ,

नींद खुली तब मेरी ,

तो सपना भी टूट गया था ,

आँखें खोल कर मैं मुस्काई ,

खिड़की से बाहर चाँद मुस्का रहा था |

 

 

Sunday, September 6, 2020

SAAL 2020 ( SHORT STORY )

                  साल  2020 


रोज रवि आता है ,रोज रवि जाता है ,

ऐसे ही हर दिन के बाद ,रत आती -जाती है ,

माह बिट जाते हैं ,साल बन जाते हैं ,

ऐसे ही साल , 2020 आया | 


शुरु से ही इस ,भारी -भरकम साल में ,

एक नन्हें ,अनदेखे , वायरस ने उधम मचाया ,

धीरे से ना चला वो ,तेजी से बढ़ गया ,

बन के महामारी ,दुनिया को है रुलाया | 


कैसे बचाए खुद को मानव ,कोई जरा बताओ ? 

आगे का रास्ता तो ,कोई जरा सुझाओ ,

कोशिशें तो मानव की ,हैं आज बहुत सारी ,

सफल वो कैसे होगा ,कोई तो समझाओ ? 


कैसे बीतेगा ये साल ,शुरु हुआ जो ऐसे ,

रोक दिया है जिसने एकदम ,क्रिकेट मैच का खेल ,

मानव को तो जैसे पिंजरे ,बंद कर दिया इसने ,

जल्दी बिताओ इसको भगवन ,खुल जाए ये जेल |

CHAKRA JIVAN KAA ( JIVAN )

                  चक्र  जीवन का

 

 मृत्यु जिसे समझे दुनिया ,वो क्या है ? 

शरीर ही नष्ट होता है ,आत्मा तो अमर है ,

परमात्मा का अंश है ,आत्मा तो अमर है | 

 

हम कपड़े बदलते हैं ,आत्मा भी बदलती है ,

वह शरीर पुराना छोड़कर ,नया धारण करती है ,

नए पुराने में कन्फ्यूजन ना हो हो ,इसलिए परमात्मा ,

पुराने जीवन की यादों को ,भुला देता है | 

 

जन्म नया मिलता है ,फूल नया खिलता है ,

चक्र जन्मों का तो ,इसी तरह चलता है ,

परमात्मा ने ये ,चक्र इसीलिए बनाया है ,

आत्मा भी उसी ,परमात्मा का ही साया है | 

 

घबरा मत इंसान ,इस मृत्यु जैसे शब्द से ,

पुराना जाएगा नहीं ,तो नया कैसे आएगा ? 

जीवन का चक्र ,कैसे चल पाएगा ? 

परमात्मा क्या हर दिन ,नई आत्माएं बनाएगा ?

Saturday, September 5, 2020

AAO BAPPA (GEET )

                                आओ  बप्पा 


गणपति बप्पा मोरया ,मोरया भई मोरया ,

आओ बप्पा आओ ना ,मेरे घर आओ ना | 


आके तुम मेरे घर ,मंगल तिलक लगाओ ना ,

                        आओ बप्पा आओ ना | 

शृद्धा -सुमन हैं पास मेरे ,उनको तुम स्वीकारो ना ,

                             आओ बप्पा आओ ना | 

मीठे -मीठे बने हुए ,मोदक भोग लगाओ ना ,

                           आओ बप्पा आओ ना | 

हम सब पे तुम प्यारे बप्पा ,आशीर्वाद बरसाओ ना ,

                               आओ बप्पा आओ ना |

BRAKE UP ( SHORT STORY )

                      ब्रेक अप 


ब्रेक अप हुआ जो मेरा ,दिल जो टूटा मेरा ,

चाँद जा छिपा है ,बादलों के पीछे ,

चाँदनी सिमट गई है ,अपने अंचरा के पीछे ,

दोनों ने अपने अश्रु ,बादलों को दे दिए हैं | 


ब्रेक अप की बात सुनकर ,बदरा भी रोया जोरों ,

जल -थल हुई है दुनिया ,बदरा जो रोया जोरों ,

दुनिया हुई परेशां ,बदरा के अश्रुओं से 

पर क्या करे बदरा भी ,मेरे ग़म में रो दिया है ? 


बदरा के साथ ही तो ,दामिनी भी परेशां है ,

साथ में बदरा के ,कड़की है दामिनी शोरों ,

दामिनी के शोर से ,पंछी भी डर गए हैं ,

अपने घोंसलों में ,घबरा के छिप गए हैं | 


सब कुछ हुआ है मित्रों ,पर उसको ना खबर है ,

ब्रेक अप किया है जिसने ,वो तो बेखबर है ,

कोई उसको ये बताए ,जाकर उसे सुनाए ,

उसने जो किया है ,क्या उसका असर है ?

NAMAN ( MUKTAK )

 

              नमन 


नमन सभी गुरुजनों को मेरा ,

पहला नमन माँ को करती ,

पहली गुरु वही थीं ,

दूजा नमन पिता को जाता ,

दूजे गुरु वही थे ,

फिर सभी वो गुरु जिन्होंने ,

ज्ञान का पाठ पढ़ाया ,

ज्ञान का मार्ग दिखाया | 


दोस्त हमारे गुरू थे अपने ,

उन्हीं ने प्यार का पाठ पढ़ाया ,

उन्हीं दोस्तों ने खुश रहना ,

दुनिया में हमें सिखाया | 


प्रकृति हमारी गुरू है सच्ची ,

उसने जीने और जीने दो ,

इसके मायने हमें बताए ,

दूसरों को देकर खुश होना ,

हमें उसी ने सिखलाया | 


VAR DE (MUKTAK )

                 वर दे 

 

वर दे ,वीणावादिनी वर दे ,

अपनी मधुर वीणा के स्वर ,

मेरे अंतर में भर दे ,

वर दे ------- | 

ज्ञान का वरदान दे कर ,

मेरे अंतर को प्रकाशमान कर दे ,

वर दे ------ | 

 

SAPNA LEKHAK KA (SHORT STORY )

 सपना  लेखक का 


हर लेखक का होता सपना ,

सुंदर हो उसकी हर रचना ,

खूबसूरती उसके दिल की ,

पा जाए उसकी हर रचना |


शब्द हों मधुरिम ,भाव हों गहरे ,

बूँदों में समंदर बहता हो ,

जीवन की सच्चाई जिसमें ,

रिमझिम सा मेघ बरसता हो |


लेखनी भावों से भरी रहे ,

पाठक गण उसको प्यार करें ,

ऐसी रचना वो रच पाए

लेखन के द्वारा ही लेखक ,

भावों को लिखता रहता है ,

पाठक गण तक पहुँचाता है ,

अपने दिल का जो हिस्सा है |

Friday, September 4, 2020

STREE HOON MAIN ( SHORT STORY )

                        स्त्री हूँ मैं 

 

एक स्त्री हूँ मैं ,हाँ जी हाँ स्त्री हूँ मैं ,

परिवार वालों के लिए ,एक मिस्त्री हूँ मैं ,

                            एक स्त्री हूँ मैं | 

बेटी ही बन के आई ,मैं इस संसार में ,

माता -पिता तो जैसे ,मिले उपहार में ,

भाई -बहिनों के लिए ,जीजी हूँ मैं ,

                           एक स्त्री हूँ मैं | 

दोस्त मिले ,सखियाँ मिलीं ,खेलों की कलियाँ खिलीं ,

पढ़ाई और खेलों में डूबके ,आगे ही चली हूँ मैं ,

                                     एक स्त्री हूँ मैं | 

शादी के बाद ससुराल पहुँची ,प्यार की दुनिया सजी ,

सपनों में जैसे चलते -चलते ,जिंदगी आगे बढ़ी ,

जीती -जागती प्यारी सी ,एक गुड़िया मिली ,

वो ही तो बिटिया मेरी ,

                                एक स्त्री हूँ मैं | 

जननी हूँ अपने बच्चों की ,प्यारा सा परिवार है ,

कर्त्तव्य सभी अपने हैं ,कोई ना अधिकार है ,

कर्त्तव्य कब जुड़ गए ,अधिकार क्यों खो गए ? 

क्या इसलिए क्योंकि ---- 

                                  एक स्त्री हूँ मैं |

PRAKRITI (PRERAK KATHA )

                         प्रकृति 


सुंदर -सुंदर एक सखि ,जिसका नाम प्रकृति ,

रिमझिम बदरा सी बरसती ,कड़क दामिनी सी चमकती | 


पवन की है वो तो हमजोली ,बदरा संग करती है खेली ,

बरसे रिमझिम सी फुहार ,कभी -कभी मूसलाधार | 


जल बह कर नदिया में जाए ,नदिया कल -कल करती जाए ,

मचल -मचल कर नदिया जाए ,सागर में जाकर मिल जाए | 


सागर तो रहता है शांत ,पर चंचला उसकी लहरें ,

देशों की सीमा पर जैसे ,सागर तो देता है पहरे | 


नीचे है सागर विशाल ,ऊपर बड़े -बड़े पहाड़ ,

दोनों ही हैं फैले ऐसे ,बड़े से पहरेदार हों जैसे | 


दोनों ही में अलग है दुनिया ,सागर तो रत्नों की खान ,

अनगिनत जीव और रत्न ,तभी तो रत्नाकर कहलाए | 


पहाड़ों में जंगल हैं सजते ,जिनके अंदर जीव हैं बसते ,

उन जीवों का वही है घर ,जीवों से जंगल सुंदर | 


जंगलों से हम हैं ,सब कुछ हमको हासिल है ,

अनमोल ख़ज़ाने प्रकृति के ,दुनिया में अपनी शामिल हैं | 


सब कुछ हमें प्रकृति देती ,ख़ज़ानों से झोली भर देती ,

सभी आराम इसी से मिलता ,तभी तो अपना जीवन खिलता | 


बदले में हम क्या देते हैं ,एक वादा दे सकते हैं ,

प्रकृति को विनाशित नहीं होने देंगे ,नहीं होने देंगे | 


BAS YATRA ( SHORT STORY )

   बस यात्रा 


एक दिन हम निकले बंधु ,

बस द्वारा कनॉट प्लेस जाने को ,

पहुँचे हम बस स्टैंड तो देखा ,

डबल डेकर बस खड़ी थी चलने को |


खुश होकर हम चढ़ गए बंधु ,

सीढ़ी द्वारा ऊपर को ,

खिड़की वाली सीट पकड़ ली ,

हमने वहाँ बैठने को |


चली बस तो हमें लगा ,

बिना ड्राइवर बस चल दी ,

नया -नया अनुभव था बंधु ,

डबल डेकर बस में चलने का


खिड़की से हम गए देखते ,

बाहर के बाज़ारों को ,

हर स्टैंड पर बस जब रुकती ,

नीचे खड़ी सवारियों को |


चलते -चलते अपनी बस तो ,

कनॉट प्लेस में पहुँच गई ,

धीरे -धीरे हम उतरे ,

बस यात्रा ख़त्म हुई |

Thursday, September 3, 2020

JAY JAVAAN ( DESH )

                  जय  जवान  

 

सेना में वो सिपाही था ,

वर्दी पहनी शान से घर आया ,

माता -पिता को सलामी दी ,घर में खुशियाँ छाईं ,

घर का बच्चा ,सेना में शामिल हो गया | 

 

गलवान घाटी में भेजा गया ,खतरनाक घाटी ,

उसने भी पहली बार देखी ,ठंड से दॉँत ,हड्डियाँ ,सब जमजाते | 

 

सब कुछ सहन कर ,दुश्मन से लड़ने को तैयार ,

सामना करने को तैयार ,

कुछ दिन ही बीते ,ना खाने का ठिकाना ,

ना सोने का ठिकाना ,मगर हौसला था ,

जवान हिम्मतवाला था ,

मुस्कराहट चेहरे पर लिए ,

दूसरों को भी हौसला देता हुआ | 

 

आक्रमण हुआ ,दोनों ही ओर से ,

गोलियाँ चलीं ,दोनों ही ओर से ,

बारूद फटने के कारण ,

धुआं ही धुआं , घुटन ही घुटन ,

मगर उसी में जीता ,वो वीर जवान ,

सभी हैरान थे ,कैसा जवान है ? 


एकाएक बारूद उसके पास फटा ,

जवान घिर गया ,घुटन से  भर गया ,

साँसें भी थमने लगीं ,पलकें भी झपने लगीं ,

जिंदगी भी मानो ,धुएँ में सिमटने लगी ,

फिर भी -----  मुस्कान के साथ ही ,

होंठ बोल उठे ------ जय हिंद | 


और फिर तिरंगे में लिपटा शरीर ,

घर भेज दिया गया ,

माता -पिता ने देखा ,उसकी मुस्कान को ,

घरवालों ने भी देखा ,चेहरे के तेज को ,

शहर भर उमड़ पड़ा ,सभी ने देखा ,

अपने प्यारे "अमर जवान " को ,

और अश्रुपूर्ण नेत्रों से ,

सैल्यूट देकर विदा किया |

PAHAADON KAA KHAZANA (JIVAN )

             पहाड़ों का  खज़ाना 

 

सूर्य रश्मियाँ बिखर गईं ,पहाड़ों की चोटी पर ,

बहती हुईं  नदियाँ जैसे ,नीचे को उतर गईं ,

आँखों से दिल में उतर गया ,दृश्य वो पहाड़ों का ,

लगा ऐसा हमको ,पहाड़ों को सोना कर गईं | 

 

पहाड़ों पे फैले जंगल ,हरियाली फैली हुई है ,

शुद्ध हवा का मानो ,गोदाम बन गई है ,

साँसें हमारी जैसे ,उन पर ही निर्भर हैं ,

जिंदगी पे ये हरियाली ,एक क़र्ज़ बन गई है | 


झर -झर झरते हैं झरने ,पहाड़ों के सीने से ,

शुद्ध ,शीतल जल हमें ,मिलता है इन्हीं से ,

ऐसा शुद्ध जल हमें ,और कहाँ मिलेगा ? 

क्या खूब है प्रकृति ,रची है रचेता ने ? 


ये सब खज़ाना है छिपा ,पहाड़ों के सीने में ,

जो धीरे -धीरे देता ,झोली हमारी भरता ,

जिंदगी हमारी ,निर्भर इन्हीं पर करती ,

बिन मोल ये खज़ाना ,हमको है देती रहती | 


MENHADI ( JIVAN )

   मेंहदी 


देश है त्योहारों का ,रंगीन से व्योहारों का ,

रंग -बिरंगे माहौल में ,गीतों का मनुहारों का ,

हर त्यौहार ,हर फंक्शन में ,

कुछ जुड़ाव ,कुछ कॉमन है |


वो है मेंहदी ,जो रंग प्यार का लाती ,

खुशबुएँ खूब बिखराती ,

याद करें हम शगुन की मेंहदी ,

शादियों में ससुराल से आती |


नाम पिया का हाथों में ना ,

दिल पे अंकित कर जाती ,

हर त्योहार में ये मेंहदी ,

नये -नये रंग बिखराती |


मेंहदी तो सदियों से ही ,

अपना रंग ,खुशबू फैलाती ,

तभी तो दोस्तों ये मेंहदी ,

सबके ही दिल को लुभाती |


बड़ी उम्र के आने पर ये मेंहदी ,

हाथों से बालों तक चढ़ जाती ,

ऐसे ही तो दोस्तों ये मेंहदी ,

जीवन भर सबका साथ निभाती |

 

Wednesday, September 2, 2020

VYAVHAAR MEETHA ( DESH )

                         व्यवहार मीठा

 

"हिंदु ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई ,आपस में हैं भाई -भाई " 

नारा दिया गया ,मगर क्या ये सच है ? 

यदि ये सच है तो ,फिर देश में इतने दंगे क्यों हैं ? 

क्यों पड़ोसी ही पड़ोसी का दुश्मन बना है ? 

 

अलग -अलग क्यों सोच है ? अलग -अलग क्यों भाषा ?

अलग -अलग क्यों है दोस्त ,धर्म की परिभाषा ? 

कोई मूर्ति पूजता ,कोई पढ़े नमाज़ ,

कोई गुरबानी सुने ,कोई चर्च में जाए ,

एक दूजे की पूजा में ,कोई ना शीश झुकाए ,

जब ईश्वर एक है फिर ,पूजा के तरीके में क्या रखा है | 


हाथ बढ़ाओ प्रेम से ,प्यारा हो व्यवहार ,

पूजा कैसे भी करो ,करना क्या विचार ? 

मानव बन के आए थे ,इस धरती पर तुम ,

क्या ईश्वर ने भेजा धरा पर ,बना के तुम्हारा धर्म ? 


मानव ही बन कर रहो ,मानवता के साथ ,

व्यवहार रखो तुम मीठा ,हर मानव के साथ ,

जीवन भर खुशियाँ ही ,बाँटो सब के संग ,

सब के जीवन में भरो ,इंद्रधनुष के रंग |


ईश्वर भी खुश होगा ,जब ऐसा देखेगा ,

फूलों में वो हँस देगा ,खुशबुएँ बिखेर देगा ,

मानवता की राहें ,भर जाएंगी मानवों से ,

आने वाली पीढ़ियाँ ,खिल जाएंगी दुआओं से | 



NANHEN MUNNE SE KHWAB ( JIVAN )

                       नन्हें  -मुन्ने से ख़्वाब 

 

ख़्वाब नहीं ऊँचे अपने ,सच्चे हैं जो थे सपने ,

छोटे -छोटे ख़्वाबों से ,भरी हुई थी जिंदगी ,

आज वो सब साकार हुए ,कल तक थे जो सिर्फ सपने | 

 

नहीं रूठने दिया है हमने ,नन्हे -मुन्ने ख़्वाबों को ,

जित उसी की होती है ,करता जो पूरे ख़्वाबों को ,

इस जीवन में जीते हम ,आगे की ईश्वर जाने ,

क्यों सोचें हम कैसे -कैसे ,करलें पूरा ख़्वाबों को ? 


दुःख -सुख आते जीवन में ,क्यों ख़्वाबों को जाने दें ? 

तपती हुई जिंदगी में ,ख़्वाबों की हवा तो आने दें ,

नन्हीं -नन्हीं खुशियों से ,जीवन को सज जाने दें ,

इंद्रधनुष के रंगों को ,जीवन में भर जाने दें | 


नहीं ख़्वाब सोते देखे ,खुली आँख भी देखे हैं ,

ऐसे ही हमारी तो मित्रों ,सागर से बातें होती हैं ,

चंदा तो अपना सखा है मित्रों ,बरखा भी सहेली है ,

पौधों -फूलों के संग तो किटी पार्टी होती है | 


सभी दोस्त हैं अपने मित्रों ,सभी तो शामिल होते हैं ,

सभी बाँटते खुशियाँ हैं ,खूब ठहाके होते हैं | 


HAMARA GHAR ( GEET )

   हमारा घर   


" ये मेरा घर ,ये तेरा घर ,

किसी को देखना हो गर ,

तो पहले आके माँग ले ,

मेरी नज़र ,तेरी नज़र |"

ये गीत मेरे घर का है ,

ये गीत हमारे घर का है ,

हमारी आरज़ूओं के घर का है |


हमने जिसे बसाया था ,

दिल से जिसे सजाया था ,

उम्मीदों ,आशाओं का घर ,

विश्वासों के तोरण का घर ,

खुशियों की मिठाइयों से भरा ,

मुस्कानों के नमकीनों से हरा ,

वो घर जो देखना है तो ,

देखो उसे मेरी नज़रों से |


कल्पनाओं से सजाया ,

दीपकों से रोशन किया ,

अरविंदों की खुशबुओं से महकाया ,

हम सभी के अंश ने ,

अल्पनाओं से रंगा ,

नियोति है यही घर की ,

बरस दर बरस फूले -फले ,

ऐसा इंद्रधनुषी घर ,

दूजा नहीं होगा कहीं |

 

Tuesday, September 1, 2020

KAISII AAZADI ? ( DESH )

                         कैसी आज़ादी ?

 

दासता से मिली आज़ादी ,अपने वीरों के कारण ,

दासता की टूटी बेड़ियाँ ,अपने वीरों के कारण ,

बाहर वालों ने लूटा ,अंदर की फूट के कारण ,

देश गरीबी के गर्त में ,डूबा ना समझी के कारण | 


देश में ना थी कहीं एकता ,सब के अलग थे रस्ते ,

मैं हिन्दू हूँ ,मैं मुस्लिम हूँ ,सब थे यही समझते ,

नहीं प्यार था आपस में ,सबके अपने बस्ते ,

भाषाएं सबकी अलग थीं ,अलग थे सब ही चलते | 


ऐसे में ही कुछ वीरों ने ,एक सूत्र बनाया ,

सबको बाँधा उसी सूत्र में ,देश प्रेम उपजाया ,

उपजा देश प्रेम जब उनमें ,एक हुए कुछ लोग ,

उन्हीं ने देश भर में ,"स्वराज्य " का नारा लगाया | 


समझ गए तब भारतीय ,उनका साथ निभाया ,

बढ़ते -बढ़ते वीर बने सब ,अपना अधिकार जमाया ,

कुछ तो लटके फाँसी पर ,कुछ ने गोली खाई ,

कुछ लोगों ने तो अहिंसा ,का रास्ता अपनाया | 


सब मिलकर जब एक हो गए ,दुश्मन डरकर भागा ,

तभी तो मित्रों  देश का ,सोता भाग्य भी जागा ,

आज हैं हम आज़ाद देश के ,जिम्मेदार नागरिक ,

अधिकार हमें बहुत प्राप्त हैं ,संविधान जो ऐसा लागा | 


नहीं बोलने पर पाबंदी ,नहीं धर्म ,जाति पर ,

पढ़ना ,लिखना मिल जाता है ,जो हम चाहें ,अपनाएं ,

जीवन तो बगिया है मित्रों ,इसमें हम जो चाहें ,

उसी रंग ,उसी खुशबु ,उसी प्यार के ,फूल खिलाएं ,

क्योंकि हम हैं ,आज़ाद देश के ,जिम्मेदार नागरिक ,

सभी वीरों को नमन ,जय हिंद |

E - WATAN TERE LIE ( DESH )

 

      ए -वतन तेरे लिए 

 

दुनिया के आकाश में उभरा ,चमकीला एक सितारा ,

और कोई नहीं है मित्रों ,वो तो अपना भारत प्यारा ,

दासता की बेड़ियों से ,हुए थे जब मजबूर ,

आज़ादी की दौलत हमको ,वीरों ने दिलवाई | 

 

बोस ,भगतसिंह ,लक्ष्मीबाई ,आज़ाद और पटेल ,

कोई फाँसी पर लटका ,किसी ने सीने पर गोली खाई ,

कुछ ने अहिंसा को अपनाया ,कुछ ने बढ़कर ललकारा ,

किस -किस का हम नाम लिखेंगे ,सभी को नमन हमारा | 

 

आज के दिन तिरंगा अपना ,लाल -किले पर फहराया ,

उसी दिन का जश्न मनाने ,शेर अकेला ही आया ,

उसने आगे बढ़कर ही ,नयी राह दी देश को ,

उसी राह पर चलकर ही ,सच करेंगे सपनों को | 

 

साथ शेर का देकर हम ,कर्त्तव्य करें अपना पूरा ,

तभी तो आने वाले कल में ,होगा अपना पूरा ,

वंदे मातरम कहते -कहते ,आगे बढ़ते जाएँगे ,

देश भक्ति की राह में मित्रों ,जीवन सफल बनाएँगे | 

 

आज इस महामारी के संकट में ,फँसी है दुनिया सारी ,

भारत माता के बच्चे भी ,झेल रहे हैं ये बीमारी ,

फिर भी डट कर खड़े हुए ,हैं वीर हर सीमा पर ,

अपनी जान की नहीं है परवाह ,दूजे की जान पे वारी | 

 

है नमन सभी को मित्रों ,देश के वीर सपूतों ,

ईश्वर भी आशीष दे रहा ,भारत के वीर सपूतों | 

                                    जय हिंद | 

 

CYCLE ( MANORANJAN )

    साइकिल 


बचपन में मिली साइकिल बंधु ,

नहीं आज तक चल पाई ,

बिना गियर वाली साइकिल भी ,

दो पहियों पर ना संभल पाई |


पाँच गियर वाली मारुति को ,

हम तो खूब चला पाए ,

सीखा ना बचपन में फिर भी ,

हम उसको दौड़ा पाए |


कार के चक्के दौड़ गए ,

काली सी इन सड़कों पर ,

पर दो पहियों वाली साइकिल ,

अब भी रुकी पड़ी है ,

नहीं चली है अब तक बंधु ,

आज भी अड़ी खड़ी है |

PADHA TO BADHA ( DESH )

 

पढ़ा तो  बढ़ा

 

पहला शब्द तो माँ ही सीखा ,माँ से ही सीखा ,

चलना ,बोलना ,खाना ,सभी कुछ तो माँ से सीखा ,

फिर भाषा का चक्कर क्या है ?

मातृभाषा ही सीखेंगे हम ,बोलना ,पढ़ना ,लिखना | 

 

हिंदी हो, मराठी हो ,या फिर हो गुजराती ,

कुछ भी सीखें हम सब ,हैं तो भारतवासी ,

सभी बच्चे सीखें ,पढ़ना और लिखना ,

तभी तो अगली पीढ़ी ,सीखेगी आगे बढ़ना | 


बच्चा हो या बच्ची ,है जरूरी पढ़ना ,

विकास की ओर कदम बढ़ेगा ,जब आएगा लिखना ,

क्रमबद्ध रूप से शिक्षा सब पाएं ,पढ़े ,लिखे जन उन्हें पढ़ाएं ,

मेहनत से ही तो हम ,अपना देश आगे ले जाएं | 


बच्चे सभी पढ़ना सीखें ,ज्ञान को वो गुनना सीखें ,

तभी तो अगली पीढ़ी ,चढ़ेगी अगली सीढ़ी ,

नहीं कदम फिर रुक पाएगा ,हर बच्चा चढ़ जाएगा ,

नहीं कोई अनपढ़ जन हो ,भारत में हर कोई पढ़ा हो ,

तभी तो भारत विकसित ,देशों की श्रेणी में आएगा ,

तभी तो दूजे देश कहेंगे ,"पढ़ा है भारत ,तभी तो बढ़ा है भारत " | 


BATAAO MITRON ( PREM )

 

             बताओ मित्रों

 

दो पल को मिलीं नजरें ,उसमे ही झुक गईं ,

क्या बताऊँ सखियों ,क्या दिल का हाल था ? 

कोई जादू था जो मेरे ,दिल में उतर गया ,

क्या जादू था जो मेरे ? दिल को चुरा गया | 

 

शब्दों का जाल मेरा ,दिल बुन रहा था ,

जुबां पे एक भी तो ,ना शब्द आ रहा था ,

लब खुल नहीं रहे थे ,कुछ कह नहीं रहे थे ,

हमेशा से बोलते लब ,सकुचा रहे थे | 

 

कैसे कहूँ मैं जानम ,तुमने दिल चुरा लिया है ,

दिलवाली थी मैं पहले ,बेदिल कर दिया है ,

दिल एक ही तो होता ,वो भी हुआ है चोरी ,

क्या रपट मैं लिखाऊँ ,पर किसके ख़िलाफ़ होगी ? 

 

सखियाँ भी चुप हैं मेरी ,ना दे रहीं सलाहें ,

कैसी हैं ये सखियाँ भी ,मुस्कातीं धीरे -धीरे ,

आज तो मैं मित्रों ,सखियों का ,विश्वास क्या करूँ ? 

तुम ही बताओ मित्रों उसे ,कह दूँ या चुप रहूँ ?

NAAM LIKHA THA USKA ( PREM )

    नाम लिखा था उसका 


प्यार की पहली चिट्ठी ,जब आई थी उनकी ,

हमने चूम लिया उस जगह को ,

जहाँ पे नाम लिखा था उनका ,

वह था प्यार का पहला किस ,

जिसपे नाम लिखा था उनका |


शादी में जब पहनी चूड़ियाँ ,

प्यार से उनको चूम लिया था ,

क्योंकि उन लाल -हरी चूड़ियों की ,

झंकार पे नाम लिखा था उनका |


ईश्वर ने जब दी हमें एक ख़ुशी ,

नन्हीं ,प्यारी सी ,कोमल बिटिया ,

प्यार में भर उसको चूमा ,

इस प्यार पे नाम लिखा था उसका |


ईश्वर ने दी एक और ख़ुशी ,

नन्हा,प्यारा ,मुस्काता बेटा ,

हमने प्यार से चूम लिया ,

इस चुम्बन पे नाम लिखा था उसका |


ये चुम्बन थे प्यार भरे ,

सबके थे अधिकार भरे ,

इसमें कौन सी पहली किस ?