Wednesday, December 29, 2021

RAAHI ( JIVAN )

 

                 राही 

 

पूरब दिशा से एक राही आया ,

जग को अपनी रोशनी से चमकाया ,

पूरे जग में जीवन उपजाया ,

धूप ,हवा ,पानी पूरे जग में फैलाया | 

 

जीवन जो धरती पे फैला ,

उसने जग में मुस्कान को मुस्काया ,

उन्हीं मुस्कानों के जरिए ,

जीवन भी खिलखिलाया | 

 

कहीं बने समंदर गहरे ,

कहीं बने ऊँचे - ऊँचे पर्वत ,

गहराईयों में उपजा जीवन ,

ऊँचाईयों पर पहुँचाया | 

 

कहीं रेतीली धरा थी ,

रेतीली धरा तो रेगिस्तान बन गई थी ,

मगर धरा पर ही बंधु ,

जंगल घना बनाया | 

 

सभी जीव - जंतुओं ने ,

सुखमय और सुरक्षित रहने के लिए ,

जरूरतों के मुताबिक ही ,

अपना नीड़ बनाया | 

 

ऐसा जग देखकर ,

राही भी मुस्कुराया ,

अपने फलते -फूलते जग में ,

प्यार अपना फैलाया , 

प्यार अपना फैलाया | 


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