Tuesday, June 21, 2022

YAADEN SCHOOL KI ( SANSMARAN )

 

                       यादें  स्कूल  की 

 

यादें कभी भूलती नहीं ,आती ही रहती हैं ,

कभी भी समय नहीं देखतीं ,नींद भी खुलवातीं हैं | 


कभी बचपन याद आता है ,तो स्कूल पहुँच जाते हैं ,

फिर बस्ता खुल जाता है ,किताबें निकल आतीं हैं | 


अभी भी याद हैं ,बचपन में पढ़ी कहानियाँ ,

गुनगुन करके ,कभी कविताएँ सुनाई जाती हैं | 


शरारतें तो सारी की सारी ,जैसे कल ही करीं हों हमने ,

उन शरारतों को  करके ,मुस्कानें उभर आती हैं | 


गुरुजनों को याद करके ,शीश श्रृद्धा  झुक जाता है ,

उनके आशीर्वादों में तो हमें ,दुनिया ही मिल जाती है | 


स्कूल का प्रांगण ,जहाँ झूले थे ,फिसल पट्टी थीं ,

हमें तो मानो दोस्तों ,फिर से यादें वहीं पहुँचाती हैं | 


आओ देखो दोस्तों ,तुम हमारे स्कूल को ,

यादें उस " नव भारती  विद्यापीठ " ,का नाम लिख जाती हैं | 


No comments:

Post a Comment