Wednesday, July 5, 2023

MEETHA GAAN ( CHANDRAMA )

 

                          मीठा गान 


आधी रात को नींद खुली ,उठी पीने को पानी ,

चम - चम कमरा चमक रहा,चंदा की फैली चाँदनी ,

मुस्काता चेहरा चंदा का,चमक चाँदनी की बढ़ा रहा ,

कमरा भी तो चाँदनी की ,चमक में नहा रहा | 


मैं मुस्काई देख कर ,चंदा का यह रूप ,

चंदा की थी चाँदनी ,या चंदा की थी धूप ,

ठंडी - ठंडी सी चमकीली ,चंदा की ये धूप ,

ना गर्मी थी इसमें कोई ,ना धूप की चकाचौंध | 


चंदा और चाँदनी मुस्काए ,देख मेरी मुस्कान ,

मेरे कानों में भी मानो ,बज उठी मीठी तान ,

सुर और ताल दोनों मिले ,बन गया मीठा गान ,

शब्दों की धड़कन मिली ,तैयार हो गया गान | 


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