Sunday, September 20, 2015

SAKHAA TEEN ( JIVAN )

             सखा तीन 


   दाएँ झरना बाएँ झरना ,
    खड़ी हूँ मैं दोनों के बीच ,
     दायाँ हाथ एक ने  पकड़ा ,
      बायाँ पकड़ा दूजे ने ॥
     
 
    झर - झर - झर झरने बहते हैं,
  आपस में बातें करते हैं ,
   दोनों की बातें हैं अनोखी ,
       सुनली हैं देखो मैंने ॥
 
 
   दायाँ बोला बाएँ से ,
  शीतल , निर्मल जल है मेरा ,
  सबकी प्यास बुझाई है ,
   जल ये लाकर के मैंने ॥
  
 
 बायाँ भी हँस कर के बोला ,
  मेरा भी जल शीतल है ,
  धरा बहुत प्यासी थी बंधु ,
  उसकी प्यास बुझाई मैंने ॥
 
 
  दोनों ही फिर मुझसे बोले ,
  तुम क्यों यूँ चुपचाप खड़ीं ?
   हम दोनों  हैं साथ तुम्हारे ,
   दोनों का हाथ पकड़ा तुमने ॥
 
 
   बहुत दूर से आए दोनों ,
   शीतल जल है अपने पास ,
   उतर चले हैं धरा पे नीचे ,
  मिल जाएंगे दोनों साथ ॥
 
 
  जल नीचे मिल जाएगा ,
 धारा एक बनेगी फिर ,
  तुम भी आओ साथ हमारे ,
   तीनों सखा बनेंगे री ॥
 
 
झरनों की झर - झर धारा में ,
   मैं भी चल दी उनके साथ ,
   उनकी जब धारा एक हुई ,
  मैं भी बह दी उनके साथ ॥
 
 
  सखा बने हम तीनों ही ,
  साथ चले हम तीनों ही ,
  धरा के सुंदर - सुंदर दृश्य ,
   देख हँसे हम तीनों ही ॥                    
 

No comments:

Post a Comment