Wednesday, October 26, 2022

BHAR DO PRAAN ( AADHYATMIK )

 

                     भर दो प्राण 

 

चलती जाए मेरी लेखनी ,ऐसा दो वरदान ,

प्रभु जी मेरी ,लेखनी में भर दो प्राण | 


शब्द हों सुंदर ,भाव भरे हों ,

जीवन की ,साँसों  से भरे हों ,

पढ़ने वालों के होठों पर ,आ जाए मुस्कान ,

प्रभु जी मेरी ,लेखनी में भर दो प्राण | 


प्यार में डूबे हों ,शब्द रसीले ,

हों दुलार में ,गीले - गीले ,

पढ़ने वालों की आँखों में ,आ जाए चमकान ,

प्रभु जी मेरी ,लेखनी में भर दो प्राण | 


शब्दों से दिल ,धड़का जाए ,

महकी हुई सी ,राह दिखाए ,

पढ़ने वालों के दिलों में हो,मीठी सी धड़कान ,

प्रभु जी मेरी ,लेखनी में भर दो प्राण | 


गीतों में मेरे ,जीवन भर जाए ,

प्यार में डूबकर ,वो छलछलाएँ ,

पढ़ने वाले उन गीतों का ,दिल से कर लें गान ,

प्रभु जी मेरी ,लेखनी में भर दो प्राण | 


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