Monday, October 10, 2022

JIVAN GRIHANI KA ( KSHANIKA )

 

 

                       जीवन  गृहणी का  


एक कहावत सुनी बहुत थी ,

" बिन घरनी घर भूत का डेरा ",

सच है ये कहावत ,जरा देखो घर छड़ों का बंधु | 


गृहणी सँवारे घर को ,बनाए घर एक मकान को ,

घर में रहने वाले हर प्राणी की ,इच्छा समझे ,पूरी करे ,

क्या अन्य कोई कर सके बंधु ? 


एक सजा ,सँवरा घर एक खुश्बुओं से महकता घर ,

एक मुस्कानों से भरा घर ,किलकारियों से भरा घर ,

क्या अन्य कोई कर सके बंधु ? 


दिन के चौबीस घंटे ,महीने के तीसों दिन ,

साल के तीन सौ पैंसठ दिन ,अनवरत कार्य करे ,

क्या अन्य कोई कर सके बंधु ? 


मगर उसी गृहणी को ,इसका क्या फल मिले ?

कोई ना तनख्वाह ,कोई ना बोनस ,कोई ना छुट्टी ,

क्या अन्य कोई कर सके बंधु ? 


जरा समझो बंधु ,प्यार दो ,दुलार दो ,

मान दो ,सम्मान दो ,उसके चेहरे पे खिलती मुस्कान दो ,

आप इतना तो करो बंधु ,

आप इतना तो करो बंधु | 


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