Tuesday, June 28, 2022

UMRA AUR MUSKAAN ( JIVAN )

 

 

                       उम्र और मुस्कान 

 

समय बीतता जा रहा है ,उम्र भी है बढ़ रही ,

मगर क्यूँ चिंता करें हम ,मुस्कान भी है बढ़ रही | 

 

होठों पर पैदा हुई ,मुस्कान की उम्र भी है बढ़ती हुई ,

पहले तो मुस्कान बच्ची सी थी ,मगर अब नवयौवना हुई | 

 

आगे भी दोस्तों यूँ ही बढ़ेगी ,ये मेरी मुस्कान तो ,

कम नहीं होगी ये मुस्कान मेरी ,उम्र बढ़ जाएगी तो | 

 

पहले थी ये मुस्कान मेरी ,अनुभव नहीं था इसको कोई ,

अब जो है मुस्कान मेरी ,अब ये अनुभवी हुई | 

 

क्यों घटे मुस्कान मेरी ,उम्र बढ़ जाने के बाद ? 

अनुभवी है मुस्कान मेरी ,उम्र बढ़ जाने के बाद | 

 

Monday, June 27, 2022

TAAJPOSHII ( JIVAN )

 

 

                 ताजपोशी 

 

याद आते हैं मुझे ,स्कूल के वो दिन ,

काँधे पे बस्ता टाँग के ,चलते थे सीना तान के | 

 

खुशियाँ झलकती थीं चेहरे से ,मानो जीती कोई जंग ,

खुशियों में डूबे रहते थे ,हम थे मलंग ,हम थे मलंग | 

 

दोस्तों की टोलियाँ ,जब लगातीं कहकहे ,

लगता था हमको ऐसा ,कुछ चुटकुले हमने कहे | 

 

रात और दिन का ,हमको फर्क नहीं था भाता ,

हमको तो हर समय ही ,एक जैसा समझ था आता | 

 

पढ़ना ,लिखना और खेलना ,यही था हमारा काम ,

आज के समय में तो दोस्तों ,आराम है हराम | 

 

काश वो दिन ,प्यारे दिन ,लौटा दे कोई ,

लगेगा हमें जैसे ताजपोशी ,कर गया है कोई | 

 

Sunday, June 26, 2022

TAN - MAN ( JIVAN )

 

                        तन - मन 

 

रचना हुई शरीर की ,बनी कोठरी छोटी ,

उसी कोठरी में था मन ,मुट्ठी भर की थी कनी ,

शरीर बड़ा दिखाई दिया ,मन सोचे मैं छोटा ,

मगर शरीर कहाँ जाय रे ,मन उड़ जाय ज्यूँ तोता | 

 

तन तो रुक जाय एक ठौर ,मन का कोई नहीं है ठौर ,

मन तो डोले इत -उत बंदे ,हर सीमा को पार करे ,

जीवन की सीमा के पार भी ,मन तो बंदे विचर करे | 

 

इंसान ने नाम दिए तीन लोक ,स्वर्ग ,पृथ्वी ,पाताल लोक ,

मन तो उड़े ,चाहे जहाँ चला जाए ,

उसके लिए तो क्या ----

स्वर्ग लोक ,क्या पृथ्वी लोक और पाताल लोक | 

 

मन के लिए तो बीता समय ,आने वाला समय ,

नहीं है सीमा बद्ध ,

बरसों पहले समय में मन पहुँचा ,

करे भविष्य  भी विचार ,

मगर तन तो आज में ही रुका है ,

मन के चलने पर लगे ,हमने कर ली सैर | 

 

Thursday, June 23, 2022

KHILAA DAALO ( PREM )

 

                     खिला डालो 

 

कोई लिखे है गीत ,कोई लिखे मन की कविता ,

कोई लिखे कव्वाली ,तो कोई लिखे ग़जल ,

जिंदगी के ऊबड़ -खाबड़ रास्तों में ,

कोई खिलाए गुलाब ,तो कोई खिलाए कमल | 

 

जो मन में आए ,लिख डालो बंधु ,

बस प्रेम ,प्यार ही ,जग में फैलाओ बंधु ,

नफरतों को तो जहाँ से ,दूर ही कर दो बंधु ,

मुस्कानों के फूल ही ,खिला डालो बंधु | 


रंग जिंदगी का ,फीका ना पड़ने पाए कभी ,

जिंदगी में ऐसे गहरे ,रंग तुम भर दो बंधु ,

होठों पे सभी के ,मुस्कानें खिलें ,

ऐसे हालात तुम ही ,पैदा कर दो बंधु | 


गीतों की मिठास ,सभी के दिल में उतर जाए ,

कुछ ऐसा जुगाड़ तुम ,कर लो बंधु ,

हर कोई तुम्हें याद करे ,तुम्हारे जाने के बाद भी ,

आज ही ऐसा कुछ ही ,तुम लिख डालो बंधु | 


Wednesday, June 22, 2022

BAGIYAA ( JIVAN )

 

                       बगिया 

 

रंग - बिरंगे फूल खिले ,तो रंगीन हुई बगिया ,

फूलों की महक से ही ,महक उठी बगिया | 

 

फूलों की गुणवत्ता ,जानी जाती ख़ुश्बुओं से ,

खुश्बु ही गुण फूलों का ,महत्त्व है सिर्फ ख़ुश्बुओं से | 

 

रंगों का क्या है ? मुरझाने पर फूलों के ,

रंग भी नष्ट होते हैं ,सूखने पर फूलों के | 

 

मानव का भी मोल है ,सिर्फ उसके गुणों के कारण ,

गुण हैं नहीं तो ,क्या मोल है मानव का ?

 

 विनम्रता जो है तो ,दूजे भी नम्र होंगे ,

प्यार जो देगा तो ,दूजे भी प्यार देंगे ,

वरना तो कोई ना पूछेगा ,तुम कहाँ रहोगे ? 

और हम कहाँ रहेंगे ? और हम कहाँ रहेंगे ? 


Tuesday, June 21, 2022

YAADEN SCHOOL KI ( SANSMARAN )

 

                       यादें  स्कूल  की 

 

यादें कभी भूलती नहीं ,आती ही रहती हैं ,

कभी भी समय नहीं देखतीं ,नींद भी खुलवातीं हैं | 


कभी बचपन याद आता है ,तो स्कूल पहुँच जाते हैं ,

फिर बस्ता खुल जाता है ,किताबें निकल आतीं हैं | 


अभी भी याद हैं ,बचपन में पढ़ी कहानियाँ ,

गुनगुन करके ,कभी कविताएँ सुनाई जाती हैं | 


शरारतें तो सारी की सारी ,जैसे कल ही करीं हों हमने ,

उन शरारतों को  करके ,मुस्कानें उभर आती हैं | 


गुरुजनों को याद करके ,शीश श्रृद्धा  झुक जाता है ,

उनके आशीर्वादों में तो हमें ,दुनिया ही मिल जाती है | 


स्कूल का प्रांगण ,जहाँ झूले थे ,फिसल पट्टी थीं ,

हमें तो मानो दोस्तों ,फिर से यादें वहीं पहुँचाती हैं | 


आओ देखो दोस्तों ,तुम हमारे स्कूल को ,

यादें उस " नव भारती  विद्यापीठ " ,का नाम लिख जाती हैं | 


Monday, June 20, 2022

MUSKAAN ( JIVAN )

 

                       मुस्कान 

 

गीत और संगीत में ,डुबो और खो जाओ ,

डूबकर और खोकर ,होठों पे मुस्कान ले आओ | 

 

मुस्कान आएगी होठों पर ,तो दिल भी प्रफुल्लित होगा ,

दिल के प्रफुल्लित होने पर ,दिमाग को सुकून मिलेगा | 

 

मिलता है जब सुकून बंधु ,तब उम्र भी लंबी होगी ,

लंबी उम्र में बड़े कामों के लिए ,समय भी अधिक मिलेगा | 

 

सोच लो तुम भी क्या करना ? उम्र की सीमा बड़ी हो तो ,

प्लान तैयार रहेगा तो ,कर पाओगे बड़े काम तुम | 

 

मत सोचो उम्र बढ़ने से ,मुस्कान कम होगी ,

मुस्कान बढ़ जाएगी तो ,उम्र ना घटेगी ,उम्र तो बढ़ेगी | 

 

 

Sunday, June 19, 2022

UDHAAR LO ( PREM )

 

                         उधार लो 

 

जीवन मिला छोटा सबको ,प्रेम ही कर लो बंधु ,

छोटे से जीवन को ,मुस्कानों में व्यतीत कर लो ,

जीवन के हर पल को ,प्रेम में डुबा लो बंधु | 

 

नफरतों को ना ,आने दो जीवन में ,

शिकायतों के लिए ,दरवाजा न खोलो ,

दोस्तों की दोस्ती में ,जीवन को डुबा लो बंधु |

 

प्रकृति के हर रूप को ,प्यार कर लो ,

उसको प्यार से ,संवार लो ,निखार लो ,

 प्रकृति की महक में ,खुद को डुबा लो बंधु | 


रंग हर मौसम का ,अनोखा है ,

हर लहर का स्वाद भी ,सबने चखा है ,

फिर क्यूँ ना लहरों का ,स्वाद भी उधार लो बंधु | 


 

 

 

Thursday, June 16, 2022

KYAA HOGA ? ( JIVAN )

 

                             क्या होगा ? 

 

संसार बनाया रचयिता ने ,

उसी में सबसे सुंदर रचना ,बनाई मानव उसने ,

दिया मुस्कान का वरदान ,मानव को उसने ,

लेकर मानव सब भूल गया ,

बेईमानी में सिर तक डूब गया | 

 

सुंदर से संसार को किया नष्ट ,

क्योंकि मानव हो गया भ्रष्ट ,

संसार को नहीं रखा उसने स्वच्छ ,

संसार के संसाधन हो गए नष्ट | 

 

संसार का जो नुकसान हुआ ,

तो मानव ने मानो अपने लिए कुँआ खोदा ,

गिरा मानव उसी में खुद ,

सब सुख हुए मानव के नष्ट | 

 

आज संसार में सब कुछ है नष्ट ,

आज मानव हो रहा है त्रस्त ,

महामारी का जोर है ,लाचारी का जोर है ,

क्या मानव इस सब से उबरेगा ? 

क्या उसका जीवन स्तर सुधरेगा ? 

क्या होगा ? पता नहीं ,पता नहीं | 

 

 

 

Wednesday, June 15, 2022

DUPAHRIYAA ( JIVAN )

 

 

                  दुपहरिया 

 

उगा जो सूरज दुनिया बोली ,

आज का दिन तो शुरू हुआ ,

ढला जो सूरज तो वह बोली ,

आज का दिन तो ख़त्म हुआ | 

 

क्या ऐसा होता है बंधु ? 

दिन क्या ऐसे ही उगता ,ढलता ? 

सोच के देखो , दिल में ही ,

दिन क्या शुरू और अस्त नहीं होता ? 


जब हम खुश होते हैं बंधु ,

दिन क्या शुरू नहीं होता ? 

और हमारे दुःख के कारण ,

दिन क्या अस्त नहीं होता ? 


फिर हम अपने दिन को बंधु ,

क्यों ना ,शुरू करें मुस्कानों से ? 

बाँटें मुस्कानें सब ओर ,

भरी रहे दुपहरिया सब ओर | 


ठंडी बयार बहा दें हम ,

मुस्कानें फैला दें हम ,

मुस्कानें सुकून की फैलाते - फैलाते ,

दिन के अस्त होते - होते ,

सपनों के पंख सभी को दें हम | 


Tuesday, June 14, 2022

ADHOORE SAB ( JIVAN )

 

                      अधूरे सब 

 

पूरे इस संसार में ,कोई प्राणी नहीं पूरा है ,

हर कोई यहाँ अधूरा है ,कोई नहीं पूरा है | 

 

कमी तो बंधु ,सब में है ,तुम में भी और मुझ में भी ,

इसीलिए तो बंधु ,हर कोई यहाँ अधूरा है | 

 

कोई शरीर से है अधूरा ,कोई मन से अधूरा है ,

हाथ ,पाँव में कमी है ,और कोई सोच से अधूरा है | 

 

किन्नर भी हैं इस धरती पर ,कोई गड़बड़ी में डूबा रहता है ,

मन किसी का डूबा ख्यालों में ,कोई काम नहीं कर सकता है | 


ऐसे में किसी को ,कैसे करें पूरा ? कोई हल नहीं मिलता है ,

हम भी तो इसी में उलझे बंधु ,फिर पूरे कैसे हो सकते हैं ? 


Monday, June 13, 2022

FOOL GUNON KE ( DOHE )

 

                    फूल गुणों के

 

खुश्बु जैसे गुण रखो तुम ,फैले वो चहुँ ओर ,

तुम उनमें डूबे रहो ,नहीं मचाओ शोर | 

 

गुण  तो हैं बड़ा खजाना ,सदा इन्हें अपनाओ तुम ,

जीवन की इस बगिया में ,गुणों के फूल खिलाओ तुम | 


सद्गुण है एक सूरज ,खूब उजाला करता ,

दुनिया को ये अपनी ,रश्मियों से भर देता | 


प्यार का गुण है बहुत ही मीठा ,इसे सदा अपनाओ तुम ,

प्यार के फूलों से ही बंधु ,दुनिया को महकाओ तुम | 


दिल में गुणों की खान है बंधु ,इसको सदा बढ़ाओ तुम ,

गुण जब बढ़ जाएँगे बंधु ,खुशियों को पा जाओ तुम | 


Friday, June 10, 2022

GUNATE HAIN PUSTAK ( JIVAN )

 

                         गुनते हैं पुस्तक 

 

पुस्तक से जुड़ता नाता ,बचपन ही से बंधु ,

पहले थी अक्षर माला ,धीरे से आईं कहानियाँ ,

धीरे -धीरे पढ़ना आया ,और हमें भाईं कहानियाँ | 


हर पुस्तक का रूप अलग ,हर पुस्तक का रंग अलग ,

कोई कहानी वाली है ,तो कोई कविता निराली है ,

अलग पुस्तक का मज़ा अलग ,हर कोई डूबा उसमें आली है | 


अपनी पसंद की पुस्तक पाकर ,हर कोई खुश हो जाता है ,

उसी में खो कर के बंधु ,वह अपना समय बिताता है ,

पूरी पढ़ लेने पर वह ,अनुभव सबको बताता है ,

गर्व करते हुए  ही बंधु ,वह बोल -बोल इतराता है | 


हम भी पुस्तक लेते हुए ,अपनी पसंद को चुनते हैं ,

खाली समय के इंतजार में ,एक - एक पल को बुनते हैं ,

पढ़ लेते हैं जब वह पुस्तक ,दिल ही दिल में सब गुनते हैं | 


Thursday, June 9, 2022

SHABDON KE PANKH ( JIVAN )

  

                     शब्दों के पंख 

 

होते गर शब्दों के पंख ,हर किताब उड़ती रहती ,

हर बच्चा उछल-उछल कर ,पकड़ किताब बस्ते में रखता | 


फर -फर करते शब्द किताब में ,जगह बदलते रहते ,

मगर उन शब्दों को हम ,क्या कहते ? क्या करते ? 


मेरी लेखनी से निकले शब्दों की ,मैं क्या लिखती कविता ? 

आप ही बंधु उन शब्दों को ,पकड़ के लिखते कविता | 


हर किसी की कविता का ,अर्थ निकलता अलग ,

कोई उनसे दोहे लिखता ,कोई उनसे लिखता ग़ज़ल | 


कोई राखी को खीरा ,और कोई खीरा को राखी पढ़ता ,

कोई कान को नका पढ़े ,तो कोई नाक को कना पढ़ता | 


सब कुछ उल्टा -पुल्टा होता ,जो होते शब्दों के पंख ,

इससे तो बेपंख ही अच्छे ,मेरे छोटे और बड़े शब्द |  


KAUN JHANKAAE ( JIVAN )

 

                       कौन झंकाए ?

 

बड़ा बदलाव हो हर जगह ,रूप दुनिया का हो नया ,

मगर करेगा कौन ?ये सोचो ,हर रास्ता नया | 

 

जीवन खुशियों में डूबा हो ,ना हो ग़म की परछाईं ,

मगर करेगा कौन ? ये सोचो ,दूर काली परछाईं |

 

आँगन खुश्बु से महका हो ,फूलों की रंगत हो छाई ,

मगर करेगा कौन ? ये सोचो ,बगिया में फूलों की भरपाई | 

 

घरों में रोशन हो हर कोना ,चमक जाए ,दमक जाए ,

मगर करेगा कौन ? ये सोचो ,कौन सूरज को ले आए ? 

 

गीत ,संगीत हो हर ओर ,प्यार के नगमे गुंजाएँ ,

मगर करेगा कौन ? ये सोचो ,जलतरंग कौन झंकाए | 

 

Wednesday, June 8, 2022

GUN JALAD KE ( JALAD AA )

  

                       गुण जलद के 

 

नन्हें हों बदरा ,या बड़े हों बदरा ,

हैं तो सभी जलद ,यानि जल देने वाले | 

 

उड़ता है जल समंदर से ,

पेड़ - पौधों से ,नदिया ,पोखरों से ,

हवा में उड़ते -उड़ते ,गीला करते -करते ,

बन जाता है रूप जलद का | 


कभी तो पतला -पतला ,रूई के फाहे जैसा ,

हल्का - हल्का सा ,

बयार से ही इधर - उधर को डोलता ,

है तो नन्हा सा जलद ही | 


कभी तो मोटा - मोटा ,गहरे काले रंग का ,

दामिनी का साथ इसका ,

गर्जन भी और चमक भी ,

तेज हवा के झोंके से भी ,

धीरे - धीरे ही उड़े जलद | 


Tuesday, June 7, 2022

UJAALE MEN ( JIVAN )

 

                   उजाले में 

 

सोच मेरी है दीपक जैसी ,करे उजाला चारों ओर ,

उस उजाले में चमके जीवन ,जिसका कोई ओर ना छोर | 

 

उजाला चाहे थोड़ा हो ,है तो दोस्तों सबकी ओर ,

नहीं सिमटूँ मैं पर्दे में ,दूँ मैं उजाला सबकी ओर | 

 

उजाला तो लौ के ,चारों ओर है जाता ,

सब को ही रोशन करता ,सब को ही चमकाता | 

 

क्यों मैं सोचूँ ? हुआ उजाला किसके घर ? 

 मेरा छोटा सा उजाला ,रोशन करे सभी के घर | 


आओ दोस्तों तुम भी अब ,डूबो इसी उजाले में ,

मेरा और आपका साथ दोस्तों ,पनपा है इसी उजाले में | 


Monday, June 6, 2022

ROSHAN KAROON ( JIVAN )

 

                     रोशन करूँ 

 

नहीं रश्मियाँ सूरज की ,अपने अंदर बसतीं ,

नहीं चंदनिया चाँद की ,अपने अंदर चमकती | 

 

नहीं रोशनी कोई है , अपने दिल के अंदर ,

जो जग को चमकाए ,रोशन उसे कर जाए | 

 

दी ईश्वर ने रोशनी ,सूरज ,चाँद ,सितारों को ,

वो ही चमकाते हैं ,इस धरा के ज़र्रों को | 

 

सीरत दे दो ईश्वर ,नन्हें चिराग के जैसी ,

कुछ तो जग रोशन करूँ,कुछ कण को रोशन करूँ | 

 

Sunday, June 5, 2022

MUSKAAN TERI MERI ( CHANDRAMA )

 

                मुस्कान तेरी मेरी 

 

गगन के चंदा ,आ उतर कर ,

गप्पें मारेंगे ,ढेर सारी ,

खिड़की से तू अंदर आना ,

खुलीं हैं मेरी खिड़की सारी | 

 

 तू तो सखा है मेरा चंदा , 

मैं भी तेरी सखी हूँ चंदा ,

कई दिनों से हुईं ना बातें ,

वो सब हुईं इकट्ठी सारी | 


मुझे देख कर तू खुश होता ,

तुझे देख कर मैं खुश होती ,

तेरी प्यारी सी मुस्कानों पर ,

मैं तो जाती चंदा वारि  | 


तू तो नीचे आ सकता है ,

मैं नहीं ऊपर आ सकती चंदा ,

मेरे पास नहीं कोई सीढ़ी ,

जो मैं आऊँ दुनिया थारी | 


मुस्कानें चंदा अपनी हैं ,

इक दूजे को खुश करती हैं ,

दुनिया भी अपनी मुस्कानों को ,

देख - देख मुस्काती सारी | 


Friday, June 3, 2022

AASHAAEN ( JIVAN )

 

                        आशाएँ 

 

उम्मीदें ,आशाएँ ,छिप  गईं हैं आज तक ,

जिम्मेदारियों के पीछे ही | 

 

जिम्मेदारियाँ जो ,एक बार उठाईं तो ,

भारी होती जा रही हैं ,मजबूत काँधों पर भी | 

 

काँधे तो मजबूत हैं ,मस्तिष्क के विचारों का ,

भार उठाने के काबिल नहीं ,

दुनिया भर के विचार ,मस्तिष्क में हमेशा तिरते रहे | 

 

हरसोच ,हर विचार ,आता रहता मस्तिष्क में ,

अँखियों के झरोखों से ,जो दुनिया दिखाई देती है ,

उसी प्रवेश द्वार से आती रही ,

विचारों की धारा प्रवेश करती रही | 

 

विचारों की धारा बहती जा रही ,

अंदर ही अंदर ,सोच का समंदर ,

बढ़ता जा रहा था ,

लहरों के उतार -चढ़ाव ,

मन को विचलित  कर जाते ,

उद्वेलित हुए मन को ,

उम्मीदें , आशाएँ फिर से प्रफुल्लित कर जाती हैं | 

 

 

 

Thursday, June 2, 2022

DHUN BAJAAE ( RATNAAKAR )

 

          धुन बजाए 

 

 समंदर - समंदर यहाँ से वहाँ तक ,

कोई ओर ना छोर ,जिसका जहाँ तक ,

कोई हद नहीं है उसकी ,वो  कहाँ तक ? 


नज़रों की सीमा के पार है वो ,

नीले आसमां के भी पार है वो ,

खारा सा पानी लिए ,मगर प्यार है वो | 

 

अनजानी दुनिया को खुद में समाए ,

जीवों के जीवन को ,आँचल में बसाए ,

जीवन दाता ही तो है ,जीवन का आधार है वो | 

 

अनगिनत जीव पलते हैं अंदर ,

रंगों का ही अंदर है फैला समंदर ,

लहरों की बीना पे , मन मोहक धुन बजाए | 


रत्नों को अपने खजाने में समेटा ,

अपने ही आँचल में ,उनको लपेटा ,

तभी तो समंदर ,रत्नाकर कहलाए |