Monday, July 31, 2023

OR MAIN HOON ( RATNAAKAR )

 

                   और मैं हूँ 


नभ में सूरज है ,सागर में उसकी किरणें हैं ,

और मैं हूँ ,

नभ में फैली लाली है ,सागर में उसकी छाया है ,

और मैं हूँ ||


नभ में कुछ बदरा हैं ,रवि किरणों से हुए गुलाबी हैं ,

और मैं हूँ ,

बदरा  कुछ उड़ते जाते हैं ,बहती पवन के साथ - साथ ,

और मैं हूँ || 


सागर में एक नैया है ,लहरें ही उसकी खेवैया हैं ,

और मैं हूँ ,

नैया लहरों संग डोल रही ,रवि किरणों के संग भी ,

अपनी खिड़की पर बैठी ,

और मैं हूँ || 


JAROORATEN ( JIVAN )

 

                         जरूरतें 


जरूरतें और नींद ,कभी पूरी नहीं होतीं ,

इन्हें पूरा करना इंसान के ,अपने हाथ में है ,

जरूरतें और नींद पूरी होने पर ,

इंसान सुखी हो जाता है | 


जरूरतों को अपनी सीमित रखें ,

परिश्रम करते रहें ,

मन को शांत रखें ,नींद भरपूर आएगी | 

 

नींद पूरी होगी तो ,तनाव - मुक्त जीवन बीतेगा ,

मन शांत होगा ,और जिंदगी मुस्कुराएगी | 

 



Saturday, July 29, 2023

PARCHHAIYAN ( JIVAN )

 

                 परछाइयाँ 


रात की निंदिया में डूबे हम ,

देखते हैं बहुत से सपने ,

जिनमें होतीं हमारी इच्छाओं ,

हमारी आकाँक्षाओं की परछाइयाँ | 


ये परछाइयाँ हमें ,

 विकास की ओर अग्रसरित हैं करतीं ,

हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देतीं ,

मंजिल तक पहुँचने का रास्ता बतातीं | 


दिन के  उजाले में हम ,

मंजिल तक पहुँचने की कोशिश हैं करते ,

उसके लिए अथक प्रयास करते ,

और साथ ही दौड़ लगाते | 


ईश्वर से उस सफलता के लिए दुआ भी माँगते ,

और उनके आशीर्वाद के साथ ही ,

सफलता के मार्ग पर चलकर ,

मंजिल तक पहुँच जाते ,मंजिल तक पहुँच जाते | 


MILII EK KITAAB ( JIVAN )

 

                      मिली एक किताब 


अलमारी से मिली एक किताब आज ,

मगर है बरसों पुरानी ,उसमें संजोए थे ,

हमने कुछ  प्रेम -पत्र ,

जो कहते हैं आज भी ,हमारी प्रेम - कहानी | 


आज उन्हें फिर से पढ़ कर ,

याद आ गईं फिर वही मीठी यादें ,

वो प्यार भरी मीठी - मीठी बातें ,

जिनमें बसी थी अपने सपनों की कहानी | 


दिन वो कुछ इतने सुंदर थे ,

बसी थी उनमें सावन की रिमझिम ,

सतरंगी इंद्रधनुष की सुंदरता ,

उनमें छिपी थीं प्यार की यादें सुहानी | 


इस किताब के पन्ने पढ़ते - पढ़ते ,

हम तो मानो खो गए ,

ग़ुम हुए प्यार के सैलाब में ,लगा जैसे हम ,

देख रहे हैं जादू भरी दुनिया नूरानी | 


Thursday, July 27, 2023

BACHPAN KE KHEL ( JIVAN )

     

                       बचपन के खेल 


जब से याद हमें जीवन है ,बचपन के हैं खेल अनोखे ,

गेंद था शायद पहला खिलौना ,उसके बाद तो पिट्ठू आए | 


बना फर्श पर दस नंबर का खेल ,स्टापू से खेले हम ,

कंचे बहुत ही प्यारे लगते ,उनसे भी खूब हम | 


खूब ही कूदे रस्सी से ,अकेले भी और समूह में भी ,

इन सबके अलावा ,छुपन - छुपाई ,आईस - पाईस ,

पकड़म - पकड़ी ,ऊँच - नीच ,सब ही थे खेल हमारे ,

लूडो ,साँप - सीढ़ी ,जीरो - काँटा ,सी - सॉ ,

झूला ,फिसल - पट्टी ,क्या - क्या थे खेल हमारे ?


झूला  तो बहुत  बाद तक झूले ,

आज भी उसका मज़ा लेते हैं ,

आज तो यही कुछ शब्द याद आते हैं ,

कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन ,

वो बीते हुए खेल ,वही उम्र ,वही चाह | 



MANJIL APNII ( JIVAN )

 

                        मंजिल अपनी 


सोचते तुम ना रहो ,क़दमों  को बढ़ाते जाओ ,

परिश्रम तुम करते जाओ ,

तभी तो पाओगे मंजिल अपनी | 


स्वयं पर विश्वास रखो ,शंका कभी उगने ना दो ,

आत्म विश्वास की सीढ़ी द्वारा ही ,

पाओगे मंजिल अपनी | 


सहयोग करो दूजों के साथ ,

तभी दूजों का सहयोग पाओगे ,

उसी सहयोग के सहारे तुम ,

पाओगे मंजिल अपनी   | 


मीठी वाणी ,मीठे शब्द ,

और मुस्कानें बाँटते जाओ ,

इन्हीं के द्वारा ही तो तुम ,

पाओगे मंजिल अपनी | 


Tuesday, July 25, 2023

RISHTE DUNIYA KE ( KSHANIKA )

 

                        रिश्ते दुनिया के 


दुनिया के सभी रिश्तों ,सुन लो मेरी पुकार ,

तुम्हारे लिए ही तो है ये ,बुनी बंदनवार ,

तुम सब रिश्ते हो ,दुनिया के अपने ,

जीवन की इन राहों में , तुम  दुनिया के सपने | 

 

दुनिया की भूल - भुलैंया में ,

तुम सब हो लहरें सागर की ,

जीवन के इस सागर में ,

तुम सब हो लहरें सागर  की ,

जो साथ - साथ उठती हैं ,साथ - साथ बहती हैं | 


दुनिया के सब ,जंगल ,पर्वत ,झरने ,

दुनिया का साथ निभाएँ ,

दुनिया उन्हीं के नाम से जानी जाए ,

ऐसे ही रिश्तों से हर नाम ही जोड़ा जाए | 


बढ़ता वही रिश्ता है ,जो प्यार से जोड़ा जाए ,

और निभाया भी प्यार  जाए ,

प्यार से  सींचा जाए बंधु ,प्यार से सींचा जाए | 


Monday, July 24, 2023

KAMAAII ( KSHANIKA )

 

                                 कमाई 


जिंदगी हमने बिताई ,खूब की कमाई ,

उसमें बचत करके हमने ,कमाई अपनी बचाई ,

खाता अपना खूब भरा ,जब जुड़ी कमाई ,

आप सब सोचो दोस्तों ,क्या थी अपनी कमाई ? 


कुछ थे मीठे बोल उसमें ,कुछ थीं प्यारी मुस्कानें ,

कुछ थे मीठे रिश्ते ऐसे ,जिसमें जुड़े ताने - बाने ,

कुछ थे पड़ोसी अपने ,कुछ थे रिश्ते - नाते ,

कुछ थे आस - पास के ,पर कुछ थे दूर के नाते | 


परिवार अपना बढ़ चला ,बच्चों की थी पढ़ाई ,

धीरे - धीरे आगे बढे तो नौकरी जुड़ाई ,

जीवन सँवरा सभी का ,होठों पे मुस्कानें बढ़ाईं ,

स्वस्थ ,सुंदर जीवन धन है ,

यही तो है कमाई ,यही तो है कमाई | 


Sunday, July 23, 2023

HAR PAL ( JIVAN )

 

                                  हर पल 


हर पल को मुस्कान के साथ जियो ,

हर पल को सुकून के साथ जियो ,

जानते हो एक दिन में ही ,कितनी मुस्कानें ?

और कितने सुकून भरे पल ? जी पाओगे तुम ?


हर पल किसी के लिए दुआ करो तुम ,

हर पल किसी को आशीर्वाद दो तुम ,

जानते हो एक दिन में ही ,कितनी दुआएँ ?

और कितने आशीर्वाद ? दे पाओगे तुम ? 


हर पल किसी को याद करो तुम ,

हर पल किसी के बारे में अच्छा सोचो तुम ,

जानते हो एक दिन में ही ,कितनी यादें ?

और कितनी अच्छी सोच ? इकट्ठी कर पाओगे तुम ?

अपना खाता भर पाओगे तुम ? 


Saturday, July 22, 2023

OSS KI BOOND ( KSHANIKA)

 

                      ओस की बूँद 

 

मैं हूँ एक ओस की बूँद ,जन्म मेरा होता है ,

रात के अँधियारे  में ,जब ठंडक सी होती ,

सुबह -सवेरे ही मैं ,फूलों पर हूँ मिलती | 


हरी घास है बिस्तर मेरा ,मैं हूँ उस पर सोती ,

मेरा रूप - रंग देख कर ,

हर आँख ही खुश होती | 


मोती जैसा मेरा रूप ,सबके ही मन को भाता ,

सबके होठों की मुस्कान देख कर ,

मैं भी खुश हो लेती ,मैं भी खुश हो लेती | 


Thursday, July 20, 2023

LADAAI FOOLON KII ( SAMAJIK )

 

               लड़ाई फूलों की 


एक बार हो गई लड़ाई ,फूलों के बीच में ,

सबके सब थे मस्त ,बड़ाई अपनी करने में ,

गेंदा बोला ,मैं हूँ सुंदर ,और हूँ मजबूत ,

कई दिन तक लगातार ,खिला रहता हूँ मैं | 


सूरजमुखी ने आकर बीच में ,काटी उसकी बात ,

बोली ,मैं हूँ सूरज की प्यारी ,तुमसे भी मजबूत ,

उपयोगी हूँ मानव को देती ,तेल ,बीज और सजावट | 


कोमल सी चमेली ने ,सूरजमुखी को रोका ,

रंग - बिरंगी मैं नहीं ,मगर दूध सा सफ़ेद मेरा रंग ,

मेरी खुश्बू और कोमलता ,सभी को है भाती ,

मेरा तेल तो खुश्बू वाला ,हरेक हसीना है लगाती | 


आगे बढ़ा गुलाब ,भई लाल - लाल गुलाब ,

सुंदरता तुम मेरी देखो ,खुश्बू से मेरी महको ,

मेरे फूलों से बना गुलकंद ,और बना गुलाब जल ,

लगा कर तुम महको ,और खाकरमजा तुम लूटो | 


तभी तितलियाँ आकर बोलीं , क्यों आपस में लड़ते हो ?

सब मिल - जुल कर रहो चमन में ,सबके गुण हैं बढ़ते ,

हम तितलियाँ उड़ - उड़कर ही तो ,सुंदरता उत्पन्न करतीं ,

सुनकर सारे फूलों की लड़ाई बंद ,और दोस्ती हो गई ,

मानव तुम भी सीखो और ,दोस्ती बढ़ाओ ,दोस्ती बढ़ाओ | 


Wednesday, July 19, 2023

CHANDRAYAAN ( DESH )

 

                           चंद्रयान 


हजारों दिमागों के ,ज्ञान के  भंडार को समेटे ,

लाखों दिलों की दुआओं को लपेटे ,

हजारों हाथों की ऊर्जा को खर्चते ,

तुम ही तो बने हो | 


सभी की आशाओं पर खरे उतरते ,

जीवन के कठिन पथ पर आगे  बढ़ते ,

जग में देश का नाम रोशन करते ,

तुम ही तो बने हो | 


दुनिया के मुकाबले ,कम ही तुम्हारी कीमतें ,

 दुनिया के मुकाबले ,अधिक देते सबको मुस्कुराहटें ,

दुनिया के मुकाबले ,देते तुम अधिक राहतें ,

हमारे चंद्रयान तुम ही तो हो ,तुम ही तो हो | 


Thursday, July 13, 2023

JHOLII ( AADHYATMIK )

 

                        झोली 


जीवन और साँसें मिलीं हैं मुफ्त ,

मगर प्राणी तू कहाँ संभाले ? 

ऊपर वाले की देन को ,तू तो व्यर्थ गँवाए | 


नींद और शांति मिलीं बहुत हैं ,

पर तू जीवन अशांत बनाए ,

मिलीं मुफ्त की चीजों की तू ,

कीमत समझ ना पाए | 


हवा और पानी हैं बहुत जरूरी ,

क्यों इनको व्यर्थ बहाए ?

क्यों तू इनको गंदा करके ?अपना जन्म गँवाए ? 


सब कुछ दिया ऊपर वाले ने ,

मत उनको व्यर्थ गँवा तू ,

ऊपर वाले की देन से प्राणी ,

भर ले अपनी झोली तू | 


Wednesday, July 12, 2023

JANGLII FOOL ( KSHANIKA )

 

                        जंगली फूल 


ये है फूलों की दुनिया दोस्तों ,कुछ तो उगें  बगीचे में ,

कुछ उगें घर के गमले में ,ये सब तो नाजुक हैं दोस्तों ,

अच्छी सी देखभाल चाहिए इन्हें दोस्तों | 


मगर कुछ हैं जंगली फूल दोस्तों ,

जंगल के मौसम ,वहाँ के वातावरण को झेलते हुए ,

जो खिले रहते हैं ,वातावरण को महकाते हैं दोस्तों | 


हम भी नाजुक फूलों की तरह ,ना बनें दोस्तों ,

नाजुक - नाजुक से ,हम बनें जंगली फूल जैसे ,

हर मौसम झेलकर कठोर हो जाएँ  | 


खिले रहें हर मौसम में , महकाएँ अपनी दुनिया को ,

रंग और मुस्कानें बाँटें ,अपनी दुनिया को दोस्तों | 


Tuesday, July 11, 2023

GOOGAL JI ( KSHANIKA )

 

                    गूगल जी 


जय ,जय ,जय ,जय हो गूगल जी ,

सब प्रश्नों का उत्तर तुम देते ,

समस्याओं का हल तुम बताते ,

इंटरनेट की दुनिया के ,

तुम तो हो बेताज बादशाह ,

जय ,जय ,जय ,जय हो गूगल जी | 


सारी भाषाएँ हैं तुमको आतीं ,

दिशाएँ खुद तुम्हें रास्ता दिखातीं ,

हर ओर है तुम्हारा बोलबाला ,

तुमने सब प्रश्नों को है संभाला ,

जय ,जय ,जय ,जय हो गूगल जी | 


कोई विषय ना तुमसे अछूता ,

काल हरेक तुममें ही समाता ,

भूत ,भविष्य सब को तू जाने ,

चाहे हों जाने ,चाहे अनजाने ,

जय ,जय ,जय ,जय हो गूगल जी | 


Sunday, July 9, 2023

BACHPAN ( KSHANIKA )

 

                         बचपन 


बचपन खड़ा है सागर तट पर ,

पानी खूब उछाले ,

हाथों में भररेत वहाँ का ,

सागर में वो डाले | 


हँस - हँस कर वह नन्हें पैरों ,

खूब उछलता जाए ,

सब आने - जाने वालों को ,

करतब खूब दिखाए | 


देख खेल बचपन का दोस्तों ,

सब ही तो मुस्काएँ ,

नानी उन की यह सब देख ,

उन पर वारि जाए | 


सागर भी उन के खेलों का ,

खूब ही मज़ा उठाए ,

छोटी - छोटी लहरों को सागर ,

बचपन के पास भिजवाए | 


Wednesday, July 5, 2023

MEETHA GAAN ( CHANDRAMA )

 

                          मीठा गान 


आधी रात को नींद खुली ,उठी पीने को पानी ,

चम - चम कमरा चमक रहा,चंदा की फैली चाँदनी ,

मुस्काता चेहरा चंदा का,चमक चाँदनी की बढ़ा रहा ,

कमरा भी तो चाँदनी की ,चमक में नहा रहा | 


मैं मुस्काई देख कर ,चंदा का यह रूप ,

चंदा की थी चाँदनी ,या चंदा की थी धूप ,

ठंडी - ठंडी सी चमकीली ,चंदा की ये धूप ,

ना गर्मी थी इसमें कोई ,ना धूप की चकाचौंध | 


चंदा और चाँदनी मुस्काए ,देख मेरी मुस्कान ,

मेरे कानों में भी मानो ,बज उठी मीठी तान ,

सुर और ताल दोनों मिले ,बन गया मीठा गान ,

शब्दों की धड़कन मिली ,तैयार हो गया गान | 


Monday, July 3, 2023

CHANCHAL BADARI ( JALAD AA )

 

 

                        चंचल बदरी 


पूरे फैले आसमान में ,

नन्हीं सी एक बदरी आई ,

उड़- उड़ कर ,घूम - घूम कर ,

उसने तो शैतानी मचाई ,

नन्हीं बदरी फिरे अकेली ,

कोई ना साथी ,ना कोई सहेली ,

मैं कहती हूँ नन्हीं बदरी ,

मुझको तू बना ले अपनी सहेली | 


तुझको मैं प्यार करूँगी ,

तेरे संग मैं खेलूँगी ,

झूला तुझे झुलाऊँगी मैं ,

तेरे संग मैं झूलूँगी ,

दोनों सखियाँ इस दुनिया में ,

एक धरा पर ,दूसरी आसमान में ,

मगर एक बात दोनों में है ,

दोनों ही चंचल - चंचल ,बहुत ही चंचल हैं | 


Sunday, July 2, 2023

BAZAAR GAANV KAA ( JIVAN )

 

                        बाज़ार गाँव का 


भारत में जन्म लिया ,पली बढ़ी ,

लंबा जीवन बिता लिया ,मगर दोस्तों ,

मैंने गाँव नहीं देखा ,गाँव का जीवन ,

नहीं देखा और नहीं देखा ,वो है गाँव का बाज़ार | 


दिल्ली ,मुंबई में शामिल VILLAGE देखे ,

पर वो नहीं हैंअसली गाँव ,

और ना हैं उनमें गाँव का असली बाज़ार | 


कोई ना सखि ,ना सहेली ,

और ना कोई रिश्ता ,नाता ,गाँव में बसता ,

किस बहाने ,हम जाएँ देखने गाँव का बाज़ार | 


फिल्मों में ही देखे हैं मैंने ,

गाँव और गाँव का जीवन ,

मगर तमन्ना है बड़ी कि जाऊँ मैं ,

देखने गाँव  का  बाज़ार  |



Saturday, July 1, 2023

VILEEN ( RATNAAKAR )

 

                      विलीन 


हुई जो बर्फ़बारी ,आसमां से ,

पर्वतों ने बर्फ को रोका ,कहा मुस्का के ,

रुक जाओ , मैदानों में तुम नहीं जाओ ,

ढलानों पर ही ठहर जाओ | 


बर्फ को भी लगा ,सुंदर यह विचार ,

ठहर गई वह ,पर्वतों की ढलानों पर ,

सूर्य की किरणों ने जब उस ,

बर्फ को खूब चमकाया ,तो मानव ललचाया ,

यह सुंदर नज़ारा -- काश मेरे पास होता | 


सूरज की किरणोंने धीरे - धीरे ,

उस बर्फ को ऐसे पिघलाया , बर्फ से बना पानी ,

पानी की धारा ,रूप ले नदिया का ,

चली इठलाती ,बलखाती ,ढलानों से नीचे को | 


नदी लहराती हुई दौड़ी ,धरा को उपजाऊ बनाती ,

मैदानों में हरियाली बढ़ती गई ,

और दौड़ती गई ,दौड़ती गई ,

मीठे जल ,ठंडे जल से ,सभी की प्यास बुझाती गई ,

छलछलाती नदिया , अंत में जाकर  सागर में ,

विलीन हो गई ,विलीन हो गई |