Wednesday, June 20, 2012

SIMAT GAYA ( JIVAN )

                                         
 
 
                  सिमट गया
               
 
   रवि ने फैलाया है जाल , जाल में सिमट गया संसार ,
      हरे - भरे पेड़ों के फुनगे , और तिनके हैं समेटे ।
     
     चमक रश्मियों से चमका जग , फूलों से है सजी  बहार ,
       बिखर रही हैं सभी रश्मियाँ , जैसे हों सोने के तार ।
     
    जीवन उतर - उतर है आया , रवि के रथ से धरती पर ,
     अनुगृहित तो हुई धरा है , खिला प्यार जो धरती पर  ।
 
    धरा हो गई हरी - भरी ,  नदियाँ कल - कल गाएँ ,
  जीव भरे जीवन के रस से , जीवन - संगीत सुनाएँ  ।
 
    सुन संगीत मधुर - सा , बीना स्वयं हुई  झंकृत ,
  स्वर उपजे जो बीना से , सरसा जीवन तत्क्षण ।
 
   राग फ़ैल गए दिल में , उमगा हिलसा तन और मन ,
   इन सब से फ़ैली हरियाली , महक उठा जीवन उपवन ।
      
    इस महके से उपवन में , कलियाँ महकीं खुशियों की ,
    ओस की बूँदें चमक उठीं हैं , मोती की मानो लड़ियों सी । 
             

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