Sunday, September 13, 2020

BAND ZUBAN ( PREM )

     

  बंद ज़ुबां

 

पहली मुलाकात थी वो ,या थी पहेली ,

वो आँखों का मिलना ,पलकों का झुकना ,

क्यों हमारी जुबां ,बंद हो गई थी ,

भाव जग गए थे और ,शब्द सो गए थे ,

ये सब क्या हुआ था ? बता तो -ए -सहेली| 


वो बादलों की छाँव ,ठंडी हवा के झोंके ,

सब कुछ तो साथ में था ,पर हम कहाँ पे खोए ? 

फूलों की खुश्बुएँ भी ,हमको नहीं हैं आतीं ,

ये किसका असर हम पर ?बता तो -ए -सहेली | 


चल छोड़ सब सहेली ,बूझ ये पहेली ,

दिल मेरा तो खो गया है ,किसी और का हो गया है ,

क्या वापस मिलेगा मुझको ?या हो रहेगा उसका ,

क्या एक मुलाकात में ,बेदिल मैं हो चुकी हूँ ? 

शर्म -ओ -हया का आँचल ,मैं ओढ़ चुकी हूँ |

 

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